पानीपत पहुंचा पोता-पोती का शव, दादा बोले-छोरी तू कब जागेगी, मुझे बाय-बाय नहीं करेगी

दोनों बच्चों के शव समालखा पहुंचे तो चीख-पुकार मची।

यमुना एक्‍सप्रेस वे पर हुए हादसे में जिन सात लोगों की मौत हुई। उसे दो बच्‍चे पानीपत के भी थे। जींद के हैचरी कारोबारी मनोज के परिवार के साथ-साथ पानीपत में रहने वाले उनके साले के दो बच्‍चे एक बेटा और बेटी की भी हादसे में जान चली गई।

Anurag ShuklaThu, 25 Feb 2021 08:33 AM (IST)

पानीपत, जेएनएन। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में यमुना एक्सप्रेस-वे पर मंगलवार रात हुए भीषण सड़क हादसे में सफीदों के मिल मालिक के पूरे परिवार के साथ समालखा पड़ाव मुहल्ला के इंटरलॉक टाइल कारोबारी साले मुकेश मित्तल की बेटी हिमाद्री उर्फ कन्नू (14) और बेटे कोनार्क उर्फ कोजी (12) की भी मौत हुई है। कोजी कारोबारी का इकलौता बेटा था।

बुधवार शाम 4:40 बजे दोनों बच्चों के शव समालखा पहुंचे तो चीख-पुकार मच गई। पिता ने दोनों बच्चों की शवों को मुखाग्नि दी। एक साल दोनों की चिता जलने से हर किसी की आंखें नम हो गईं। पिता मुकेश मित्तल और दादा सत्यनाराण के मुंह से एक ही शब्द निकल रहा था कि छोरी तू कब जागेगी। मुझे बाय-बाय नहीं करेगी। अब हम किसे स्कूल छोड़ने और लाने जाएंगे।। कौन हमें साइकिल सहित अपने सामान की लिस्ट थमाएगा। अंगुली पकड़ कर बाजार ले जाएगा। लोगों ने उन्हें दिलासा दी।

हिमाद्री 10वीं की और कोनार्क 7वीं का छात्र था

हिमाद्री 10वीं और कोनार्क उर्फ चुलकाना रोड स्थित डीएवी स्कूल में एक साथ पढ़ते थे। दोनों बुआ बबीता के साथ बांके बिहारी के दर्शन करने मंगलवार दोपहर बाद 2.30 बजे वृंदावन गए थे। वापसी में आते समय हादसा हुआ।

छोटी बहन खुशी भी जाने की कर रही जिद

मुकेश की छोटी बेटी खुशी (6) भी सफीदों वासी बुआ के साथ वृंदावन जाने की जिद कर रही थी। बुआ ने छोटी होने से उसे ले जाना उचित नहीं समझा। उसके रोने के बावजूद गाड़ी से उतार दिया। आधे घंटे रोने के बाद वह चुप हुई। मुकेश के जीजा मनोज के साथ सफीदों से उसका भतीजा भी वृंदावन जाने के लिए आया था। यहां आने पर उसका मन बदल गया। उसने अचानक जाने से साफ इन्कार कर दिया। इसी वजह से गाड़ी में जगह बच गई। मुकेश और उनकी पत्नी रजनी तो जा नहीं सकी, लेकिन उनके बच्चे जाने की जिद करने लगे। देर होने के कारण हिमाद्री और कोजी घर के कपड़ों में ही गाड़ी में सवार हो गए।

टाइल का काम करते हैं मुकेश

मुकेश मित्तल का किवाना रोड पर इंटरला¨कग टाइल बनाने का व्यवसाय है। समालखा के पॉश मुहल्ले में रहते हैं। करीब चार साल पहले इन्होंने महावीर बस्ती के मकान को हटाकर यहां मकान खरीदा था। पत्नी सहित तीनों बच्चे और माता-पिता के साथ यहां रह रहे थे। बच्चे के दादा सत्यनारायण कहते हैं कि पोता मेरी बात नहीं काटता। यदि हम मना करते तो वह नहीं जाता। काश हम उसके जाते समय घर पर होते। पिता मुकेश, मां रजनी व दादी का रो-रोकर बुरा हाल था।

बांके बिहारी से जुड़ा है परिवार

मुकेश का परिवार का एकदशी और द्वादशी पर बांके बिहारी के दर्शन करने जाते है। गत शुक्रवार को भी मुकेश और उसकी पत्नी रजनी बस से भगवान का दर्शन करने गए थे।

रात 9.30 में हुई थी कन्नू से बात, बाद में मिली मौत की सूचना

पिता मुकेश की बीती रात 9.30 बजे आने से पहले कन्नू से बात हुई थी। उसने कहा कि पापा दर्शन हो गए हैं। अब यहां से चलने की तैयारी है। स्वजन रिश्तेदार और बच्चों के आने का इंतजार कर रही रहे थे की रात 11 बजे के करीब उनके पास फोन आया। हादसे की सूचना मिलते ही मुकेश स्वजन के साथ मथुरा के लिए रवाना हो गए।

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