शहर के संगठनों की मांग, पानीपत के दशहरे को मिले राष्ट्रीय पहचान

कुल्लू और मैसूर के दशहरे की तर्ज पर पानीपत के दशहरा पर्व को भी राष्ट्रीय पहचान मिलनी चाहिए।

JagranThu, 07 Oct 2021 05:15 AM (IST)
शहर के संगठनों की मांग, पानीपत के दशहरे को मिले राष्ट्रीय पहचान

जागरण संवाददाता, पानीपत : कुल्लू और मैसूर के दशहरे की तर्ज पर पानीपत के दशहरा पर्व को भी राष्ट्रीय पहचान मिलनी चाहिए। पूरे देश में सबसे अधिक हनुमान स्वरूप पानीपत में बनते हैं। सबको रोशनी फाउंडेशन ने यह मांग उठाई है। एसडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में बैठक कर फाउंडेशन के संस्थापक विकास गोयल ने कहा कि पानीपत का नाम देश-विदेश में और प्रसिद्ध हो, इसके लिए यहां के दशहरा पर्व को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलनी चाहिए। इसके लिए जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सामाजिक और धार्मिक संगठन मांग उठाएंगे।

उन्होंने कहा कि पानीपत का दशहरा सांस्कृतिक विरासत संजोए हुए हैं। वर्तमान में भी देश-विदेश के लोग पानीपत के दशहरे को देखने पहुंचते हैं। सांस्कृतिक धरोहर को नियोजित ढंग से प्रस्तुत करने की। इसके लिए सबको रोशनी फाउंडेशन ने इस आंदोलन का आगाज किया है। मुख्यमंत्री से मांग करेंगे कि पानीपत के आयोजन को राजकीय पर्व के रूप में मनाया जाए। संगठन के प्रमुख सदस्यों को सौंपी जिम्मेदारी

सबको रोशनी फाउंडेशन ने अपने संरक्षक रमेश माटा को जिम्मेवारी दी है कि वे सभी दशहरा कमेटियों के साथ तालमेल बिठाकर संयुक्त रूप से मांग रखने का कार्यक्रम बनाएं। सबको रोशनी फाउंडेशन के संरक्षक कृष्ण रेवड़ी को दायित्व दिया गया कि पानीपत के सभी मंदिरों का निवेदन पत्र सबको रोशनी फाउंडेशन के माध्यम से मुख्यमंत्री तक पहुंचाया जाए। अतुल गुप्ता को दायित्व दिया गया पानीपत के बाजार एसोसिएशन इस मांग को प्रखर करने का कार्यक्रम बनाएं। सूरज दूरेजा सामाजिक संस्थाओं को एक सूत्र में पिरो कर इस प्रकल्प को आगे बढ़ाएंगे।

संस्था के अध्यक्ष सतवीर गोयल व महिला अध्यक्ष आरती सिगला को दायित्व दिया गया कि पानीपत की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं को इस मुहिम से जोड़ कर र लिखित में आवेदन ले। अनिल गुप्ता को हनुमान सभाओं का हस्ताक्षर अभियान चलाने का जिम्मा दिया गया। मेहुल जैन एडवोकेट ने कहा कि वह इंटरनेट मीडिया के माध्यम से विश्व प्रसिद्ध पानीपत के दशहरा का प्रचार प्रसार करेंगे। कार्यक्रम में अक्षय जिदल, राजीव तुली, ईश्वर अग्रवाल व युद्धवीर रेवड़ी को भी अलग-अलग दायित्व सौंपा गया। दशहरा कमेटी के प्रधान रमेश माटा ने कहा कि पानीपत के दशहरे की लोकप्रियता किसी से छिपी नहीं है। इस बार सूक्ष्म रूप में ही सही, पर परंपरागत तरीके से दशहरा मनाया जाएगा। चार दिन निकलते हैं हनुमान स्वरूप

दुर्गा अष्टमी से लेकर दशहरा पर्व के अगले दिन तक शहर में हनुमान स्वरूप निकलते हैं। दस से बीस किलो वजनी मूर्ति को अपने सिर पर उठाते हैं। हनुमान का मुखौटा होता है। हनुमान स्वरूप बनने वाले सात से लेकर चालीस दिन का व्रत रखते हैं। घर से बाहर हनुमान सभा में ही रहते हैं। दुर्गा अष्टमी के दिन शहर में भ्रमण कर श्रीराम का जयघोष करते हैं। निमंत्रण मिलने पर घरों में जाते हैं और श्रीराम की आरती करते हैं। दशहरा पर्व पर जहां रावण दहन होता है, वहां एकत्र होते हैं। पानीपत में एक हजार से अधिक हनुमान सभाएं हैं। दो हजार से अधिक भगत हनुमान स्वरूप बनते हैं। पाकिस्तान के लैया में यह परंपरा थी। विभाजन के बाद भारत आए लोगों ने इस परंपरा को कायम रखा। पाकिस्तान में बनाई गई मूर्ति आज भी यहां संरक्षित है।

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