हरियाणा में NCERT से बाहर की किताबें नहीं पढ़ा सकेंगे निजी स्कूल, अभिभावकों को मिलेगी बड़ी राहत

हरियाणा के निजी स्कूलों में चलेंगी एनसीईआरटी की किताबें। सांकेतिक फोटो

हरियाणा में सभी स्कूलों में पहली से बारहवीं कक्षा तक शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की किताबें लगाने का निर्देश दिया गया है। राज्य के निजी स्कूल अब कमीशनखोरी के चक्कर में निजी प्रकाशकों की पुस्तकें बच्चों पर नहीं थोप पाएंगे।

Kamlesh BhattFri, 07 May 2021 06:58 PM (IST)

जेएनएन, चंडीगढ़। हरियाणा में निजी स्कूल संचालक अब राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) से बाहर की पुस्तकें नहीं पढ़ा सकेंगे। शिक्षा विभाग ने सभी निजी स्कूलों में अनिवार्य रूप से पहली से बारहवीं कक्षा तक एनसीईआरटी की किताबें लगाने के आदेश दिए हैं।

स्कूल निदेशक ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और मौलिक शिक्षा अधिकारियों को लिखित आदेश जारी किए हैं। इससे निजी स्कूल मनमर्जी से निजी प्रकाशकों की पुस्तकों को बच्चों पर नहीं थोप पाएंगे। अभी तक अधिकतर निजी स्कूलों में कमीशनखोरी के चक्कर में निजी प्रकाशकों की पुस्तकें लगाई जा रहीं थी।

वर्ष 2016 से यह मामला पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में भी विचाराधीन चल रहा है। स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार ने बताया कि शिक्षा नियमावली 2003 में शिक्षा निदेशक को अधिकार नहीं था कि वह पाठ्यक्रम में एनसीईआरटी की पुस्तकें लागू करें। प्रदेश सरकार ने विगत एक मार्च को नियमावली में संशोधन कर अब यह अधिकार शिक्षा निदेशक को दे दिया है।

हरियाणा में किसी भी बोर्ड से संबंद्धता रखने वाले सभी निजी स्कूलों में अब एनसीईआरटी की पुस्तकें ही लागू करनी होंगी। एनसीईआरटी की कक्षा पहली से बारहवीं तक की किताबें अमूमन 500 से 800 रुपये तक मिल जाती हैं, जबकि निजी स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें लगाकर बच्चों से छह हजार से आठ हजार रुपये तक वसूले जाते हैं। कई निजी प्रकाशकों द्वारा निजी स्कूल संचालकों को किताबों पर 70 फीसद तक कमीशन दिया जाता है, जिसकी मार अभिभावकों की जेब पर पड़ती है।

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