DAP खाद की किल्लत से किसानों ने किया हंगामा, कैथल का पिहौवा चौक साढ़े तीन घंटे किया जाम

कैथल में डीएपी की किल्‍लत की वजह से किसानों ने हंगामा कर दिया। किसानों ने पिहौवा चौक पर साढ़े तीन घंटे जाम लगा दिया। किसानों का आरोप है कि डीएपी की सरकारी कीमत 1200 रुपये लेकिन बिक्री केंद्रों पर 1800 रुपये तक वसूले जा रहे।

Anurag ShuklaThu, 28 Oct 2021 03:58 PM (IST)
कैथल का पिहौवा चौक पर जाम लगाते किसान।

कैथल, जागरण संवाददाता। डीएपी खाद की किल्लत गहराती जा रही है। वीरवार को जब घंटों तक किसानों को अनाज मंडी स्थित खाद बिक्री केंद्र पर डीएपी नहीं मिला तो उन्होंने शहर की ओर रुख किया। वे सुबह पौने 11 बजे पिहोवा चौक पर पहुंचे और चारों सड़कों को जाम कर दिया। जाम की सूचना मिलते ही 15 मिनट में एसडीएम डा.संजय कुमार और कृषि विभाग के उपनिदेशक डा.कर्म चंद मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसानों को कई तर्क देकर समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं माने। लंबी-चौड़ी बहस और गर्मागर्मी के बाद उन्होंने फिर से चौक जाम कर दिया।

किसानों का आरोप था कि सरकारी खरीद केंद्र पर डीएपी उपलब्ध नहीं है, जबकि मार्केट में इसकी कालाबाजारी हो रही है। जिस डीएपी के बैग का सरकारी रेट 1200 रुपये है, वह मार्केट में 1550 से 1800 रुपये में बेचा जा रहा है। बैग के साथ किसानों को 180 रुपये की दवाई भी जबरदस्ती दी जा रही है। कोई किसान अगर दवाई लेने से मना कर देता है तो उसे यूरिया नहीं दिया जाता।

किसान अनूप सिंह, नारायण, रामफल, सुखविंद्र सिंह, महताब सिंह, करनैल सिंह, अमित, इंद्र, जसपाल सिंह, धर्मवीर, बलकार, तरसेम आदि ने कहा कि वह सुबह चार बजे से खाद बिक्री केंद्र पर आकर लाइन में लग गए थे, लेकिन साढ़े दस बजे तक भी उन्हें खाद नहीं दिया गया। बताया गया कि खाद खत्म हो गया है, जबकि इसकी जमकर कालाबाजारी हो रही है। इस पर एसडीएम ने कहा कि उन्होंने टीम के साथ कई जगह स्टाक और रिकार्ड की जांच करके मिलान किया है, लेकिन कहीं भी कालाबाजारी जैसी स्थिति सामने नहीं आई। अगर कहीं ऐसा हो रहा है तो किसान सूचना दें, वह खुद मौके पर जाकर छापामारी करेंगे। उन्होंने किसानों काे अपना फोन नंबर देते हुए किसी भी वक्त फोन करके कालाबाजारी की सूचना देने काे कहा। गांव लैंडरपीरजादा के किसान हरजिंद्र सिंह ने कहा कि उन्हें दो हजार रुपये में डीएपी का बैग दिया जा रहा है।

अब शिफ्टों में आ रहा डीएपी

कृषि उप निदेशक डा.कर्म चंद ने बताया कि पहले हर जिले को एकमुश्त डीएपी रैक भेज दिए जाते थे, जिससे खाद की समस्या नहीं रहती थी। इस बार एेसा नहीं है। इस साल शिफ्टों में रैक भेजे जा रहे हैं। अभी तक डेढ़ लाख बैग ही मिले हैं, जबकि चार लाख की डिमांड है। उन्होंने किसानों को बताया कि जल्दी ही करनाल से डीएपी का एक रैक पहुंच जाएगा। प्रत्येक किसान को पांच-पांच बैग दे दिए जाएंगे।

यह चीन से बिगड़े रिश्तों का असर है-एसडीएम

एसडीएम डा.संजय कुमार ने कहा कि डीएपी को लेकर किसानों की समस्या और चिंता जायज है। जिन किसानों ने अगेती गेहूं की बिजाई कर रखी है, अगर उन्हें अभी डीएपी नहीं मिलता है तो बीज खराब हो जाएगा। उन्होंने बताया कि डीएपी खाद का ज्यादातर आयात चीन से होता था, लेकिन अब उससे बिगड़े रिश्तों के चलते आयात बंद हो गया है। स्थानीय फैक्ट्री डिमांड के हिसाब से आपूर्ति नहीं कर पा रही हैं, जिसके चलते हर जगह डीएपी की किल्लत खड़ी हो गई है। एसडीएम ने कहा कि किसानों ने कालाबाजारी को लेकर शिकायत की है। इसकी व्यापक जांच कराई जाएगी। अगर कहीं भी ऐसा कुछ मिलता है तो लाइसेंस रद करके संबंधित विक्रेता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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