हुआ खुलासा; हरियाणा में युवा क्‍याें हो रहे कोरोना के शिकार, जानें क्‍या है हैप्पी हाईपोक्सिया व साइटोकाइन स्टार्म

हरियाणा में कोरोना वायरस युवाओं के लिए घातक हो गया और काफी युवाओं की इससे जान गई। इसके कारण के बारे में बड़ा खुलासा हुआ है। हैप्‍पी हाईपोक्सिया और साइटोकाइन स्‍टार्म के कारण युवाओं के लिए कोरोना जानलेवा बन गया।

Sunil Kumar JhaSun, 13 Jun 2021 01:18 PM (IST)
हरियाणा में कोरोना युवाओं को हैप्‍पी हाईपोक्सिया और साइकोटाइन स्‍टार्म के कारण चपेट में ले रहा है। (सांकेतिक फोटो)

पानीपत, [राज सिंह]। Corona Virus And Youth: कोरोना महामारी की दूसरी लहर में युवा इसके काफी संख्‍या में शिकार हुए। हरियाणा में भी युवा और 45 साल से कम आयु के लोगों के लिए कोरोना घातक साबित हुआ। ऐसे मरीजों की काफी संख्‍या में मौत हुई। अब इस‍के कारणों का खुलासा हुआ है। डाक्‍टरों के अनुसार, हैप्पी हाईपोक्सिया और साइटोकाइन स्टार्म इसकी सबसे बड़ी हैं।

पानीपत में अब तक 621 मरे, इनमें 45 की आयु 45 साल से भी कम

इसके अलावा कोविड-19 की गाइडलाइन का पालन नहीं करना, वैक्सीनेशन के प्रति उदासीनता भी भारी पड़ी है। पानीपत की बात करें तो अब तक 621 कोरोना संक्रमितों की मौत हुई है। इनमें से 45 (7.24 फीसद) की आयु 35 साल या इससे भी कम रही।

पानीपत के सिविल अस्पताल स्थित आइसोलेशन के नोडल अधिकारी एवं एनेस्थेटिस्ट डा. विरेंद्र ढांडा ने बताया कि कम आयु में कोरोना संक्रमितों की किस बीमारी से अधिक मौत हुईं, यह तो सर्वे का विषय है। दूसरी लहर में एक बात विशेष रही कि वायरस की मारक क्षमता अधिक थी। मृतकों में 10 फीसद तो ऐसे शामिल हैं, जिनकी मौत संक्रमण के दौरान कार्डियक अटैक से हुई। फेफड़ों में संक्रमण तो 85 फीसद से अधिक मरीजों को हुआ। पांच फीसद ही ऐसे रहे, जिन्हें मोटापा, उच्च रकतचाप, शुगर, टीबी या दूसरी कोई बीमारी थी।

कोरेाना की तीसरी लहर की आशंका के कारण आगे रखना होगा खास ध्‍यान

युवाओं की मौत में हैप्पी हाईपोक्सिया, साइटोकाइन स्टार्म का बड़ा रोल रहा है। तीसरी लहर से इंकार नहीं कर सकते। ऐसे में हर आयु वर्ग, खासकर बच्चों को अधिक देखभाल की जरूरत होगी।

यह है हैप्पी हाईपोक्सिया :

युवाओं की मौत की सबसे बड़ी वजह हैप्पी हाईपोक्सिया रही। यानि, रक्त में आक्सीजन की अचानक से कमी होना। युवा यह सोचकर खुश रहे कि स्वस्थ हैं। मामूली लक्षण हैं, होम आइसोलेशन में रहकर, कुछ मेडिसिन खाने से ठीक हो जाएंगे। युवा मरीजों ने आक्सीजन सेचुरेशन लेवल नहीं जांचा। आक्सीजन लेवल तेजी से गिरा तो मरीज को संभालना मुश्किल हो गया।

यह है साइटोकाइन स्टार्म :

कोरोना संक्रमित को लगता है कि वह अभी स्वस्थ है। आगामी पांच-सात दिनों में इम्युन सिस्टम हाइपर एक्टिव (वायरस से लड़ने में अधिक सक्रिय) हो जाता है। इससे शरीर के दूसरे हिस्सों को नुकसान पहुंचने लगता है। इसे ही साइटोकाइन स्टार्म कहते हैं।

साइटोकाइन स्‍टार्म को यूं पहचानें

इससे ग्रस्‍त होने पर बुखार होने लगता है और काफी थकावट होती है। जैसे कुछ सीढि़यां चढ़ते ही सांस फूलने लगती है। लेकिन हमें लगता है कि ये सब सामान्‍य बात है। ऐसे लक्षण दिखने पर इसकी अनदेखी ने करें और डाक्‍टर से संपर्क करें। इसे कन्‍फर्म करने के लिए कुछ टेस्‍ट किए जाते हैं। डाक्‍टर के सुझाव पर ही इसे कराएं।

हैप्पी हाईपोक्सिया को यूं पहचानें, ये करें

आमतौर पर जो पहले से बीमार होते हैं, उन्‍हें लगता है कि सांस फूलने पर कोई परेशानी नहीं होगी। लेकिन, ऐसा होता नहीं है। कोविड के समय या इससे ठीक हो जाने के बाद थकावट होने, बुखार होने और सांस जल्‍दी चढ़ जाने पर गंभीर हो जाएं। होता ये है कि आक्‍सीजन लेवल कम होने पर जिन्‍हें तकलीफ नहीं होती, उन्‍हें लगता है कि वे ठीक हैं। इस तरह के मामलों में दिन में कम से कम चार से पांच बार आक्‍सीजन लेवल जरूर चेक करें। एकदम से आक्‍सीजन लेवल कम होने पर स्थिति बिगड़ जाती है। इससे पहले ही संभल जाएं। डाक्‍टर से तुरंत करवाएं और उनकी सलाह के अनुरूप दवा लें या टेस्‍ट लें।

आगामी दिनों में रखें ध्यान :

- कोरोना वैक्सीन की डोज जरूर लगवाएं। - मुंह पर मास्क पहनकर घर से बाहर निकलें। - सार्वजनिक स्थान पर शारीरिक दूरी बनाए रखें। - हाथों को सैनिटाइज करते रहें। -कोरोना लक्षण दिखें तो डाक्‍टर की सलाह लें और उनकी सलाह पर ही चेस्ट की सीटी स्कैन कराएं। - आक्सीजन सेचुरेशल लेवल की जांच करते रहें। - चिकित्सक के परामर्श पर ठीक से अमल करें।

 

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