हरियाणा के कई शहरों की हवा हो रही जहरीली, बिल्‍कुल भी लापरवाही न करें

धुआं और पराली से लगातार वातावरण खराब हो रहा है।
Publish Date:Tue, 20 Oct 2020 05:49 PM (IST) Author: Anurag Shukla

पानीपत/यमुनानगर, [शैलजा त्यागी]। शहर की आबोहवा डेंजर जोन में पहुंच गई है। कारण साफ है कि फैक्टरियों से निकलने वाला धुआं हवा में जहर घोल रहा है। बावजूद इसके अधिकारी मौन है। कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति हो रही है। नगर निगम की टीम जहां पेड़ों पर पानी का छिड़़काव कर प्रदूषण कम करने के प्रयास में जुटे हैं, वहीं प्रदूषण बोर्ड के अधिकारी बढ़े हुए प्रदूषण का ठिकरा पड़ोसी जिलों पर फोड़ रहे हैं। उनके मुताबिक 19 अक्टूबर तक यमुनानगर में 198 जगहों पर आगजनी की घटनाएं हुई हैं, जबकि करनाल में यह आंकड़ा 585, कुरुक्षेत्र में 545 व अंबाला में 337 है। अधिकारियों की मानें तो आगजनी की घटनाओं की वजह से यमुनानगर की आबोहवा डेंजर जोन में पहुंची है।

नहीं लिया सबक

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक हवा में पीएम 2.5 का स्तर 60 मिलीग्राम पर मिट्रिक क्यूब निर्धारित किया है। पीएम 10 का स्तर 100 होना चाहिए। अभी सर्दी ठीक से शुरू भी नहीं हुई, लेकिन शहर की आबोहवा बद से बदतर होनी शुरू हो गई है। 19 अक्टूबर को यमुनानगर में पीएम 10 की मात्रा 479 पर मिट्रिक क्यूब दर्ज की गई। जबकि पीएम 2.5 का स्तर 287.90 तक पहुंच गया। पिछले दिनों यमुनानगर को प्रदेश का सबसे प्रदूषित शहर घोषित किया गया। बावजूद इसके अधिकारियों ने कोई सबक नहीं लिया। 

दिन की बजाए रात को हालत बदतर 

बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक शाम ढलते ही प्रदूषण का स्तर सामान्य से तीन से चार गुणा तक बढ़ जाता है। शाम को सात से आठ बजे तक पीएम 10 का स्तर 326 पर मिट्रिक क्यूब दर्ज किया गया, वहीं रात 10 से 11 बजे तक यह बढ़कर 361 तक पहुंच गया, जबकि रात को एक से दो बजे तक 342.9 दर्ज किया गया। जो कि सामान्य से साढ़े तीन गुणा तक ज्यादा है। 

पड़ोसी जिलों पर प्रदूषण बढऩे का ठिकरा

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी निर्मल कश्यप के मुताबिक पड़ोसी जिलों में आगजनी की घटनाओं की वजह से यमुनानगर में प्रदूषण का स्तर दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि यमुनानगर में अभी तक 198 जगहों पर आगजनी की घटनाएं हुई है, जबकि करनाल में यह आंकड़ा 585, कुरुक्षेत्र में 545 व अंबाला में 337 जगहों पर आगजनी हुई है। आग के बाद धुआं हवा में फैल जाता है। यही वजह है कि यमुनानगर के हालत बद से बदतर हो रहे हैं। 

प्रदूषण का स्वास्थ्य पर असर

सीएमओ डॉ. विजय दहिया के मुताबिक प्रदूषण से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। सबसे ज्यादा दिक्कत बच्चों व दमा रोगियों को होती है। हवा में हानिकारक गैसों की मात्रा बढऩे से उन्हें सांस लेने में दिक्कत रहती है। एलर्जी व सांस के रोगियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। 

जहरीली गैसों की वजह से सांस लेना हुआ दूभर

पर्यावरणविद डॉ. अजय के मुताबिक फैक्टरियों से निकलने वाले धुएं में कार्बन मोनोडाइआक्साइड, सल्फर डाईआक्साइड, नाइट्रोजन आक्साइड, पोटेशियम आक्साइड जैसी हानिकारक गैसों की मात्रा काफी अधिक होती है।  इनसे सांस लेने में दिक्कत आती है और एलर्जी की संभावना भी बढ़ जाती है। हवा में पीएम 2.5 व पीएम 10 ज्यादा खतरनाक होती है। ये कण इतने महीम होते हैं कि सांस के जरिए मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। 

भारी हवा की वजह से बढ़ा रहा प्रदूषण

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी निर्मल कश्यप का कहना है कि सर्दी में हवा भारी हो जाती है। इन दिनों हवा भी नहीं चलती। हवा में एक बार प्रदूषण के जो कण आ जाते हैं, वे फ्लो नहीं कर पाते। जिस कारण प्रदूषण का स्तर सामान्य स्तर पर नहीं पहुंच पाता।

 

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