हरियाणा में कृषि विधेयकों के समर्थन में प्रगतिशील किसान, ट्रैक्टर रैली निकाल कहा- यह किसान हित में

भिवानी के लोहारू में कृषि विधेयकों के समर्थन में रैली निकालते प्रगतिशील किसान। जागरण
Publish Date:Tue, 22 Sep 2020 09:42 AM (IST) Author: Kamlesh Bhatt

जेएनएन, चंडीगढ़। केंद्र सरकार द्वारा पारित कृषि से जुड़े तीन विधेयकों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे विपक्षी दलों और सियासी दलों से जुड़ी किसान यूनियनों के विरोध पर प्रगतिशील किसानों का कृषि विधेयकों को समर्थन भारी पड़ने लगा है। सोमवार को फतेहाबाद के रतिया और भिवानी के लोहारू सहित विभिन्न स्थानों पर बड़ी संख्या में किसानों ने ट्रैक्टरों पर सवार होकर कृषि अध्यादेशों के समर्थन में नारे लगाए और केंद्र सरकार का आभार जताया।

कृषि विधेयकों के समर्थन में लोहारू में बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टरों पर सवार होकर दादरी मोड़ पहुंचे। यहां से शास्त्री पार्क तक ट्रैक्टर मार्च करते हुए विधेयकों के समर्थन में नारे लगाए। किसान राजेंद्र सिंह खेड़ा, छत्रपाल, कमल सिंह सहित अन्य किसानों का कहना था कि यह विधेयक किसानों को अपनी फसल देशभर में कहीं भी बेचने का अवसर देते हैं। यह किसानों की आर्थिक आजादी के लिए उठाया गया सही कदम है। यह किसान की मर्जी होगी कि वह स्थानीय मंडियों में अपनी फसल बेचे या दूसरे जिले या फिर दूसरे प्रदेश में। हमारे लिए देश के बाजार खोल दिए गए हैं।

वहीं, रतिया में ट्रैक्टर मार्च निकालते हुए किसानों ने विधेयकों के समर्थन में एसडीएम को कृषि मंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। किसान सतनाम, दलीप सिंह और दीपू कंबोज ने कहा कि कांग्रेस व कुछ कथित किसान नेताओं द्वारा भ्रम फैलाया जा रहा है। विधेयकों से किसान को फसल बेचने के लिए चार विकल्प दिए गए हैं। किसान अपना उत्पाद बेचें, उत्पादक संघ बनाकर माल बेचें, किसी व्यवसायी से अनुबंध कर फसल बेचें अथवा स्थानीय मंडी में समर्थन मूल्य पर अपनी फसल बेचें। चार विकल्प मिलना हमारे लिए खुशहाली के रास्ते खोलेगा।

अनुबंध के बाद शर्तों से भाग नहीं सकेंगे व्यवसायी

किसानों ने कहा कि अनुबंध खेती में होने वाली ई-रजिस्ट्री में सारा लेखा-जोखा होगा। इससे अनुबंध करने वाला व्यवसायी अपनी शर्तों से भाग नहीं सकेगा। तीन उपबंधों के कारण कोई भी व्यवसायी अनुबंध खेती की आड़ में किसानों की जमीन नहीं ले सकेगा। कोई भी व्यवसायी एक बार अधिक धन देकर उसके चुकाने की एवज में किसानों से बंधुआ खेती भी नहीं करा सकेगा। कोई व्यवसायी हमारे खेत में यदि ट्यूबवेल व पोली हाउस जैसा ढांचा खड़ा कराता है और यदि वह अनुबंध के बाद निश्चित समय के भीतर उसे नहीं हटाता है तो किसान उसका मालिक हो जाएगा। इसके अलावा किसानों को नवीनतम खेती की जानकारी मिल सकेगी ।

किसानों को समझ आई विधेयकों की जरूरत

किसानों ने कहा कि इन विधेयकों में आवश्यक वस्तु अधिनियम में भी छूट दी है, लेकिन फल-सब्जी के दाम दोगुने होने व खाद्यान्नों, दलहन व तिलहन के दाम डेढ़ गुणा होने पर सरकार पुन अधिकार ले सकती है। इसमें काला बाजारी रोकने व उपभोक्ता को भी सुरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने वाले कानून को यथावत रखा है। कृषि एवं लागत मूल्य आयोग के नियमों में कोई बदलाव नहीं किया है। प्रगतिशील किसानों ने कहा कि वे पूरी तरह से इन अध्यादेशों के समर्थन में हैं।

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