हरियाणा में अफसरों के रवैये पर सवाल, मंत्रियाें की भी नहीं सुनते, जनता दरबार में दिए आदेशों की अनदेखी

हरियाणा में अधिकारियों के रवैये पर सवाल उठ रहे हैं। बात यहां तक पहुंच गई है क‍ि अधिकारी मंत्रियों की भी नहीं सुनते हैं। शिकायतें सामने आ रही हैं कि जनता दरबार में मंत्रियों द्वारा दिए गए आदेशेों भी राज्‍य के अफसर लागू नहीं करते हैं।

Sunil Kumar JhaTue, 05 Oct 2021 06:48 AM (IST)
हरियाणा में अफसरों पर मंत्रियों के आदेशों की अनदेखी की शिकायतें बढ़ रही हैं। (फाइल फोटो)

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा में अधिकारियों की मनमानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। कई मंत्रियों की शिकायत यह है कि अधिकारी उनकी भी नहीं सुनते। इन मंत्रियों का कहना है कि अधिकारियों को या तो सरकार का डर नहीं रह गया और या फिर वह पूरी तरह से ढ़ीठ हो गए हैं। यहां तक कि मंत्रियों द्वारा लगाए जा रहे जनता दरबार में दी जाने वाली हिदायतों पर भी अधिकारी ध्‍यान नहीं देते। आरोप है कि मंत्रियाें को गुमराह करते हुए कागजों में शिकायत का निपटारा दिखा दिया जाता है, जबकि हकीकत में पीड़ित लोग यहां-वहां धक्के खा रहे होते हैं।

शिकायतों के बढ़ते ढेर पर सरकार ने लिया संज्ञान, शीर्ष अफसरों की जवाबदेही तय

हरियाणा सरकार के पास ऐसी ढेरों शिकायतें पहुंची हैं। इस पर सख्ती दिखाते हुए प्रदेश सरकार ने शीर्ष अधिकारियों की जवाबदेही तय की है। मुख्य सचिव कार्यालय की ओर से इस संबंध में लिखित आदेश जारी किए गए हैं। सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्ष, मंडलायुक्त और उपमंडल अधिकारियों को दिए आदेशों में कहा गया है कि विभिन्न मंत्रियों द्वारा जनता की शिकायतें सुनने व उनके निवारण के लिए जनता दरबार लगाया जाता है। इनमें काफी संख्या में लोग अपनी शिकायतें लेकर आते हैं। मंत्रियों के आदेश पर शिकायतों को संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेज दिया जाता है।

कागजों में दिखा देते शिकायत का निपटारा, हकीकत में धक्के खा रहे होते हैं पीड़ित

इसके बावजूद कुछ अधिकारी अपने विभागों से संबंधित शिकायतों को गंभीरता से नहीं लेते। नतीजन पीड़ित व्यक्ति एक ही शिकायत लेकर बार-बार मंत्रियों के दरबार में हाजिरी लगाता रहता है। कई बार अधिकारियों द्वारा शिकायत को एक अधिकारी से दूसरे अधिकारी को अग्रसारित कर खानापूर्ति कर दी जाती है और मंत्रियों द्वारा रिपोर्ट मांगने पर उन शिकायतों का निपटान होना दिखा दिया जाता है।

मुख्य सचिव ने इस पर संज्ञान लेेते हुए सभी अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि मंत्रियों द्वारा भेजी गई शिकायतों का निजी तौर पर संज्ञान लें। शिकायतों की विस्तृत जांच करें तथा की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मंत्रियों को भिजवाना सुनिश्चित करें। इसके अलावा शिकायतों का निपटान होने तक उनका रिकार्ड भी रखा जाए। आदेशों की कड़ाई से पालन कराया जाए। अगर कहीं भी मंत्रियों द्वारा भेजी गई शिकायत के निपटारे में ढिलाई बरती गई तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

सांसद-विधायकों की अनदेखी की शिकायतें आम

प्रदेश में अफसरशाही द्वारा सांसद-विधायकों की अनदेखी की शिकायतें आम हैं। न केवल मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस और निर्दलीय विधायक, बल्कि सत्तारूढ़ भाजपा और जजपा के माननीय भी कई मौकों पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल और विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता के सामने इसकी शिकायत कर चुके हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप के बाद कुछ दिन तो अफसर संवेदनशीलता दिखाते हैं, लेकिन बाद में फिर वही कहानी दोहराई जाने लगती है। यही वजह है कि अफसरों द्वारा सांसद-विधायकों के फोन नहीं उठाने, प्रोटोकाल के उल्लंघन और संतोषजनक व्यवहार नहीं होने की शिकायतें बढ़ी हैं।

सबसे ज्यादा शिकायतें पुलिस महकमे की

जनता दरबार में सबसे ज्यादा शिकायतें पुलिस महकमे से जुड़ी होती हैं। खुद गृह मंत्री अनिल विज भी इसे स्वीकार कर चुके हैं जो हर शनिवार को जनता दरबार लगाते हैं। विज ने चेतावनी दी है कि यदि किसी भी अफसरों की ओर से शिकायत पर कार्रवाई करने को लेकर कोई टालमटोल की गई तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जनता दरबार में आने वाली शिकायतों पर कार्रवाई नहीं करने वाले अफसरों को छोड़ा नहीं जाएगा।

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