यमुनानगर में अवैध कालोनियों की फर्जी रजिस्ट्रियां, अधिकारियों की चुप्‍पी

यमुनानगर में अवैध कॉलोनियों की फर्जी रजिस्‍ट्री का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में अधिकारी चुप्‍पी साधे हैं और पुलिस को रिकॉर्ड उपलब्‍ध नहीं करवा रहे है। 27 जून को गांधी नगर थाना में दर्ज हुआ था केस।

Anurag ShuklaTue, 27 Jul 2021 03:36 PM (IST)
यमुनानगर में अवैध कॉलोनी की फर्जी रजिस्‍ट्री।

यमुनानगर, जागरण संवाददाता। अवैध कालोनियों में फर्जी तरीके से रजिस्ट्री के मामले में नगर निगम अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं। केस की तफ्दीश के लिए अधिकारी पुलिस को आवश्यक रिकार्ड उपलब्ध नहीं करवा रही है। 28 जून को पुलिस ने लिखित में लेटर देकर रजिस्ट्रियों संबंधित दस्तावेजों की मांग की थी। लेकिन एक माह बाद भी स्थिति जस की तस है। जिसके चलते पुलिस की कार्रवाई भी अधर में लटकी हुई है। बता दें कि नगर निगम के डिप्टी म्युनिसिपल कमिश्नर की शिकायत पर 27 जून को गांधीनगर थाना पुलिस ने केस दर्ज किया था।

यह था मामला

नगर निगम के फर्जी लेटर हैड पर अवैध कालोनी में रजिस्ट्री करवाने से संबंधित फर्जीवाड़े का पता उस समय लगा। जब तीन महिलाओं के नाम से रजिस्ट्री से पहले तस्दीक कराने के लिए फाइल जमा कराई। लगातार ऐसे तीन लेटर मिलने के बाद जांच में सामने आया कि नगर निगम का लेटर हेड फर्जी है। उस पर साइन नकली थे। यहां तक कि क्रमांक नंबर तक गलत लगाया गया था। जिसके बाद ही नगर निगम तत्कालीन कमिश्नर की ओर से एसपी कमलदीप गोयल को इस संबंध में पत्र भेजा गया था।

निगम कर्मियों की मिलीभगत की आशंका

अवैध कालोनी में रजिस्ट्री कराने को लेकर फर्जीवाड़े में नगर निगम के कर्मचारियों की भी मिलीभगत की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता। बताया जा रहा है कि दलाल के माध्यम से रजिस्ट्री से पहले नगर निगम में फाइल तस्दीक के लिए आती है। यदि कोई खुद अपनी फाइल लेकर जाए, तो निगम कर्मचारी उन्हें काफी चक्कर कटाते हैं। जिस वजह से आम आदमी दलाल से ही संपर्क करता है। निगम से संबंधित कार्य भी वहीं पूरा कराते हैं। लोग भी सस्ते के चक्कर में अवैध कालोनियों में प्लाट का सौदा कर लेते हैं। नियमानुसार इनकी रजिस्ट्री नहीं हो सकती। ऐसे में नगर निगम में कर्मियों व दलालों की मिलीभगत से फाइल पूरी कर ली जाती है।

पहले भी लग चुके आरोप

नगर निगम में पहले भी गड़बड़ी के आरोप लगते रहे हैं। अब फर्जी तरीके से अवैध कालोनियों में रजिस्ट्रियां किए जाने का मामला उजागर हो गया है। दरअसल, प्लाट की रजिस्ट्री कराने के लिए निगम की ओर से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना जरूरी होता है। जो इस बात का प्रमाण होता है कि रजिस्ट्री के लिए यह कालोनी सभी नियमों पर खरी है। अवैध कालोनी की रजिस्ट्री नहीं हो सकती। अवैध कालोनियों में रजिस्ट्री कराने के लिए ही यह फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। हालांकि यह जांच में ही साफ हो सकेगा, लेकिन फिलहाल इस संबंध में कई सवाल उठ रहे हैं। चर्चा यह है कि आखिर निगम अधिकारी पुलिस को रिकार्ड उपलब्ध करवाने में गुरेज क्यों रहे हैं?

'इस मामले में जो भी रिकार्ड पुलिस को चाहिए, वह उपलब्ध करवा दिया जाएगा। इस संबंध में संबंधित अधिकारियों से बात करेंगे। रिकार्ड उपलब्ध करवाने में देरी क्यों बरती जा रही है, इसका भी पता करेंगे। मामले की निष्पक्ष तौर पर जांच करवाई जाएगी। जिसकी संलिप्तता मिलेगी, उसके खिलाफ निश्चित रूप ेस कार्रवाई करवाई जाएगी।

अजय सिंह तोमर, कमिश्नर, नगर निगम।'

'केस की तफ्दीश के लिए रजिस्ट्रियों से संबंधित रिकार्ड चाहिए। इस संबंध में निगम अधिकारियों को 28 जून को पत्र लिखा था। आज तक रिकार्ड नहीं मिला। जिसके चलते आगामी कार्रवाई अधर में है। इस रिकार्ड के आधार पर ही आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

जनकराज, जांच अधिकारी।'

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