एक तरफ तीसरी लहर का डर, दूसरी तरफ पानीपत के गांवों में पहुंच रहा कोरोना

गांव सनौली खुर्द अड्डे पर लॉक डाउन में भी सड़कों में घूमते लोग।

एक तरफ कोरोना की दूसरी लहर का डर तो दूसरी तरफ गांवों में कोरोना के बढ़ते मामलों ने स्‍वास्‍थ्‍य विभाग की टेंशन बढ़ा दी। गांवों में सख्ती के साथ जागरूकता की जरूरत टूट रहे कोविड के नियम। डिडवाड़ी के बाद अब बुड़शाम में दिख रहा खतरा खांसी-जुकाम के मरीज बढ़े।

Anurag ShuklaFri, 07 May 2021 02:27 PM (IST)

पानीपत, जेएनएन। एक तरफ तीसरी लहर का डर चल रहा है, दूसरी तरफ कोरोना संक्रमण गांवों में पहुंचने लगा है। कहीं गांवों से तीसरी लहर न चल पड़े। कोरोना महामारी के बीच प्रदेश में लाकडाउन लगा है। केवल जरूरतमंद सामग्री से संबंधित दुकान खोली जा सकती है। बेवजह घूमने वालों पर पुलिस सख्ती बरत रही है। मास्क न लगाने पर चालान होता है। लेकिन ग्रामीण आंचल के हालात इससे एकदम अलग है।

जहां न केवल लोगों के चेहरे पर मास्क नहीं दिखा, बल्कि शारीरिक दूरी का पालन भी नहीं हो रहा है। यही कारण है कि धीरे धीरे कोरोना का संक्रमण गांवों में भी बढ़ रहा है। ग्रामीण आंचल में कोविड-19 के नियमों को लेकर बरती जा रही इस लापरवाही को लेकर प्रशासन भी गंभीर नहीं दिख रहा है। ऐसे में यहां सख्ती के साथ जागरूकता लाने की जरूरत है। डिडवाड़ी के बाद बुड़शाम में खतरा दिख रहा है। खांसी और जुकाम के मरीज बढ़ रहे हैं। कुछ मौत भी हुई हैं। कोरोना की आशंका है। जांच के बाद ही पता चल सकेगा।

गौरतलब है कि पिछले साल कोरोना का संक्रमण बढ़ा और लाकडाउन लगा तो गांवों में भी सैनिटाइजर के छिड़काव, मास्क लगाने जैसे जागरूकता अभियान चलने से लेकर बाहरी लोगों के आने पर रोक तक लगा दी गई थी। इसके अलावा ठीकरी पहरे तक लगे थे। हाल में कोरोना महामारी का असर पिछले साल के मुकाबले ज्यादा है। प्रदेश में सप्ताह भर का लाकडाउन भी लगा है। परंतु ग्रामीण आंचल में पिछले साल जैसा कुछ नहीं दिख रहा है। न स्वास्थ्य विभाग की गांवों में सक्रियता दिख रही है और न ही प्रशासन की तरफ से किसी तरह की कोई सख्ती।

कोई पहरा नहीं

यही कारण है कि बाहरी लोगों के आवागमन पर न कोई रोक और न किसी तरह का कोई ठीकरी पहरा है। इतना ही नहीं, बल्कि गांव में भी लोग घरों से बाहर निकलने पर मास्क तक का प्रयोग नहीं कर रहे हैं। महामारी के बीच भी टोलियों में बैठकर हुक्का पीना आम बात है। लोग बेवजह घरों से बाहर निकल रहे हैं। ऐसे में कोरोना का कहर ग्रामीण आंचल की तरफ भी रुख कर रहा है।

गांवों में हो रही हैं मौत

ग्रामीण आंचल में कोरोना आशंकितों के साथ मलेरिया, टाइफाइड, बुखार, खांसी व जुकाम के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। काफी गांव में हालात ऐसे हैं कि हर घर में कोई न कोई बीमारी की चपेट में हैं। इसराना खंड के गांव डिडवाड़ी में जहां आधा दर्जन से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं तो गांव बुड़शाम में भी पिछले करीब सवा माह में दर्जन भर के करीब महिला व पुरुषों की मौत हो चुकी है। ये लोग किसी न किसी बीमारी से ग्रस्त थे। बुधवार को जहां एक युवक की मौत हुई, वहीं वीरवार को भी एक महिला की मौत हुई। हर दूसरे व तीसरे दिन गांव में मौत से ग्रामीण भी हैरान है। जो गांव में सुख शांति को लेकर दादा खेड़ा पर हवन यज्ञ तक करा चुके हैं।

दुकानों पर टूट रहे नियम 

गांव में खुली करियाना व अन्य दुकानों पर भी कोविड-19 के नियम टूट रहे हैं। दुकानदारों ने न तो सैनिटाइजर रखा हुआ है, न शारीरिक दूरी के पालन को लेकर ग्राहकों के लिए गोल चक्कर बना रखे हैं। इतना ही नहीं, दुकानदार खुद भी मास्क तक का प्रयोग नहीं कर रहे हैं। इसके अलावा लोगों से खाद्य सामग्री से लेकर फल व सब्जियों के मनचाहे दम तक वसूले जा रहे हैं।

कराया जा रहा है सैनिटाइजर का छिड़काव

डीडीपीओ राजबीर सिंह का कहना है कि पूरे जिले के गांवों में सैनिटाइजर का छिड़काव कराया जा रहा है। इसराना खंड के सभी गांवों में छिड़काव हो चुका है। जहां तक बात मास्क लगाने व शारीरिक दूरी का पालन करने संबंधित जागरूकता की है, इसको लेकर चौकीदारों के माध्यम से मुनादी कराई जा रही है। उन्होंने ग्रामीणों से गांव में बाहरी लोगों के आने पर पहले उसे सैनिटाइज करने व ठीकरी पहरा तक लगाने का आह्वान किया, ताकि कोरोना संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।

मतलौडा में नहीं दिखा लॉकडाउन का असर, बिकती रही शराब

मतलौडा कस्बे में लॉकडाउन का कोई असर नहीं है। दुकानदार शटर नीचे करके सामान बेच रहे हैं। शराब के ठेके सरेआम खुल रहे हैं। कुछ ठेकेदार खिड़की के रास्ते से शराब बेचते रहे। मतलौडा बस अड्डा चौक पर दो पुलिसकर्मी बैठे दिखाई दिए। पुलिस के सामने ही दुकानदार दुकानें खोलकर बैठे रहे।

सनौली-बापौली अड्डे पर रहती है भीड़

सनौली और बापौली अड्डे पर दुकानों पर लोगों की भीड दिखाई देने लगी है। लोग बिना वजह घूमते दिखाई दिए। इस वर्ष तो ड्यूटी मजिस्ट्रेट, पुलिस नहीं दिखाई दे रही। ब्लॉक के अलग-अलग गांवों में भी लोग घरों के बाहर गलियों में रहते हैं। ज्यादातर लोग मास्क नहीं लगाए होते।

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