पानीपत के नशा मुक्ति केंद्र में सीएम फ्लाइंग का छापा, हालात देख दंग रह गए अधिकारी

पानीपत के गांव उग्राखेड़ी में अवैध रूप से नशा मुक्ति केंद्र चल रहा था। छह से 10 हजार रुपये मासिक वसूली की जा रही थी। एक हॉल में 51 मरीज ठूंस रखे थे। इसी हॉल में रसोई और शौचालय भी है। सरकारी अमला भयावह हालत देख दंग रह गया।

Umesh KdhyaniSun, 25 Jul 2021 09:18 AM (IST)
नशा मुक्ति केंद्र में रखे गए नशे के आदी युवक।

 जागरण संवाददाता, पानीपत। सीएम फ्लाइंग दस्ता ने गांव उग्राखेड़ी में संचालित नशा मुक्ति केंद्र में छापा मारा। एक बड़े कमरे (हाल) में 51 नशे के शिकार मरीजों को पशुओं की तरह ठूंस रखा था। कमरे का बाहर से ताला लगा था, उसी में रसोई-शौचालय बना था, बदबू से बुरा हाल था। टीम ने चांदनीबाग थाना में शिकायत देकर संचालक के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने को कहा है।

जीवन सुरक्षा समिति की ओर से गांव उग्राखेड़ी में नशा मुक्ति केंद्र संचालित है। संचालक बिजेंद्र मलिक है। सीएम प्लाइंग दस्ता को शिकायत मिली थी कि केंद्र अवैध रूप से संचालित है। नशा छुड़वाने के नाम पर यातनाएं दी जाती हैं। उडनदस्ता का नेतृत्व कर रहे सुकमपाल ने डीसी सुशील सारवान को जानकारी दी। डीसी ने टीम गठित की, इसमें एडीसी का अतिरिक्त कार्यभार संभाले एसडीएम धीरज चहल, तहसीलदार डा. कुलदीप सिंह मलिक, मनोरोग विशेषज्ञ डा. मोना नागपाल, डा. ललित वर्मा, समाज कल्याण विभाग की इनवेस्टीगेटर अनिता और सिविल अस्पताल के साइकोलाजिस्ट रवि को शामिल किया गया। सरकारी अमला केंद्र में पहुंचा तो भयावह हालत देख दंग रह गया।

पानीपत के जिस नशा मुक्ति केंद्र में छापा पड़ा, वहां हॉल में एक साथ बना टॉयलेट और रसोई। 

लाइसेंस नहीं दिखा पाया कर्मचारी 

मौके पर मौजूद कर्मचारी परवेश वासी गांव खखाना बादरी सोनीपत लाइसेंस की असल कॉपी नहीं दिखा सका। प्रोविजनल सर्टिफिकेट दिखाया, इसकी जांच होनी है। जिस बड़े कमरे में इलाज के लिए नशेड़ियों को बंद रखा हुआ था, उसमें बहुत ज्यादा उमस थी। वहां बंद 51 लोगों की सांसें एक-दूसरे से टकरा रही थीं। हवा आने-जाने (वेंटिलेशन) के लिए पर्याप्त खिड़की नहीं थी।

इन धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की मांग 

टीम ने चांदनी बाग थाना पुलिस को शिकायत दी है। संचालक बिजेंद्र के खिलाफ एनडीपीएस (नारकोटिक्स ड्रग्स साइकोट्रोपिक सब्सटेंस) एक्ट की धारा-32, मेंटल हेल्थ एक्ट की धारा 100, 101, 107 और आइपीसी की धारा 420 के तहत मुकदमा दर्ज करने को कहा है।

यह होगा इन मरीजों का

मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. मोना नागपाल ने बताया कि जिन मरीजों का इलाज उनके घर पर संभव है, उन्हें दवा देकर पुलिस के माध्यम से स्वजनों को साैंपेंगे। जिन मरीजों की शारीरिक-मानसिक स्थिति खराब होगी, उन्हें कोर्ट के आदेश के बाद सिविल अस्पताल स्थित नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती किया जाएगा।

मेडिसिन के दो डिब्बे मिले

नशा मुक्ति केंद्र से दर्द निवारक और एंटीबायोटिक मेडिसिन के दो बड़े बाक्स भरे मिले हैं। जिला औषधि नियंत्रक विजया राजे इन मेडिसिन की जांच कर, रिपोर्ट देंगी। हालांकि टीम ने नशा करने में इस्तेमाल होने वाली मेडिसिन के मिलने से फिलहाल इन्कार किया है।

वसूले जाते थे छह से दस हजार मासिक

डा. मोना ने बताया कि नशा छुड़वाने के नाम पर मरीजों के स्वजनों से छह से दस हजार रुपये मासिक वसूले जाते थे। बातचीत में तीन मरीजों ने बताया कि केंद्र के स्टाफ द्वारा मारपीट की जाती थी। स्वजनों को मिलने नहीं दिया जाता था।

कोरोना को न्योता

नशा मुक्ति केंद्र में कोविड-19 गाइडलाइन का भी उल्लंघन हो रहा था। कमरे में 51 लोग बंद थे, अधिकांश ने मास्क नहीं पहना था। सोना-बैठना-रहना-खाना सब एक साथ था। डा. ललित वर्मा के मुताबिक सभी की कोरोना जांच भी कराई जाएगी।

 

पानीपत के जिस नशा मुक्ति केंद्र में छापा पड़ा, वहां मीटर बाईपास कर बिजली चोरी की जा रही थी।

केंद्र में हो रही थी बिजली चोरी

नशा मुक्ति केंद्र में सभी उपकरण चोरी की बिजली से चलते दिखे। संचालक ने बिजली मीटर से तार हटाई हुई थी। खंबे से आ रही लाइन को सीधे कनेक्ट किया हुआ था। बिजली निगम भी इस मामले में संचालक के विरुद्ध कार्यवाही कर सकता है।

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