हरियाणा सिंचाई विभाग के पूर्व चीफ इंजीनियर गुलाब सिंह को राहत, सरकार के अनिवार्य सेवानिवृति के आदेश रद

हाई कोर्ट ने हरियाणा के सिंचाई विभाग के पूर्व चीफ इंजीनियर गुलाब सिंह नरवाल को बड़ी राहत दी है। हाई कोर्ट ने सरकार द्वारा उनकी अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश को रद कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि सरकार ने नियमों का पालन नहीं किया।

Kamlesh BhattThu, 02 Dec 2021 05:15 PM (IST)
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की फाइल फोटो।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा के सिंचाई विभाग के पूर्व चीफ इंजीनियर व भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के सदस्य रहे गुलाब सिंह नरवाल को राहत देते हुए सरकार के उनको अनिवार्य सेवानिवृति के आदेश को रद कर दिया। हाई कोर्ट ने कहा कि इस मामले में सरकार ने नियमों की पालना नहीं की।

कोर्ट ने सरकार को कहा कि वह नरवाल को उसके खिलाफ लगे आरोपों की जांच रिपोर्ट की कापी दे व उसका पक्ष् सुने और उसके बाद कोई आदेश पारित करे। कोर्ट ने कहा कि जब तक सरकार कोई आदेश पारित नहीं करती तब तक नरवाल को निलंबित माना जाएगा। हाई कोर्ट ने यह आदेश गुलाब सिंह नरवाल की याचिका पर जारी किया।

नरवाल ने अपनी याचिका में 31 दिसंबर 2020 को जारी आदेश, 26 मार्च 2021 की चार्जशीट, 27 अगस्त की जांच रिपोर्ट व 12 नवंबर को सजा के तौर पर जारी अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश को रद करने की मांग की है।नरवाल ने अपनी याचिका में कोर्ट को बताया कि वह भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी), चंडीगढ़ में सदस्य (सिंचाई) के रूप में डेपुटेशन पर थे। पिछले साल केंद्र सरकार ने उनका डेपुटेशन खत्म कर उन्हें वापस मूल कैडर भेज दिया।

26 मार्च 2019 को उन्हें बीबीएमबी चंडीगढ़ में सदस्य (सिंचाई) के रूप में अप्वाइंटमेंट कमेटी आफ कैबिनेट की अनुशंसा पर नियुक्ति दी गई थी। उनका कार्यकाल तीन साल के लिए था। उन्होंने बीबीएमबी द्वारा केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के संयुक्त सचिव तन्मय कुमार को बोर्ड का चेयरमैन नियुक्त करने को चुनौती दी थी, जिस कारण उनको वापस हरियाणा सिंचाई विभाग के चीफ इंजीनियर के पद पर भेज दिया गया था।

याचिका में आरोप लगाया गया कि बीबीएमबी के खिलाफ उन्होंने हाई कोर्ट में कई याचिका दायर की हुई है जो अभी हाई कोर्ट में विचाराधीन हैं। इसके बाद उनको हरियाणा सरकार ने निलंबित कर उनके खिलाफ जांच करवाकर इसी महीने अनिवार्य सेवानिवृति का आदेश जारी कर दिया, जो बदले की भावना से ओतप्रोत है।

हाई कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर पूछा, पदोन्नति पर क्यों न लगा दें रोक

पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) के पद पर सरकार के पसंदीदा इंस्पेक्टर को आउट आफ टर्न पदोन्नति देने का मामला पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट पहुंच गया है। हाई कोर्ट के जस्टिस बी एस वालिया ने याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न वह इस पर रोक लगा दे, कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि अगर आउट आफ टर्न पदोन्नति होती है तो वह इस याचिका पर कोर्ट के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगी।

इस मामले में इंस्पेक्टर मीना कुमारी और 12 अन्य इंस्पेक्टर द्वारा दायर याचिका में 21 अक्टूबर, 2021 के पत्र को रद करने और वापस लेने के निर्देश की मांग की गई है। जिसमें डीएसपी के रूप में पदोन्नति के लिए डीपीसी (विभागीय पदोन्नति कमेटी) की बैठक को आगामी आदेश तक रद कर दिया। याचिका में आरोप है कि सरकार के कुछ पसंदीदा लोगों को अनुचित लाभ देने के लिए बैठक को स्थगित कर दिया गया है।

याचिका के अनुसार राज्य सरकार टर्म पालिसी से बाहर कोई भी प्रमोशन तब तक नहीं किया जा सकता जब तक कोई पालिसी नहीं बनाई जाती है। याचिकाकर्ताओं ने डीएसपी के पद पर पदोन्नति के लिए उनकी वरिष्ठता और पात्रता के आधार पर पदोन्नति करने के आदेश देने का कोर्ट से आग्रह किया है। याचिका के अनुसार सरकार ने वरिष्ठता के आधार पर उनकी प्रमोशन करने के लिए जून व जुलाई 2021 प्रक्रिया शुरू की थी और डीपीसी की 11 नवंबर को होने वाली बैठक में निर्णय लेना था, लेकिन सरकार की तरफ से जानबूझकर और मनमाने ढंग से अगले आदेश तक बैठक पर रोक लगा दी।

याचिका के अनुसार अनुसार 8 अक्टूबर, 2021 को अधिसूचित हरियाणा पुलिस सेवा नियम 2002 के नियम 6 (1) में संशोधन के मद्देनजर राज्य प्राधिकारियों द्वारा आउट आफ टर्न प्रोन्नति मांगी गई। तीन इंस्पेक्टर जो याचिकाकर्ताओं से कनिष्ठ हैं और वर्तमान सरकार से संबंधित व करीबी हैं को राज्य द्वारा बिना किसी दिशा निर्देश/नीति बनाए या संशोधित नियम 6 (1) का पालन किए बिना अवधि से पहले पदोन्नति की ऐसी प्रक्रिया शुरू की गई है। इनमें एक मुख्य मंत्री का निजी सुरक्षा अधिकारी, एक इंस्पेक्टर विधायक का भतीजा व एक इंस्पेक्टर संवैधानिक पद कार्यरत किसी व्यक्ति का नजदीकी है।

याचिका में बताया गया कि पिछले 8-10 वर्षों में ऐसे कई उदाहरण हैं जो पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) के रूप में पदोन्नत होने के योग्य नहीं हैं, उन्हें केवल असाधारण साहस के आधार पर पदोन्नत कर दिया।कोर्ट को बताया गया कि पिछले सात वर्षों में आउट आफ टर्न पदोन्नत लोगों में कृष्ण हुड्डा, 2010 में राजेश फोगाट, 2013 में कृष्ण कुमार, 2017 में जीत सिंह और एक गुरदयाल सिंह शामिल हैं।

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