Panipat Haridwar Road: पानीपत हरिद्वार रोड पर न आना, लोगों को लगाने पड़े बैरिकेड, जानिये हालात

पानीपत से हरिद्वार जाने वाले रास्ते पर दस फीट तक चौड़े गड्ढे। हर रोज हादसे हो रहे। लोगों ने गांव की तरफ से निकलने का प्रयास किया तो वहां बैरीकेड लगा दिए गए। अभी निर्माण के नहीं दिख रहे आसार।

Anurag ShuklaMon, 20 Sep 2021 01:08 PM (IST)
पानीपत से हरिद्वार जाने वाली रोड पर लगे बैरिकेड।

पानीपत, जागरण संवाददाता। पानीपत में है सनौली रोड। सीधे जाता है हरिद्वार तक। पानीपत में विद्यानंद कालोनी के के पास से दो किलोमीटर तक सड़क इतनी बदतर हो चुकी है कि हर रोज हादसे हो रहे हैं। पांच-पांच फीट के गड्ढे हैं। इनकी चौड़ाई दस फीट से ज्यादा है। एक बार जो इस सड़क पर आ जाता है, प्रशासन को जरूर कोसता है। काला अंब के नजदीक उग्राखेड़ी के राजकीय स्कूल के पास से भारी वाहन बाईपास होकर जाने लगे तो ग्रामीणों ने बैरिकेड लगवा दिए। दरअसल, भारी वाहनों की वजह से गांव के लोग चोटिल होने लगे। सड़क भी टूटने लगी। खुद को बचाने के लिए लोगों ने भारी वाहनों की इंट्री पर रोक लगा दी है।

पानीपत में उग्राखेड़ी के राजकीय स्कूल के पास से अंदर से होते हुए एक रास्ता निकलता है। ये रास्ता आगे से सनौली रोड से जुड़ता है। यहीं से सेक्टर 24 की तरफ से निकला जा सकता है। सनौली रोड के टूटे होने के कारण वाहन इस रास्ते से होकर जाने लगे। इसका असर ये हुआ कि दो दिन से चार लोग चोटिल हो चुके हैं। हादसे बढ़ने पर लोगों ने खुद ही बैरिकेड लगा दिए हैं। भारी वाहनों को रोका जा रहा है। इन्हें वापस भेजा जा रहा है। कहा जा रहा है कि सनौली रोड से ही निकलिए। उग्राखेड़ी के गांव में प्रवेश नहीं मिलेगा।

हर रोज गिर रहे वाहन

सनौली रोड पर हालात इतने बदतर हो चुके हैं हर रोज वाहन गिर रहे हैं। सड़क पर पानी भरा हुआ है। गड्ढे का अंदाजा नहीं लग पाता। इस वजह से बाइक सवार तो सीधे नीचे ही गिर जाते हैं। आटो चालक सवारियों सहित यहां गिर चुके हैं। सनौली रोड ही काफी फैक्ट्रियां हैं। कई बार कंबल और कपड़ों से लदे वाहन तक पलट चुके हैं।

अभी सुधार संभव नहीं

प्रशासन की निष्क्रियता का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि अभी सुधार संभव नहीं लग रहा। कहा जा रहा है पहले एनएचएआइ अपना काम खत्म कर ले। यमुना के पास पुल बन जाए। इसके बाद इस जगह को पीडब्लयूडी के हवाले किया जाएगा। तब पीडब्लयूडी की टीम सुधार करेगी। सड़क निर्माण से पहले कम से कम गड्ढों को तो भरा जा सकता है। वो भी नहीं किया जा रहा।

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