वाई पूर्ण कुमार ने गृह सचिव के खिलाफ दायर की याचिका, जांच से हटाने की मांग

वाई पूर्ण कुमार ने गृह सचिव के खिलाफ याचिका दायर की है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से चौदह दिसंबर तक मांगा जवाब। सात माह में कहां पहुंची जांच देनी होगी रिपोर्ट। आइपीएस अधिकारी ने पूर्व डीजीपी मनोज यादव पर भेदभाव का लगाया था आरोप तीन माह में करनी थी जांच।

Anurag ShuklaTue, 07 Dec 2021 05:49 PM (IST)
अंबाला रेंज के पूर्व आइजी वाई पूर्ण कुमार ने याचिका दायर की।

अंबाला, [दीपक बहल]। पूर्व डीजीपी मनोज यादव और अंबाला रेंज के पूर्व आइजी वाई पूर्ण कुमार के बीच छिड़ा विवाद थमता नजर नहीं आ रहा। आइपीएस अधिकारी ने अब गृह सचिव के खिलाफ पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर जांच किसी दूसरे आइएएस अधिकारी या फिर मौजूदा डीजीपी से करवाने की मांग की है। करीब सात माह बाद भी गृह सचिव ने जांच पूरी नहीं की, इसको लेकर भी याचिका में सवाल उठाए गए हैं। सोमवार को हाईकोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए 14 दिसंबर तक राज्य सरकार से स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।

सात माह में गृह सचिव की ओर से क्या-क्या जांच की गई है, इसकी स्टेटस रिपोर्ट देनी होगी। हाईकोर्ट ने ही 18 मई 2021 को गृह सचिव को वाई पूर्ण कुमार की याचिका पर तीन माह में जांच पूरी कर रिपोर्ट मांगी थी। अब तक जांच पूरी नहीं हो पाई जिसको लेकर पिछले दिनों आइपीएस अधिकारी ने अवमानना याचिका भी दायर की थी। इस याचिका पर सुनवाई 24 जनवरी 2022 को होनी है। अभी अवमानना याचिका विचाराधीन ही थी कि वाई पूर्ण कुमार ने एक और याचिका नवंबर माह के अंतिम सप्ताह में दायर कर दी।

अधिकारी ने पूर्व डीजीपी मनोज यादव पर भेदभाव करने और उनको प्रताडि़त करने जैसे आरोप लगाए थे। बता दें कि इस विवाद की शुरुआत अंबाला के शहजादपुर थाने से शुरू हुई थी। दरअसल अगस्त 2020 को आइपीएस वाई पूर्ण कुमार अंबाला रेंज के शहजादपुर ट्रैफिक थाने में शिवलिंग की स्थापना के मौके पर गए थे। तत्कालीन एसपी अभिषेक जोरवाल भी मौजूद रहे। उस समय डीजीपी मनोज यादव ने वाई पूर्ण कुमार से जवाब तलब किया था। डीजीपी ने राज्य के अन्य जिलों से भी धार्मिक स्थलों को लेकर डिटेल मांगी थी।

वाई पूर्ण कुमार ने आरोप लगाया था कि उनको प्रताडि़त करने के लिए बार-बार जवाब तलब किया जा रहा है, जबकि राज्य में इस तरह के धार्मिक स्थल बने हुए हैं। भेदभाव का आरोप लगाते हुए वाई पूर्ण कुमार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसका हाईकोर्ट ने तीन माह में निपटारा करने के आदेश दिए थे। इसी पर अब वाई पूर्ण कुमार चाहते हैं कि जांच गृह सचिव की जगह मौजूदा डीजीपी पीके अग्रवाल करें या फिर मनोज यादव से सीनियर आइएएस 1986 या 1987 बैच के अधिकारी से जांच करवाई जाए।

प्रदेश के पुलिस थानों में दो सौ से अधिक धार्मिक स्थल

राज्य के थाना चौकियों में सैंकड़ों पूजा स्थल बने हैं, जिनमें से अधिकतर ने पंजाब पुलिस नियमावली 3.3(2) के अनुसार अनुमति प्राप्त नहीं है। डीजीपी पीके अग्रवाल ने हाल ही में राज्य के सभी आइजी व एसपी से ब्यौरा मांगा था, जिसकी जानकारी डीजीपी कार्यालय पहुंच चुकी है। मंदिर, दरगाह, पीर, गुरुद्वरा भी बने हुए हैं। इन में से इक्का-दुक्का धार्मिक स्थल 1947 से बने हुए हैं। फरीदाबाद रेंज से 29 धार्मिक स्थलों को नियमित करने का प्रस्ताव पुलिस मुख्यालय भेजा गया है। इस तरह से सभी जिलों से रिपोर्ट पहुंच चुकी है।

अभी इन धार्मिक स्थलों को नियमित करने पर फैसला लिया ही जाना था कि आइपीएस वाई पूर्ण कुमार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दायर कर दीं। राज्य में 200 से अधिक धार्मिक स्थल थाना चौकियों में बने हुए हैं। फरीदाबाद में 28 धार्मिक स्थल बने हुए हैं। इसी प्रकार अंबाला रेंज में करीब 24, कैथल में 5 धार्मिक स्थल बने हुए हैं। करनाल पुलिस लाइन में अप्रैल 2016 में मंदिर का शिलान्यास किया, जिसका उद्घाटन 2020 में हुआ। इसको नियमित करने को लेकर भी प्रस्ताव भेजा गया है।

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