मेयर बेटी ने बुलाई बैठक, पहुंचे पिता सरदार, फ‍िर लिया ये एक्शन

पानीपत, जेएनएन। शहर की सरकार की बैठक में ये सरदार एक्शन मोड में नजर आए। बैठक मेयर ले रहीं थीं और समस्याओं पर मंथन सरदार भूपेंद्र सिंह कर रहे थे। फिर क्या इससे विरोधियों को भी मौका मिल गया। इसके बाद कुछ ऐसा हुआ जिसकी किसी ने उम्मीद भी नहीं की थी। विस्तृत खबर के लिए पढ़ें दैनिक जागरण की ये खबर।

मेयर अवनीत कौर ने मंगलवार को पालिका बाजार स्थित अपने कार्यालय में तीन अलग-अलग बैठक ली। इसमें नगर निगम, जन स्वास्थ्य और जेबीएम कंपनी के अधिकारी बारी-बारी से पहुंचे। मेयर ने चार घंटे तक चली मैराथन मीटिंग में सफाई, सीवर और विकास कार्यों पर अधिकारियों की रिपोर्ट ली और अपने सुझाव रखे। तीनों अधिकारी इस प्लान पर काम करते हैं तो पहले चरण में ही शहर की तस्वीर देश के प्रमुख शहरों की तरह दिखाई देने लग जाएगी। शहर में समस्याओं की जड़ कूड़ा, जाम सीवर और विकास कार्यों की ठीक से प्लानिंग नहीं हैं। नगर निगम के पहले हाउस की मीटिंग में 11 जनवरी को इन पर खुलकर चर्चा हुई थी। पक्ष और विपक्ष के पार्षद इन मुद्दों के समाधान पर एकमत थे। मेयर अवनीत कौर ने इनके लिए चार दिन बाद ही अधिकारियों के साथ बैठक की। 

निगम अधिकारियों ने शहर के विकास का नक्शा दिखाया 
नगर निगम की टैक्नीकल ब्रांच ने मेयर अवनीत कौर के सामने शहर के विकास का नक्शा रखा। एसई रमेश कुमार ने बताया कि वैध 78 कॉलोनियों में सीवर व पेयजल लाइन का प्रस्ताव फाइनल कर लिया है। प्रथम चरण में वैध 29 कॉलोनियों के लिए 31.50 और बाद में वैध 48 कॉलोनियों के लिए करीब 49 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का प्रस्ताव बनाया है। इन पर जल्द ही काम शुरू करा दिया जाएगा। अधिकारियों ने कई मुख्य सड़कों का भी प्रस्ताव बनाने की बात कही। मेयर अवनीत कौर ने नालों को सीवर से जोडऩे के बारे में विस्तार से बात की। 

यह रोड़ा : नगर निगम अधिकारियों ने बताया कि नालों को सीवर से जोड़ा जा सकता है, लेकिन डेयरी इसमें बड़ा रोड़ा हैं। डेयरी संचालक गोबर बहा देते हैं। वे नालों को तो साफ करा देते हैं, लेकिन सीवर इस तरह से साफ नहीं हो पाएगा। नालों को सीवर से जोडऩे से पहले डेयरी शहर से बाहर शिफ्ट करनी जरूरी हैं। 

यह है रास्ता : शहर में करीब 500 डेयरी हैं। इनको इतनी जल्द शहर से बाहर शिफ्ट नहीं किया जा सकता। तब तक डेयरी संचालकों को नाले में गोबर बहाने से रोका जा सकता है। निगम इनके साथ बैठक कर सहयोग भी ले सकता है। 

जन स्वास्थ्य विभाग ने सीवर का प्लान रखा
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने शहर में सीवर का प्लान मेयर के सामने रखा। एक्सईएन विकास सिराहा ने बताया कि शहर में सीवर गत वर्षों से बेहतर है। वे लगातार सफाई कर रहे हैं। इस बार बारिश में इतनी परेशानी नहीं आने दी गई। जीटी रोड पर इंसार बाजार से संजय चौक तक सीवर को ओर बेहतर बनाया जा रहा है। मेयर ने बताया कि शहर में कई जगह नाले और सीवर ओवरफ्लो हैं। इनका समाधान जरूरी है। पूर्व मेयर भूपेंद्र सिंह ने कहा कि सनौली रोड, वार्ड-11 और बबैल नाके पर नालों व सीवर की व्यवस्था में सुधार की जरूरत है। अधिकारी सीवर का प्लान तैयार करें। वे सरकार से इसको मंजूर कराकर लाएंगे। 

यहां है रोड़ा : शहर में सीवर पुराना और तंग है। उस समय के प्लान के हिसाब से जनसंख्या में कई गुना अधिक वृद्धि हुई है। ऐसे में नालों और नालियों को जोडऩा परेशानी पैदा करने वाला होगा। नालों से पोलिथिन और गंद होने से सीवर जाम होने का खतरा बढ़ेगा। 

यह है रास्ता : सीवर में पॉलिथिन जाने से रोकने के लिए जाली लगाना जरूरी है। गंदगी जाने से रोकने के लिए नालों में कैच पिट बनाए जा सकते हैं। इससे गंदगी कैच पिट में रुक जाएगी। सीवर बार-बार ओवरफ्लो नहीं होगा। 

जेबीएम का एक मोबाइल कूड़ादान पायलट प्रोजेक्ट में लाने का दावा 
शहर की सबसे बड़ी समस्या कूड़ा है। मेयर अवनीत कौर ने पहली बैठक इसी पर ली। इसमें जेबीएम, पार्वती इंटरप्राइजिज और आइएनडी कंपनी के प्रतिनिधि शामिल हुए। मेयर अवनीत कौर ने उनसे सफाई की योजना जानी। अवनीत कौर ने कहा कि शहर में सेकेंडरी प्वाइंट होना बड़ा सवाल है। इससे सफाई होने के बाद भी दिखाई नहीं देती। शहर के चौक और चौराहों पर कूड़ा डालने के लिए प्वाइंट बना दिए गए हैं। जेबीएम के प्रतिनिधि अतेंद्र ने बताया कि वे ट्राली नुमा मोबाइल कूड़ाडान पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में सुखदेव नगर रोड पर रखेंगे। इसके सफल होने पर शहर में बाकी जगहों पर रखा जाएगा। 

यहां है रोड़ा : सेक्टरों में अब तक डोर-टू-डोर शुरू नहीं हो पाया है। यहां पर प्राइवेट लोग ही काम कर रहे हैं। जेबीएम का कहना है कि ये कभी भी घरों से कूड़ा लाकर सेकेंडरी प्वाइंटों का डाल देते हैं। ऐसे में सेकेंडरी प्वाइंट खाली नहीं हो पाते। शहर के बाजारों में कूड़ादान नहीं हैं। दुकानदार सुबह ही सफाई कर दुकानों के बाहर ढेरी लगा देते हैं। 

यह है समाधान : सेक्टरों में कंपनी डोर-टू-डोर शुरू करें। यहां पर प्राइवेट काम करने वालों को कंपनी अपने साथ काम में लगाए। दुकानदार शाम को दुकान बंद करते समय बाहर कूड़ा रख दें। सफाईकर्मी रात को कूड़ा उठा ले जाएंगे। ऐसे में गंदगी नहीं रहेगी। शहर से धीरे-धीरे सेकेंडरी प्वाइंट भी बंद करने का प्रयास है।

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