यमुनानगर में नियमित हुई कालोनियों का विकास अटका, शिकायतों से घिरे विकास कार्यों के टेंडर

यमुनानगर में नियमित हुई कालोनियों का विकास अटक गया है। कालोनियों के विकास कार्यों के टेंडर शिकायतों से घिरे हुए है। टेंडर से संबंधित टेक्निकल बिड खुल चुकी है लेकिन फाइनेंसियल बिड खोलने से निगम अफसर हिचक रहे हैं।

Rajesh KumarSun, 28 Nov 2021 03:09 PM (IST)
यमुनानगर की मायापुरी कालोनी में कच्ची पड़ी सड़क।

यमुनानगर, जागरण संवाददाता। तीन वर्ष पहले नियमित हुई कालोनियों में विकास कार्यों के टेंडर सिरे चढ़ते नजर नहीं आ रहे हैं। कारण कुछ और नहीं बल्कि एक के बाद एक शिकायत मिलना बताया जा रहा है। हालांकि टेंडर से संबंधित टेक्निकल बिड खुल चुकी है, लेकिन फाइनेंसियल बिड खोलने से निगम अफसर हिचक रहे हैं। चर्चा यह भी है कि इसको लेकर उच्च स्तर पर मंथन चल रहा है। उधर, निगम अधिकारी इस संबंध में कुछ भी खुलकर बोलने से गुरेज कर रहे हैं। यही तर्क दिया जा रहा है कि हर पहलु की बेहतरी से जांच के बाद ही टेक्निकल बिड खोली जाएगी। बता दें कि यह शहर के बड़े कामों में शामिल है। कई छोटे-बड़े ठेकेदार व एजेंसियों की निगम इस पर टिकी हुई है। उधर, कुछ ठेकेदारों को टेंडर रिकाल किए जाने का भी अंदेशा है।

यह भी लग चुके आरोप

ठेकेदार विक्रम सिंह का आरोप है कि एक से 22 वार्ड में विकास कार्यों के लिए जो टेंडर लगाए गए हैं, उनमें खामियां बरती गई हैं। यह टेंडर हिदायतों के अनुरूप नहीं हैं। मनमर्जी से शर्तें लगाकर टेंडर प्रक्रिया को बाधित किया जा रहा है। आरोप है कि जिन एजेंसियों ने यह टेंडर भरे हैं, उनके दस्तावेजों में भी खामियां हैं। समांतर कार्यों के सर्टिफिकेट आधे-अधूरे हैं। जबकि निगम अधिकारी इनकी जांच तक करने की जहमत नहीं उठा रहे हैं। अधिकारी एजेंसियों पर मेहरबानी बरत रहे हैं।

गत दिनों ये टेंडर लगे

नियमित हुई कालोनियों में निगम की ओर से गलियों व नालियों के निर्माण के लिए टेंडर लगाए गए हैं। वार्ड नंबर 22 में 2.40 करोड़ , 21 में 2.28 करोड़ 12 में 2.22 करोड़, पांच में 1.42 करोड़, वार्ड एक में 90 लाख, वार्ड 11 में 1.77 करोड़ व वार्ड 11 में ही 1.23 करोड़ के अन्य कार्यों के टेंडर लगाए गए हैं।

पहले भी रद हो चुके टेंडर

नवंबर-2019 में कालोनियों में सड़कों के निर्माण के लिए दो बार टेंडर लगाया गया। लेकिन दोनों बार एजेंसी शर्तों को पूरा नहीं कर पाई और टेंडर रद करना पड़ा। जनवरी 2020 में अधिकारियों ने कालोनियों में निकासी व सड़कों के निर्माण के लिए 22 करोड़ रुपये का एक टेंडर लगाया है, जबकि पार्षद छोटे-छोटे टेंडर किए जाने के पक्ष में थे। पार्षदों का कहना था कि एक ही एजेंसी को सभी कार्यों के टेंडर अलाट करने का निर्णय सही नहीं है। वार्ड वाइज टेंडर लगने चाहिए। एक ही एजेंसी पर काम होने पर काम समय पर पूरा नहीं होगा। वार्ड के हिसाब से टेंडर लगने पर काम पर निगरानी रखी जाएगी। समय पर काम पूरा होने पर जनता को लाभ होगा। अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा

डेढ लाख की आबादी के लिए राहत

हालांकि प्रथम चरण में कुछ कालोनियों में ही विकास कार्यों के टेंडर लगाए गए हैं। लेकिन नियमित हुई सभी 69 कालोनियों में सड़कों के निर्माण का काम होना है। इन कालोनियों में करीब डेढ लाख की आबादी है। अधिकांश कालोनियां 20-25 वर्ष पहले से बसी हुई हैं। इन कालोनियों में पानी की निकासी की समस्या बड़ी है। गलियां कच्ची पड़ी हैं। नालियों की नियमित रूप से सफाई नहीं होती। कचरे का उठान नहीं होता। जोहड़ गंदगी से अटे पड़े हैं। इनकी सफाई आज तक नहीं हुई है। अधिकांश गांवों में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था नहीं है। जो लाइटें लगी हैं, वह खराब हैं। बारिश के दिनों में समस्या और भी बढ़ जाती है। लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है।

टेंडर प्रक्रिया में बरती जा रही पारदर्शिता

मेयर मदन चौहान ने बताया कि नियमित हुई कालोनियों में विकास कार्यों की प्रक्रिया चल रही है। टेंडर प्रक्रिया में पूरी तरह पारदर्शिता बरती जा रही है। नियमों के अनुरूप ही अलाट किए जाएंगे।

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