आयुष्मान का मिला साथ, 547 कोरोना संक्रमितों ने लिया 25 लाख का फ्री इलाज

प्रधानमंत्री जन आरोग्य (आयुष्मान भारत) स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार की अब तक की सबसे अच्छी योजना मानी गई है। कोरोना महामारी में भी योजना ने कोविड-19 पाजिटिव मरीजों का खूब साथ दिया है। अब तक जिला के 547 पात्र निजी व सरकारी अस्पताल में 25 लाख 14 हजार 590 रुपये का निश्शुल्क इलाज करा चुके हैं।

JagranThu, 15 Jul 2021 08:31 AM (IST)
आयुष्मान का मिला साथ, 547 कोरोना संक्रमितों ने लिया 25 लाख का फ्री इलाज

राज सिंह, पानीपत

प्रधानमंत्री जन आरोग्य (आयुष्मान भारत) स्वास्थ्य क्षेत्र में सरकार की अब तक की सबसे अच्छी योजना मानी गई है। कोरोना महामारी में भी योजना ने कोविड-19 पाजिटिव मरीजों का खूब साथ दिया है। अब तक जिला के 547 पात्र निजी व सरकारी अस्पताल में 25 लाख 14 हजार 590 रुपये का निश्शुल्क इलाज करा चुके हैं।

नोडल अधिकारी डा. मनीष पासी ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत सिविल अस्पताल में 336 कोरोना संक्रमित भर्ती हुए। इन्होंने 10 लाख 14 हजार 340 रुपये का निश्शुल्क इलाज कराया। समालखा सीएचसी में 46 मरीज भर्ती हुए, इनके इलाज का क्लेम 99 हजार रुपये है। जिला के 11 निजी अस्पतालों में 165 कोरोना संक्रमितों ने योजना का लाभ उठाते हुए 14 लाख 1250 रुपये का निश्शुल्क इलाज लिया।

डा. पासी के मुताबिक इस रकम में कोरोना जांच, इलाज, अस्पताल में बेड और दवा आदि का खर्च शामिल है। निश्शुल्क इलाज प्राप्त करने वालों में बच्चे से लेकर बुजुर्ग शामिल रहे। बता दें कि जिला में 75,392 परिवारों के 3,71,879 सदस्य योजना के पात्र हैं। कोरोना संक्रमितों को भी यह भी दिक्कत

आयुष्मान भारत योजना के तहत फ्री इलाज प्राप्त करने वाले मरीज साथ में दूसरी बीमारियों से भी ग्रस्त रहे। अधिकांश मरीज श्वास लेने में दिक्कत, निमोनिया, अस्थमा, फेफड़ों का रोग क्रानिक आब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), तीव्र श्वसन संकट सिड्रोम रोगों से ग्रस्त रहे। नई कैटेगरी जुड़ने की उम्मीद

योजना का फेज टू में नई कैटेगरी जुड़ने की उम्मीद है। इसमें केंद्र-राज्य के बीपीएल परिवार, गरीबी रेखा से नीचे के परिवार आशा-आंगनबाड़ी वर्कर्स, मान्यता प्राप्त पत्रकार, लघु किसान, नंबरदार को सरकार जोड़ सकती है। फर्जी कार्ड मिलने का सिलसिला जारी

आयुष्मान भारत योजना के फर्जी कार्ड (पात्र परिवार कोई, कार्ड दूसरे के पास) मिलने का सिलसिला भी जारी है। अब तक 20 से अधिक कार्ड रिजेक्ट हो चुके हैं। चार कार्डों पर फ्री इलाज लिया जा चुका था, विभाग ने उनसे रिकवरी भी की है। यूं हुई चूक

योजना के शुरुआती काल में कोई व्यक्ति आयुष्मान विडो पर पहुंचता है। अपना नाम व पिता का नाम या फिर महिला अपना व पति का नाम बताती है। आयुष्मान की सूची से नाम मिलान होने पर आयुष्मान मित्र कार्ड बनाते रहे। नतीजा, मिलते-जुलते नाम वालों को कार्ड जारी हो गए। जरूरी था कि परिवार के सभी सदस्यों के नामों का मिलान कर कार्ड जारी किए जाते।

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