हरियाणा में कालोनियों को नियमित करने की सूची को लेकर मेयर व अफसरों में खींचतान, सीएम व गवर्नर तक पहुंचा मामला

हरियाणा में अवैध कालोनियों को नियमित करने की सूची को लेकर शहरों के मेयर और अधिकारियों में खींचतान तेज हाे गई है। इससे मेयर गुस्‍से में हैं। अब मामला हरियाणा के सीएम और राज्‍यपाल तक पहुंच गया है।

Sunil Kumar JhaWed, 15 Sep 2021 10:40 AM (IST)
हरियाणा में कोलाेनियों को नियमित करने की सूची पर मेयर व अफसरों में खींचतान बढ गई है। (फाइल फोटो)

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा में नगर निगमों के मेयर वित्तीय पावर नहीं मिलने से नाराज हैं। पिछले साल मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने उन्हें 10 करोड़ रुपये तक के काम कराने की पावर दी थी, मगर अभी तक इस पावर का सही ढंग से इस्तेमाल नहीं हो पाया है। नगर निगमों के आयुक्त और जिला उपायुक्त मेयरों की इस पावर में बड़ी बाधा बन रहे हैं। प्रदेश के सभी मेयर मुख्यमंत्री मनोहर लाल से मिलने पहुंचे और उनके सामने अपनी समस्या रखी। कई मेयरों ने अनियमित कालोनियों को नियमित करने में जिला अधिकारियों की अडंगेबाजी का मुद्दा भी मुख्यमंत्री के सामने उठाया।

 हरियाणा के मेयरों ने सीएम से मांगी पावर, कहा आयुक्त व उपायुक्त डालते हैं अडंगा

मुख्यमंत्री मनोहर लाल के निवास पर हुई बैठक के बाद मेयर राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय से मिलने भी पहुंचे। इस दौरान जिलाध्यक्षों व मेयरों ने राज्यपाल ने बारी-बारी परिचय हासिल किया। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ भी इस मुलाकात के दौरान मौजूद रहे। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के निवास पर हुई मेयरों की बैठक में उन्होंने कहा कि उन्हें अपने यहां पुलिया, नालियां और छोटे निर्माण कार्य तक करने की पावर नहीं है।

 मुख्यमंत्री ने कहा, जल्द ही शहरी निकाय मंत्री अनिल विज के साथ कराई जाएगी बैठक

मेयरों ने कहा कि हरियाणा सरकार ने पिछले साल 10 करोड़ रुपये तक वित्तीय खर्च करने की पावर दी थी, मगर इसे अभी तक सही ढंग से लागू नहीं किया गया है। कई जिलों में उपायुक्त तो कभी निगम आयुक्त इनमें बाधा बन जाते हैं। विधायक के बाद मेयर की पावर होती है, लेकिन अधिकारियों की अफसरशाही के आगे वह जनता के काम तक नहीं करा पाते। कई मेयर ने कहा कि अनाधिकृत कालोनियों को नियमित करने संबंधी कालोनियों की सूची की हमें भी जानकारी मिलनी चाहिये। इन सूची को मेयर की जानकारी और संस्तुति के आधार पर सरकार तक पहुंचाया जाए।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि जल्द ही शहरी निकाय मंत्री अनिल विज के साथ वह अपनी बैठक तय करें और उनमें इन मुद्दों को उठाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि नगर निगम अब अपना खर्च खुद उठाएं। आपात स्थिति को छोड़कर प्रदेश सरकार नगर निगमों को कोई वित्तीय मदद नहीं देगी। नगर निगमों में लगे आयुक्तों व अन्य अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) लिखने की मेयरों की मांग पर मुख्यमंत्री ने अभी कोई फैसला नहीं लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि निगम बिजली बिल सेस, प्रापर्टी टैक्स, विज्ञापन तथा अन्य माध्यमों से अपनी आमदन बढ़ाएं।

बैठक से पहले प्रदेश सरकार ने सर्वे कराया था। इसमें नगर निगमों की आमदन, कार्यशैली, वित्तीय स्थिति, आमदन के साधन आदि के बारे में विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई थी। रिपोर्ट के मुताबिक गुरुग्राम, अंबाला व हिसार निगम की वित्तीय स्थिति तथा कार्यशैली संतोषजनक है। यमुनानगर, रोहतक, सोनीपत, पानीपत व पंचकूला इस मामले में औसत मिले, जबकि फरीदाबाद व करनाल नगर निगम घाटे में हैं।

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