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आयुष्‍मान कार्ड से करवा सकते हैं कोरोना संक्रमण का इलाज, मरीज बता ही नहीं रहे

आयुष्मान पात्र कोरोना पाजिटिव होने की बात को छिपा रहे।

आयुष्‍मान पत्र कोरोना संक्रमित होने पर अपनी पहचान के छिपाते हुए सिविल में इलाज करवा रहे हैं। स्‍वास्‍थ्‍य विभाग को संदेह है। वार्षिक पांच लाख के मुफ्त इलाज में कटौती की चिंता। अभी तक मात्र दो लोगों ने कराना इलाज।

Anurag ShuklaSat, 15 May 2021 01:37 PM (IST)

पानीपत [राज सिंह]। पांच लाख रुपये वार्षिक का मुफ्त इलाज प्रदान करने वाली प्रधानमंत्री जन आरोग्य (आयुष्मान भारत) योजना पात्रों के लिए कल्याणकारी साबित हुई है। अब तक जिला के लगभग 10 हजार पात्र 12 करोड़ रुपये से अधिक का इलाज ले चुके हैं। हैरत है कि कोरोना का फ्री इलाज कराने वाले इनमें मात्र दो लोग शामिल हैं।

स्वास्थ्य विभाग को संदेह है कि आयुष्मान पात्र कोरोना पाजिटिव होने की बात को छिपा रहे हैं। योजना के जिला सूचना प्रबंधक सोहन सिंह ग्रोवर ने बताया कि जिला की आबादी लगभग 14 लाख है। 15 मई तक 2.72 लाख 896 (19.49 फीसद) लोग जांच करा चुके हैं। कुल जनसंख्या में से 28285 (1.95 फीसद) लोग संक्रमित भी मिल चुके हैं। अब आयुष्मान योजना पात्रों के आंकड़े देखें। अभी तक मात्र 270 पात्रों ने कोरोना जांच कराने की हामी भरी। इनमें से 193 की रिपोर्ट नेगेटिव, 77 (28.51 फीसद) संक्रमित मिले हैं। यानि, सामान्य श्रेणी की तुलना में आयुष्मान योजना के पात्र 14 गुना अधिक संक्रमित मिल रहे हैं। ऐसे में मात्र दो पात्रों ने (6 लाख 29 हजार 400 रुपये का)मुफ्त इलाज सिविल अस्पताल में कराया है।

डाटा खंगाल रहे

सूचना प्रबंधक ने कहा कि ये आंकड़े संदेह पैदा करता हैं कि कहीं कोरोना पाजिटिव होने पर आयुष्मान योजना के पात्र अपनी पहचान तो नहीं छिपा रहे हैं। अब विभाग हर कोरोना संक्रमित का डाटा खंगाल रहा है।

स्वास्थ्य विभाग को इसलिए संदेह

आयुष्मान योजना के 270 पात्रों ने जांच और दो ने इलाज की बात कुबूली है। आयुष्मान मित्रों ने इन्हें कॉल की तब इन्होंने ये जानकारी दी। इसी आधार पर इनका क्लेम भी भेजा गया है। कॉल नहीं करते तो सम्भवतया इन केसों की जानकारी भी नहीं मिलती ।

कहीं ऐसा मामला तो नहीं

ग्रोवर ने बताया कि सिविल अस्पताल में कोरोना संक्रमित हर वर्ग के मरीज का इलाज मुफ्त है। संदेह है कि आयुष्मान योजना के पात्र बड़ी संख्या में संक्रमित तो हुए, परंतु उन्होंने पात्र होने की बात को छिपाते हुए सिविल अस्पताल में निशुल्क इलाज कराया है। ताकि उन्हें जो पांच लाख का वार्षिक लाभ मिलता है, उस राशि में कटाैती न हो जाए।

एक नजर इस पर भी

योजना का पात्र कोरोना पाजिटिव निकले तो टेस्टिंग के 4500 रुपये का भुगतान लैब को सरकार करती थी। नेगेटिव निकलने पर 1500 रुपये का भुगतान किया जाता था। वर्ष 2021 से सरकार ने जांच के रेट सरकारी और निजी लैब में 1200 रुपये कर दिए हैं।

प्रतिदिन इतनी राशि का मुफ्त इलाज

2160 रुपये सामान्य वार्ड

3240 रुपये हाई डिपेंडेंसी यूनिट में इलाज

4330 रुपये आइसीयू बिना वेंटिलेटर

5400 रुपये आइसीयू वेंटिलेटर सहित

 

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