हरियाणा में बीज माफिया हावी, एक ही मोबाइल नंबर पर लिए सीड प्रोग्राम, मामले की होगी विजिलेंस जांच

हरियाणा में पिछले 29 सालों से किसानों के नाम पर बीज उत्पादन का गोरखधंधा चल रहा था। मामला पकड़ में आ गया है। एक ही मोबाइल नंबर से कई सीड प्रोग्राम लिए गए। मामले की जांच अब विजिलेंस करेगी।

Kamlesh BhattThu, 24 Jun 2021 09:00 AM (IST)
हरियाणा में सीड माफिया हावी। सांकेतिक फोटो

जेएनएन, चंडीगढ़। हरियाणा में किसानों के लिए बढ़िया बीज उत्पादन का दावा करने वाला माफिया और बीज विकास निगम के अधिकारी आमने-सामने हो गए हैं। बीज विकास निगम के प्रबंध निदेशक ने क्षेत्रीय प्रबंधकों के सहयोग से जहां पिछले 29 सालों से पनप रहे बीज माफिया पर कड़ी चोट करने का साहस जुटाया है, वहीं बीज निगम के कुछ निदेशक व पूर्व निदेशकों ने विभागीय अधिकारियों को ही कठघरे में खड़ा कर दिया है। हरियाणा सरकार ने मामला किसानों से जुड़ा हुआ देखकर बीज घोटाले की विजिलेंस जांच कराने का निर्णय लिया है।

हरियाणा सरकार के आदेश पर हालांकि अभी विजिलेंस ने अपनी जांच प्रक्रिया आरंभ नहीं की है, लेकिन उससे पहले ही लगातार कई खुलासे हो रहे हैं। बीज निगम के डायरेक्टर व पूर्व डायरेक्टर बरसों से अपने पास उपयुक्त जमीन नहीं होने के बावजूद प्रोडेक्शन प्रोग्राम लेते रहे और मार्केट से बीज खरीदकर निगम में जमा कराते रहे।

इसका भंडाफोड़ होने के बाद कुछ निदेशकों व उनके परिवार के सदस्यों ने क्रेडिट राशि ब्याज के साथ निगम के पास जमा करा दी है। अब पता चला है कि कई लोगों ने निगम से बीज खरीदे और उनके नाम के आगे सिर्फ एक ही मोबाइल नंबर लिखा गया। उदाहरण के लिए यदि 10 लोगों ने सीड प्रोडेक्शन का प्रोग्राम लिया है तो उन सभी के आगे एक मोबाइल नंबर दर्ज है।

हरियाणा बीज विकास निगम के प्रबंध निदेशक एवं करनाल के मंडलायुक्त संजीव वर्मा के पास ऐसे कई प्रमाण पहुंचे हैं। क्षेत्रीय प्रबंधकों ने वेरीफाई करने के बाद यह सुबूत मुख्यालय भेजे हैं। इन सुबूतों के सामने आने के बाद बीज माफिया में हड़कंप मचा हुआ है। अब यह लोग राजनीतिक संरक्षण के लिए सरकार के चक्कर काटते फिर रहे हैं। दूसरी तरफ कुछ लोगों ने निगम के एमडी पर दुर्भावनापूर्ण व्यवहार करने का आरोप लगाया है।

निगम के डायरेक्टर जितेंद्र गिल, महेंद्र सिंह, पूर्व डायरेक्टर प्रवेश वोहरा, आरएस बैनीवाल, भगवान दास, सुधीर मेहता, गुरमेल सिंह और सुखविंदर तरावड़ी कुरुक्षेत्र पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष धर्मवीर मिर्जापुर के नेतृत्व में कृषि मंत्री जेपी दलाल से मिले और न्याय की मांग की।

इन निदेशकों व पूर्व निदेशकों ने कहा कि बीज निगम के एमडी दुर्भावना से काम कर रहे हैं। उन्होंने कई दस्तावेज भी कृषि मंत्री को सौंपे। उधर, एमडी संजीव वर्मा का कहना है कि पिछले 29 सालों से किसानों के नाम पर बीज उत्पादन का गोरखधंधा चल रहा था। हमने उसकी पहचान कर ऐसे धंधेबाजों को बेनकाब किया है।

हरियाणा सरकार ने अब पूरे मामले की विजिलेंस जांच का फैसला किया है। उस जांच में सब पता चल जाएगा कि दोषी कौन है। संजीव वर्मा ने कहा कि मैं बीज माफिया के दबाव में आकर काम नहीं करने वाला। यह केस हाईकोर्ट में भी चल रहा है। बीज माफिया देर सबेर विजिलेंस जांच और हाईकोर्ट में भी बेनकाब होते देर नहीं लगेगी।

 

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