हरियाणा में दीपावली पर खूब जली पराली, लेकिन प्रदूषण के औद्योगिक इकाइयां व वाहन अधिक जिम्मेदार

हरियाणा में दो से आठ नवंबर तक पराली जलाने के केस चरम पर पहुंचे। दो सप्ताह में 2557 स्थानों पर धुआं उठा। मौजूदा सीजन में जितनी पराली जली उसका 45 फीसद हिस्सा पिछले एक पखवाड़े में जला। औद्योगिक इकाइयों ने भी खूब प्रदूषण फैलाया।

Kamlesh BhattMon, 15 Nov 2021 06:20 PM (IST)
हरियाणा में दीपावली पर खूब जली पराली। सांकेतिक फोटो

सुधीर तंवर, चंडीगढ़। हरियाणा में दीवाली के दौरान पराली (धान के फसल अवशेष) खूब जली। त्योहारों के चलते एक साथ कई सरकारी छुट्टियां पड़ गईं जिससे पराली जलाने के मामलाें की निगरानी कर रही टीमों की गतिविधियां प्रभावित हुईं। इसका फायदा उठाते हुए बड़ी संख्या में किसानों ने पराली जलाई। इसके बावजूद पराली से प्रदूषण करीब 10 फीसद है, जबकि अधिक प्रदूषण की वजह औद्योगिक इकाइयां, सड़कों पर दौड़ते वाहन और निर्माण स्थलों पर उड़ती धूल है।

हरियाणा में दो से आठ नवंबर तक पराली जलाने के सर्वाधिक मामले दर्ज किए गए हैं। पिछले दो सप्ताह में पराली जलाने के 2557 मामले सामने आ चुके हैं। राहत की बात यह कि अब सरकारी तंत्र के फिर सक्रिय होने से पराली का धुआं कुछ कम हुआ है। दीवाली पर प्रदूषण से निपटने के लिए प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में पड़ते 14 जिलों में आतिशबाजी पर प्रतिबंध लगाया हुआ था।

पटाखों पर प्रतिबंध कितना कारगर रहा, यह किसी से छिपा नहीं है। इस बीच पराली जलाने के केस भी अचानक बढ़ गए जिससे हवा में और जहर घुला। हालांकि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में सौंपी रिपोर्ट में माना है कि प्रदूषण के लिए पराली जलाने के मामले सिर्फ दस फीसद जिम्मेदार हैं। 90 फीसद प्रदूषण औद्योगिक इकाइयों, सड़कों पर दौड़ते वाहनों, निर्माण स्थलों पर उड़ती धूल सहित अन्य कारणों से हो रहा है। मौजूदा सीजन में जितनी पराली जली है, उसका 45 फीसद हिस्सा पिछले एक पखवाड़े में जला। हालांकि 15 सितंबर से लेकर अब तक प्रदेश भर में पराली जलाने के 5595 मामले सामने आए हैं, जोकि पिछले वर्ष की तुलना में तकरीबन 40 फीसद कम हैं।

पिछले वर्ष समान अवधि में 8831 मामले दर्ज किए थे। नवंबर की शुरूआत होते ही पराली जलाने के मामलों ने ऐसे तेजी पकड़ी कि 15 दिनों में आंकड़ा तीन हजार से बढ़कर सीधा साढ़े पांच हजार के पार पहुंच गया। इसके बावजूद कृषि विभाग इस आंकड़े को संतोषजनक मान रहा है क्योंकि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष 3236 मामले कम दर्ज किए गए हैं।वहीं, पराली जलाने के मामलों में अचानक बढ़ोतरी से चिंतित प्रदेश सरकार ने निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। उपायुक्तों से रिपोर्ट तलब किए जाने के बाद स्थानीय स्तर पर गठित टीमों ने सक्रियता बढ़ाई है। नतीजन पिछले एक सप्ताह में पराली जलाने के मामलों में खासी गिरावट आई है।

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