हरियाणा के इस गांव की नस-नस में दौड़ती कबड्डी, घर-घर देता दूध-घी की खुराक

हरियाणा के कैथल का बलबेहड़ा गांव। यहां के कबड्डी खिलाड़ियों की धाक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर है। गांव के खिलाड़ी तीन साल में 100 से भी ज्यादा कबड्डी टूर्नामेंट जीत चुके हैं। गुरमेल सिंह मैहला व संदीप कौशिक पाकिस्तान के खिलाफ भी खेल चुके हैं।

Umesh KdhyaniMon, 02 Aug 2021 04:05 PM (IST)
बलबेहड़ा गांव के युवा सर्कल कबड्डी में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कर रहे हैं।

सोनू थुआ, कैथल। हरियाणा के कैथल जिले के गांव बलबेहड़ा की पहचान यहां के युवाओं से होती है। गांव का युवा नशे से दूर रहकर सर्कल कबड्डी के खेल में न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ख्याति प्राप्त कर रहा है। पिछले तीन सालों में गांव के युवाओं ने 100 से ज्यादा कबड्डी टूर्नामेंट जीत कर लाखों की नकद राशि व मोटरसाइकिल जीती हैं। टीम में खिलाड़ी गुरमेल सिंह मैहला व संदीप कौशिक उर्फ बिल्ला बलबेहड़ा जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हैं। पिछले दिनों पाकिस्तान में हुई सर्कल कबड्डी में बिल्ला व मैहला भारतीय टीम का हिस्सा रह चुके हैं। दोनों खिलाड़ियों की पकड़ में एक बार भी प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ी आ गया तो फिर छूटना मुश्किल है। अपने खेल कौशल के दम बहुत कम समय में इस टीम ने बादशाहत कायम कर ली।

अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी संदीप कौशिक उर्फ बिल्ला बलबेहड़ा और गुरमेल सिंह मैहला

गांव के हर घर से मिलता है घी, दूध और दूसरी खुराक

बलबेहड़ा टीम के कबड्डी खिलाड़ियों को घी, दूध और दूसरी खुराक गांव के लगभग हर घर से मिलती है। ग्राम पंचायत द्वारा भी समय- समय पर खिलाड़ियों का सहयोग किया जाता है। टीम विजय होकर जब गांव पहुंचती है, उसके खिलाड़ियों को सम्मानित किया जाता है।

कैथल के बलबेहड़ा के वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में कबड्डी खिलाड़ी रोजाना प्रैक्टिस करते हैं।

 

ये हैं टीम के खिलाड़ी

टीम में गुरमेल सिंह मैहला, संदीप कौशिक उर्फ बिल्ला बलबेहड़ा, राजा, गोली, बिंद्र, गंगा, दीपक व विक्की खेलते है। मात्र तीन सालों में इन खिलाड़ियों ने खेलकर इनामों की झड़ी लगा दी।

20 बाइक जीती: बिल्ला

संदीप कौशिक उर्फ बिल्ला बलबेहड़ा ने बताया कि बचपन से ही कबड्डी के खेल में रुचि थी। दस साल की आयु में पहली बार स्कूली नेशनल गेम्स में गोल्ड मेडल जीता था। 2017 में आयोजित प्रतियोगिता में बेस्ट कैचर रहकर बाइक जीती। 2019 में पहली बार मलेशिया खेलने के लिए गया। यहां बेस्ट कैचर का खिताब जीता। अब वह दो सालों से लगातार बाइक जीत रहे हैं। अब तक 20 बाइक जीत चुके हैं। इसके अलावा छह गोल्ड मेडल, हरियाणा और पंजाब में हुई प्रतियोगिता में एक बुलेट, वाशिंग मशीन भी जीती। उनके चाचा मुकेश कुमार ने भी उन्हें स्विफ्ट कार देकर सम्मानित किया।

अंतरराष्ट्रीय सर्कल कबड्डी खिलाड़ी संदीप कौशिक उर्फ बिल्ला बलबेहड़ा।

सात के करीब बाइक जीती: मैहला

गुरमेल सिंह मैहला ने बताया कि वह अब तक सात मोटरसाइकिल इनाम में जीत चुके हैं। 12 के करीब एलईडी जीती हैं। मलेशिया की धरती पर खेलने के लिए गए थे। अच्छा प्रदर्शन रहा था। हरियाणा, पंजाब सहित विभिन्न जगहों पर खेलकर बेस्ट कैचर का इनाम जीता है। फरल गांव में आयोजित प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने पर सम्मानित किया गया। इसमें बुलेट मोटरसाइकिल आयोजकों ने इनाम के रूप में दी। सुरेश कोच की तैयारी करवाने में अहम भूमिका रही है।

अंतरराष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ी गुरमेल सिंह मैहला।

गांव का इतिहास

गांव के लोगों ने बताया कि पुराने जमाने में गांव में काठ की जेल होती थी। इसके करण गांव का नाम काठ का बलबेहड़ा पड़ा। सात हजार की आबादी वाले गांव में 4 हजार वोट हैं। गांव में 36 बिरादरी के लोग रहते हैं। गांव में जहां खेलों के प्रति रुचि है, वहीं धर्म के प्रति भी पूरी आस्था है। गांव में बाबा दुर्गानाथ का सिद्ध मंदिर, बाबा गोरख नाथ के मंदिर सहित कई मंदिर हैं। गांव के लोग अपनी हरियाणवी संस्कृति को जिंदा रखे हुए हैं। गांव में हर साल सांग करवाया जाता है। यह गांव के सभी लोगों की पहली पसंद है। गांव खुले में शौच से मुक्त है। वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में सुंदरीकरण करवाया गया। यह विद्यालय ब्लॉक स्तर पर गुहला में प्रथम स्थान पर आया था।

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