करनाल में जिंदगियां निगल रहीं नहरें, कहीं आत्महत्या का जरिया बनीं तो कहीं अपराध छिपाने का ठिकाना

करनाल में नहरों में लगातार शव मिल रहे हैं। अंबाला से सोनीपत के बीच नहरों से 52 दिन में 28 लोगों के शव निकाले जा चुके हैं। इनमें मासूम बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक के शव शामिल हैं। इससे पुलिस प्रशासन की चिंता बढ़ रही है।

Umesh KdhyaniTue, 15 Jun 2021 04:58 PM (IST)
एक हादसे के बाद नहर में सर्च अभियान के लिए उतरे गोताखोर प्रगट सिंह।

करनाल [सेवा सिंह]। नहरों को समृद्धि का प्रतीक माना जाता है और लेकिन ये जिंदगियां भी निगल रही हैं। कहीं आत्महत्या का आसान जरिया बन रही हैं तो कहीं इन्हें संगीन अपराध छिपाने का सबसे सुरक्षित ठिकाना माना जा रहा है। नहरों से लगातार शव निकल रहे हैं। इनमें मासूम बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक के शव शामिल हैं। कई शव की पहचान तक नहीं हो पाती तो कई शव वारदात के कई दिनों बाद तक भी बरामद होते हैं। नहरों पर प्रशासनिक लापरवाही से भी लोगों की जान जा रही है तो कई बार नहरों के आसपास मस्ती भारी पड़ रही है।

अंबाला से सोनीपत तक 52 दिन में मिले 28 शव

अंबाला से सोनीपत तक पिछले 52 दिन में 28 शव बरामद किए जा चुके हैं। इनमें पांच शव चार से 10 साल तक के मासूमों के मिले हैं तो 72 वर्षीय बुजुर्ग का शव भी मिला है। लावारिस शव की पहचान बाद में ज्योतिसर कुरुक्षेत्र वासी गुरचरण के तौर पर हुई, जिसे मानसिक तौर पर परेशान बताया गया। 19 शव आत्महत्या के मामलों से जुड़े थे।

नहरों से घिरा है करनाल सहित उत्तरी हरियाणा

उत्तरी हरियाणा नहरों से घिरा है। यहां से यमुना नदी भी गुजर रही है। पश्चिमी यमुना नहर, भाखड़ा नहर, आर्वधन नहर, सतलुज यमुना लिंक नहर, हांसी ब्रांच, गोहाना डिस्ट्रीब्यूटरी, नरवाना ब्रांच व पैरलल दिल्ली ब्रांच आदि मुख्य नहरें हैं। सब नहरें भी बहती हैं। अनेक शव मुख्य नहरों में पंजाब व हिमाचल प्रदेश की ओर से आते रहे हैं, जिनकी पहचान तक नहीं हो पाती। संबंधित पुलिस सामाजिक संस्थाओं के जरिए इनका अंतिम संस्कार करवा देती है तो वहीं कई शव से जुड़े अपराध के मामले दबे रह जाते हैं।

कभी सोचा न था, इतने शव निकालने पड़ेंगे : प्रगट

गाेताखोर प्रगट सिंह का कहना है कि टीम के साथ करीब 20 साल से नहरों से शव निकालने की फ्री सेवा कर रहे हैं। नहर व तालाबों आदि पर हादसों में लोगों को बचाया जा सके, इसके लिए सेवा शुरू की लेकिन यह नहीं सोचा था कि नहरों में शवों की बाढ़ आएगी। इतने शव नहरों से निकालने पड़ेंगे। आत्महत्या के चलते नहर में शव मिलने के मामले बढ़े हैं तो हत्या कर शव नहरों में फेंककर छिपाने का प्रयास किया जाता है। इससे मन दुखी हो उठता है। समाज किस ओर जा रहा है, यह इसका स्पष्ट संकेत है। जान देना और लेना सामान्य बात हो गई है।

सहनशीलता हो रही खत्म, काउंसिलिंग की जरूरत : अग्रवाल

मनोचिकित्सक डॉ. आशीष अग्रवाल का कहना है कि भागदौड़ भरी जिंदगी में सहनशीलता खत्म हो रही है। अवसाद बढ़ रहा है। मामूली विवाद में भी इंसान जान देने व लेने को तैयार हो जाता है। कांउसलिंग व संयुक्त परिवार की जरूरत है। अवसाद में आए व्यक्ति का परिवार विशेष ख्याल रखे। जरूरत पड़े तो मनोचिकित्सक का सहारा लें।

हाल ही में करनाल में हुईं बड़ी घटनाएं

करनाल के निजी अस्पताल के चिकित्सक एवं मूल रूप से उत्तरप्रदेश के डा. अभिषेक का शव आर्वधन नहर से गांव बीजना के समीप बरामद हुआ था। साथी चिकित्सकों पर हत्या कर शव नहर में फेंकने के आरोप लगे थे। एक जून को कुरुक्षेत्र के गांव बोडी वासी महिला ने चार साल के मासूम बेटे के साथ कर्ण लेक के समीप पुल से पश्चिमी यमुना नहर में छलांग लगा दी थी। महिला को वहां मौजूद एक व्यक्ति ने बचा लिया था। तीन दिन बाद मासूम का शव बरामद हुआ था। आठ जून को गांव पनौड़ी की महिला ने आर्वधन नहर में दो बच्चों के साथ नहर में छलांग लगा दी थी। महिला को बचा लिया गया। बच्चों के शव मिले थे। 20 मई को आर्वधन नहर से 315 बोर तमंचा, देशी पिस्तौल, बाइक व एक स्कूटी गांव नेवल के समीप बरामद हुई थी। आशंका है कि वारदात छिपाने के लिए इन्हें नहर में फेंका गया।

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