गजब का हौसला, हरियाणा में आर्गेनिक खेती की अलख जगा रही महिला किसान

हरियाणा की महिला किसान दूसरों किसानों को आर्गेनिक खेती के लिए प्रेरित कर रही हैं। खुद भी आर्गेनिक खेती करने के साथ-साथ जहर मुक्‍त निवाला के लिए दूसरों को फायदें बताती हैं। यूरिया और डीएपी का प्रयोग नहीं करतीं। खुद जीवामृत तैयार करतीं।

Anurag ShuklaThu, 29 Jul 2021 08:33 AM (IST)
जीवामृत तैयार करतीं जींद की महिला किसान संतोष।

जींद, [बिजेंद्र मलिक]। हरियाणा के जींद की महिला किसान के हौसले को देख हर कोई सराहना कर रहा है। महिला किसान न सिर्फ अपनी खेती को रसायनिक खाद से जहर मुक्‍त किया बल्कि दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित कर रहीं हैं। अब दूसरे किसानों के लिए इनका काम नजीर बनता जा रहा है।

मोहम्मद खेड़ा गांव की 56 वर्षीय महिला संतोष अपने पति बलवान सिंह के साथ आर्गेनिक खेती कर रही हैं। उनके पास ढाई एकड़ जमीन है। डेढ़ एकड़ में बाग लगाया हुआ है। जिसमें हरा चारा और दूसरी फसलें भी लेती हैं। आधा एकड़ में गन्ना और आधा एकड़ में ज्वार है। खेत में यूरिया, डीएपी और कीटनाश्कों का प्रयोग नहीं करते। खुद ही जीवामृत और जैविक खाद तैयार खेत में डालते हैं। बलवान सिंह फरीदाबाद में नौकरी करते थे और संतोष भी वहां डाकघर में एजेंट थी। तब संतोष पेट की कई तरह की बीमारियों से ग्रस्त थी।

गन्ने की फसल में निराई करते हुए।

स्‍वस्‍थ नहीं हुईं तो उठाया ये कदम

कई जगह दवाइयां लेने के बाद भी वो स्वस्थ नहीं हुई। पति की रिटायरमेंट के बाद साल 2018 में गांव में आए और यहां आकर आर्गेनिक खेती शुरू की। खेत में काम करने, बगैर रासायनिक खादों और दवाइयों के जहर मुक्त भोजन खाने तथा योग करने से उसकी सारी बीमारियां भी दूर हो गई। खाद और दवाइयों का खर्च नहीं होने से फसल पर लागत भी कम है। वहीं उत्पादन भी अच्छा हाेता है। बीमारियों से बचना है, तो जहर मुक्त खेती करनी होगी।

सुबह सात बजे पहुंच जाते हैं खेत में

संतोष देवी के दो लड़के और एक लड़की है। तीनों की शादी हो चुकी है। बेटे नौकरी करते हैं, बेटी भी कोचिंग सेंटर चलाती है। बलवान और संतोष प्रतिदिन सुबह सात बजे खेत में पहुंच जाते हैं। खेत में जाकर हवन करते हैं। उसके बाद जीवामृत खाद तैयार करते हैं। संतोष पिल्लूखेड़ा आर्गेनिक ग्रुप से भी जुड़ी हुई हैं। जिसमें पिल्लूखेड़ा क्षेत्र के काफी किसान जुड़े हुए हैं। खंड कृषि अधिकारी डा. सुभाष चंद्र इस ग्रुप के साथ आर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहे हैं।

ऐसे मिली आर्गेनिक खेती की प्रेरणा

संतोष ने बताया कि वह राजीव दीक्षित के व्याख्यान सुनने के लिए पतंजलि योगपीठ हरिद्वार जाती थी। फरीदाबाद में भी कई उनकी कक्षाओं में गई। कुछ साल पहले एक महिला वैज्ञानिक से संपर्क हुआ। उन्हें ब्रेस्ट कैंसर थी, वो आर्गेनिक अनाज और फल-फ्रूट खाती थी। जिससे उन्हें आर्गेनिक खेती करने की प्रेरणा मिली। संतोष ने साल 2015 में श्रुति विज्ञान आचार्य कुलम गुरुकुल शाहबाद पंचगव्य का कोर्स किया।

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