Parali: बढ़ने लगे पराली जलाने के मामले, जींद में 10 मामले आए सामने, किसानों को नोटिस

हरियाणा में पराली जलाने के मामले सामाने आने लगे हैं। जींद में पराली जलाने के दस मामले पकड़े गए हैं। किसानों को कृषि विभाग की ओर से नोटिस दिया गया है। सफीदों में सबसे ज्यादा पांच मामले पांच गांवों में एक-एक मामला।

Anurag ShuklaThu, 14 Oct 2021 05:22 PM (IST)
जींद में पराली जलाने के मामले सामने आए।

जींद, जागरण संवाददाता। जींद में पराली जलाने के मामले बढ़ने लगे हैं। वीरवार दोपहर तक जिले में 10 जगह पराली जलने के मामले आ चुके हैं। मखंड, छातर, अलेवा, पिल्लूखेड़ा आैर बडनपुर गांव में एक-एक पराली जलने का मामला मिला है। वहीं सफीदों क्षेत्र से पांच जगह पराली जलने के मामले आए हैं। कृषि विभाग की तरफ से संबंधित किसानों को नोटिस भेज कर जवाब मांगा गया है। हालांकि पिछले साल की तुलना में पराली जलाने के मामले कम हैं। पिछले साल इस समय तक 90 जगह पराली जलाने के मामले आ चुके थे।

प्रशासन द्वारा पराली जलाने पर रोक लगाने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। पिछले साल जिन गांवों में पराली जलाने के पांच से ज्यादा मामले आए थे, उन गांवों को रोड जोन में और जहां पराली जलाने के पांच से कम मामले थे, उन गांवों को येलो जोन में रखकर वहां इस बार कार्यक्रम कराए गए। इन गांवों में विशेष तौर पर निगरानी भी रखी जा रही है। वहीं हरियाणा अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (हरसैक) द्वारा सैटेलाइट से आगजनी की लोकेशन भेजी जा रही हैं।

कूड़े में आग लगा रहे लोग

फसल अवशेष के साथ-साथ लोग कूड़े में भी आग लगा रहे हैं। हरसैक द्वारा जो सैटेलाइट से लोकेशन ली जाती है, उसमें संबंधित एरिया में लगी आग लोकेशन में आ जाती है, जिसे जिला प्रशासन को भेजा जाता है। प्रशासन की तरफ से लोकेशन चेक की जाती है। कई बार बताई गई लोकेशन पर कूड़ा जला हुआ मिलता है। कूड़े में पाेलीथिन भी होती है, जिसके जलने से पराली की तुलना में ज्यादा प्रदूषण फैलता है।

 हवा चलने से मिली कुछ राहत

वीरवार को पीएम 2.5 का अधिकतम स्तर 244 और औसतन 177 रहा। करीब 16 किलोमीटर की गति से चली तेज होने से प्रदूषण से कुछ राहत मिली। मंगलवार को पीएम 2.5 का स्तर 300 के पार पहुंच गया था। न्यूनतम और अधिकतम तापमान में गिरावट आने तथा हवा की गति धीमी हो गई थी। जिससे वायुमंडल में प्रदूषण के कण छंट नहीं पाते हैं।

फसल अवशेष जलाने वालों पर होगी कार्रवाई

जिला कृषि उप निदेशक डा. सुरेंद्र मलिक ने बताया कि अब तक 10 पराली जलने के मामले आए हैं। संबंधित किसानों को नोटिस दिया गया है। बढ़ते प्रदूषण के कारण सरकार ने फसल अवशेष जलाने पर रोक लगाई हुई है। इसलिए किसान फसल अवशेष जलाने की बजाय हरे चारे के रूप में प्रयोग करें। जो फसल अवशेष जलाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

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