रोगियों का सही डाटा एकत्र करने में कारगर होगा आइएचआइपी पोर्टल

रोगियों का सही डाटा एकत्र करने में कारगर होगा आइएचआइपी पोर्टल

जागरण संवाददाता पानीपत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत स्वास्थ्य विभाग इंटीग्रेटेड हेल्थ इनफॉ

Publish Date:Fri, 27 Nov 2020 05:42 AM (IST) Author: Jagran

जागरण संवाददाता, पानीपत :

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत स्वास्थ्य विभाग इंटीग्रेटेड हेल्थ इनफॉरमेशन प्लेटफार्म (आइएचआइपी) पोर्टल को पूरी तरह सक्रिय करने में प्रयासरत है। इसका उद्देश्य बीमारियों का डाटा एकत्र करना है। किस क्षेत्र में कौन सी बीमारी से ग्रस्त अधिक मरीज हैं, उन्हें सिविल अस्पताल, सीएचसी-पीएचसी और हेल्थ वेलनेस केंद्रों में इलाज मिल रहा है अथवा नहीं, इसकी जानकारी पोर्टल पर होगी।

सिविल सर्जन डा. संतलाल वर्मा ने बताया कि केंद्र और प्रदेश सरकार का चिकित्सा और स्वास्थ्य पर अधिक फोकस है। डिजीटल इंडिया के तहत बीमारियों का डाटा भी अब आनलाइन होना है। इस पोर्टल पर मुख्यत: हेपेटाइटिस, मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, डिफ्थीरिया, चिकनपाक्स, बुखार, मानसिक रोग, डॉग बाइट, स्नैक बाइट, पीलिया, कालाजार, टीबी, फाइलेरिया, टिटनस, मीजल्स, कैंसर, हृदय रोगी, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी, किडनी, बाल रोग, दंत रोग, चर्म रोग समेत 33 बीमारियां का डाटा अपलोड किया जाना है। नोडल अधिकारियों को यूजर पासवर्ड जारी किया जाएगा। संबंधित अधिकारी खुद लॉग इन पासवर्ड की मदद से मानिटरिग के साथ, कार्यक्रम की प्रत्येक दिन समीक्षा भी कर सकेंगे। इस पोर्टल पर जन्म-मृत्यु दर भी 30 दिनों के अंदर अपलोड करनी होगी। फील्ड से डाटा एएनएम और आशा वर्कर्स को एकत्र करना है। पोर्टल के पूरी तरह रनिग में आने पर जिला, ब्लाक स्तर पर एक अधिकारी, चिकित्सा अधिकारियों, प्रोग्राम मैनेजर, ब्लाक कम्युनिटी प्रोसेस मैनेजर, स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी, डाटा एंट्री ऑपरेटर आदि को प्रशिक्षण दिया जाएगा। यहां अटकी है अभी बात

सीएचसी-पीएचसी के मेडिकल आफिसर्स को यूजर पासवर्ड नहीं मिले हैं। एएनएम को टेबलेट और यूजर पासवर्ड नहीं मिले हैं। आशा वर्कर्स के पास स्मार्ट फोन नहीं है। नान क्रिटिकल डिजीज यूनिट का डाटा नहीं मिल रहा है।

आशा वर्कर्स की होगी मानीटरिग

स्वास्थ्य विभाग के अधिकांश प्रोग्राम का डाटा फील्ड से आशा वर्कर्स को एकत्र करना होता है। फिलहाल मेनूअल डाटा एकत्र किया जा रहा है। इसके बाद सीएचसी-पीएचसी या मुख्यालय स्तर पर कंप्यूटराइज किया जाता है। इससे डाटा देर से सरकार तक पहुंचता है, आशा वर्कर्स की मानिटरिग भी नहीं हो पाती। पोर्टल के रनिग में आने पर आशा वर्कर और एएनएम की लोकेशन का भी पता चल जाएगा।

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