करनाल में कोरोना पीक के बाद पहली बार महज 18 केस, इधर, ब्लैक फंगस के 5 और नए मामले

कोरोना महामारी की दूसरी लहर का पीक निकल जाने के बाद अब ब्‍लैक फंगस का कहर देखने को मिल रहा है। मौत और केस मिलने का सिलसिला नहीं थम रहा है। करनाल में वीरवार को पांच नए मामले सामने आए हैं। वहीं अब तक 38 लोगों की जान गई।

Anurag ShuklaFri, 11 Jun 2021 09:30 AM (IST)
करनाल में ब्‍लैक फंगस के पांच और नए मामले मिले।

करनाल, जेएनएन। कोरोना की दूसरी लहर के पीक के बाद जिले में पहली बार कोरोना के महज 18 केस मिले हैं, जबकि दो मरीजों की मौत हुई। वीरवार को कोरोना से संक्रमित जिले में 96 मरीज हुए ठीक भी हुए। रिकवरी रेट बढ़कर करीब 98 प्रतिशत तक पहुंच गया है। धीरे-धीरे जिला कोरोना संक्रमण से मुक्त हो रहा है, जो सुखद संकेत है। लेकिन दुखद पहलू यह है कि ब्लैक फंगस धीरे-धीरे विकराल रूप लेता जा रहा है।

बीते बुधवार को 12 ब्लैक फंगस केसों की मौत ने लोगों को डरा दिया है। हालांकि कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कालेज प्रबंधन ब्लैक फंगस से पार पाने के लिए दिन-रात जुटा है, लेकिन स्थिति धीरे-धीरे चिंताजनक होती जा रही है। जिले में अब तक ब्लैक फंगस से 38 मरीजों की मौत हो चुकी है। कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कालेज एवं अस्पताल में अब तक 138 मरीज दाखिल हो चुके हैं, जिसमें 18 डिस्चार्ज होकर घर जा चुके हैं। इस समय 40 मरीज दाखिल हैं। 36 मरीजों को रेफर किया जा चुका है। छह मरीज अपनी मर्जी से चले गए हैं। वीरवार को ब्लैक फंगस के पांच केस सामने आए।

इन मरीजों को सर्वाधिक खतरा

- डायबिटिज के मरीज, जिन्हें स्टेरायड दिया जा रहा है।

- कैंसर का इलाज करा रहे मरीज को

- अधिक मात्रा में स्टेरायड लेने वाले मरीज

- ऐसे कोरोना संक्रमित, जो आक्सीजन मास्क या वेंटिलेटर के जरिए आक्सीजन सपोर्ट पर हैं।

- ऐसे मरीज, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहद कम है।

- जिनके किसी ऑर्गन का ट्रांसप्लांट हुआ हो।

ये हो सकते हैं लक्षण

- नाक बंद होना या नाक से खून या काली पपड़ी जम जाना।

- गाल की हड्डियों में दर्द, एक तरफ चेहरे में दर्द, सुन्न या सूजन होना।

- नाक की ऊपरी सतह काली होना।

- दांत ढीले पड़ जाना।

- आंखों में दर्द, धुंधला या दोहरा दिखना, आंखों के आस-पास सूजन।

साइनस, मस्तिष्क और फेफड़ों को करता है प्रभावित

विशेषज्ञों के मुताबिक ब्लैक फंगस आमतौर पर साइनस, मस्तिष्क और फेफड़ों को प्रभावित करता है। ओरल केविटी या मस्तिष्क के ब्लैक फंगस से सबसे अधिक प्रभावित होने की आशंका रहती है, लेकिन कई मामलों में यह शरीर के अन्य हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है। जैसे गैस्ट्रोइंटेस्टिनल ट्रैक्ट, स्किन और शरीर के अन्य आर्गन सिस्टम्स। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर इनमें से कुछ भी लक्षण है तो ब्लैक फंगस को लेकर जांच करानी चाहिए।

शुरूआती दौर में पता लगना बहुत जरूरी

केसीजीएमसी के ईएनटी एक्सपर्ट डा. अशोक जागलान के मुताबिक शुगर के मरीजों में ब्लैक फंगस का शुरुआती दौर में ही पता लगना बहुत जरूरी है। उनका कहना है कि शुगर के मरीजों को ज्यादा स्ट्रांग दवाएं देने से किडनी या अन्य अंगों पर बुरा असर पड़ने का भी खतरा रहता है। जिन कोरोना संक्रमितों को ब्लैक फंगस हो रहा है, उन्हें ट्रीटमेंट के समय और रिकवरी के बाद स्टेरायड की डोज बेहद सावधानी से दी जानी चाहिए।

घटकर 500 से नीचे आई सक्रिय मामलों की संख्या

सिविल सर्जन डा. योगेश शर्मा ने बताया कि वीरवार को कोरोना पीड़ित 96 मरीज ठीक होकर घर गए। 18 लोग संक्रमित हुए। जिला में कोरोना वायरस से संक्रमित अब तक लिए गए 378161 में से 338140 सैंपल की रिपोर्ट नेगटिव आ चुकी है। जिले में अब तक 39671 लोग संक्रमित मिल चुके हैं, जिसमें 38694 मरीज ठीक होकर घर चले गए। इस समय संक्रमण दर 8.24 प्रतिशत और रिकवरी रेट करीब 98 प्रतिशत तथा मृत्यु दर 1.34 प्रतिशत है। अब तक 530 कोरोना संक्रमितों की मौत हो चुकी है। सक्रिय केस घटकर 447 रह गए हैं।

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