जींद में किसान के बेटों का कमाल, सरकारी स्कूल से पढ़े, आर्मी और नेवी में बने लेफ्टिनेंट

राजेंद्र भारद्वाज के बड़े बेटे मनोज कुमार 2014 में आर्मी में लेफ्टिनेंट लगे। दोनों बेटों की 12वीं कक्षा तक स्कूली पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल में हुई है। मनोज साल 2006 में आर्मी में सिपाही के पद पर नियुक्त हुआ था। वहीं संदीप साल 2004 में सिपाही भर्ती हुआ था।

Rajesh KumarThu, 16 Sep 2021 03:36 PM (IST)
जींद में किसान के दो बेटे सरकारी स्कूल में पढ़कर आर्मी और नेवी में बने लेफ्टिनेंट।

जींद, जागरण संवाददाता। जींद के गांव ढिगाना के संदीप भारद्वाज नेवी में लेफ्टिनेंट लगे हैं। वे पहले नेवी में जेसीओ (जूनियर कमीशन्ड आफिसर) के पद पर तैनात थे। संदीप भारद्वाज के पिता राजेंद्र भारद्वाज किसान हैं।राजेंद्र भारद्वाज के बड़े बेटे मनोज कुमार 2014 में आर्मी में लेफ्टिनेंट लगे थे। दोनों बेटों की 12वीं कक्षा तक स्कूली पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल में हुई है।

नौकरी के दौरान भी पढ़ाई जारी रखी

मनोज साल 2006 में आर्मी में सिपाही के पद पर नियुक्त हुआ था। वहीं संदीप साल 2004 में सिपाही भर्ती हुआ था। नौकरी के दौरान भी अपनी पढ़ाई जारी रखी। साल 2019 में संदीप जेसीओ लग गया था। राजेंद्र भारद्वाज ने बताया कि उसके पास केवल दो एकड़ थी। खुद 10वीं कक्षा पास राजेंद्र घर का खर्च चलाने के लिए प्राइवेट नौकरी भी करते थे। उसी से घर का काम चलाया और बेटों को पढ़ाया। एक लड़की है, जिसकी शादी हो चुकी है। फिलहाल राजेंद्र का परिवार जींद शहर की इंप्लाइज कालोनी गली नंबर सात में रहता है।

खेत के काम भी बंटाते थे हाथ

मनोज और संदीप दोनों पढ़ाई के साथ-साथ अपने पिता के साथ खेत के काम में भी हाथ बंटवाते थे। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के बावजूद हिम्मत नहीं हारी। मेहतन के दम पर पहले सिपाही की नौकरी प्राप्त की। लेकिन इरादा कुछ बड़ा करने का था। उसी लक्ष्य तक पहुंचने के लिए लगातार पढ़ाई जारी रखी। मनोज कुमार ला कर चुके हैं। वहीं संदीप भी उच्च शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं। 

परिवार का साथ मिला

राजेंद्र भारद्वाज की पत्नी केलावती हाउस वाइफ हैं। जो खेती के काम में भी हाथ बंटवाती है। मनोज और संदीप की शादी हो चुकी है। मनोज की एक लड़की और एक लड़का है। संदीप के भी एक लड़का और एक लड़की है। बहन कविता के दो लड़के हैं, जिनके पति नरेंद्र सरकारी टीचर हैं। मनोज और संदीप के यहां तक पहुंचने में पूरे परिवार का अहम योगदान रहा।

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