हरियाणा में ग्रुप-डी में पूर्व सैनिकों के आरक्षित पदों को भरने की तैयारी, सरकार ने मांगा रिक्त पदों का ब्योरा

हरियाणा में ग्रुप-डी में पूर्व सैनिकों के आरक्षित पदों को भरने की तैयारी है। इस संबंध में रिक्त पदों का ब्योरा मांग लिया गया है। इसके अलावा मानव संसाधन सूचना विभाग ने अनुबंध आधार पर ड्रोन पायलट के सात पदों की भर्ती के लिए भी आवेदन मांगे हैं।

Kamlesh BhattThu, 02 Dec 2021 05:01 PM (IST)
हरियाणा में पूर्व सैनिकों के आरक्षित पदों को भरने की तैयारी। सांकेतिक फोटो

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा में पूर्व सैनिकों के लिए आरक्षित ग्रुप डी के रिक्त पदों को भरने की तैयारी है। प्रदेश सरकार ने सभी महकमों और बोर्ड-निगमों से उन रिक्त पदों का ब्योरा मांगा है, जिन पर वर्ष 2018 में हुई भर्ती में चयनित पूर्व सैनिकों ने ज्वाइन नहीं किया है।

मुख्य सचिव ने इस संबंध में सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, बोर्ड-निगमों के प्रबंध निदेशक और मुख्य प्रशासक, आयुक्तों और उपायुक्तों को लिखित आदेश जारी किए हैं। पूर्व सैनिकों के लिए आरक्षित रिक्त पदों की जानकारी पांच दिसंबर तक सामान्य प्रशासन विभाग की मेल पर भेजनी होगी। इसके अलावा छह दिसंबर तक नोडल अधिकारी व्यक्तिगत रूप से भी सामान्य प्रशासन विभाग के प्रधान सचिव कार्यालय में रिपोर्ट जमा करा सकते हैं।

वहीं, मानव संसाधन सूचना विभाग ने ड्रोन के संचालन के लिए ड्रोन पायलट के सात पदों पर अनुबंध आधार पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं। एयरोनोटिकल इंजीनियरिंग में डिग्री धारी युवा 31 दिसंबर तक विभागीय पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं। अनुबंध तीन साल के लिए होगा। लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के आधार पर यह भर्तियां होंगी। इसी तरह मानव संसाधन प्रबंधन सिस्टम (एचआरएमएस) पर डाटा अपलोड नहीं करने वाले अफसर-कर्मचारियों को राहत देते हुए अंतिम तिथि दस दिसंबर तक बढ़ा दी है। अगले शुक्रवार तक पोर्टल पर डाटा अपलोड किया जा सकेगा।

अब इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी ही बनेंगे थानेदार

हरियाणा में अब इंस्पेक्टर रैंक से नीचे के पुलिस अधिकारियों को थाने का प्रभारी (एसएचओ) नहीं बनाया जा सकेगा। वर्तमान में विभिन्न जिलों में पुलिस अधीक्षकों ने थानों की कमान सब इंस्पेक्टरों और उनसे भी नीचे के रैंक के पुलिस मुलाजिमों को सौंपी हुई है जिस पर गृह विभाग ने आपत्ति जताई है। इस पर एक्शन लेते हुए पुलिस महानिदेशक पीके अग्रवाल ने तुरंत प्रभाव से थानों की कमान इंस्पेक्टरों को सौंपने के निर्देश दिए हैं।

डीजीपी की ओर से इस संबंध में गुरुग्राम, फरीदाबाद और पंचकूला के पुलिस आयुक्तों, सभी जिलों के एसपी और रेलवे के एसपी को लिखित आदेश जारी किए हैं। नियमानुसार इंस्पेक्टर को ही किसी थाने का इंचार्ज बनाया जा सकता है। प्रदेश में थानों की तुलना में पर्याप्त संख्या में इंस्पेक्टर रैंक के पुलिस अधिकारी हैं। इसके बावजूद विभिन्न कारणों के चलते स्थानीय स्तर पर पुलिस अधीक्षकों ने अपने चहेते सब इंस्पेक्टरों को थाने की कमान सौंपी हुई है और इंस्पेक्टरों को पुलिस लाइन या दूसरे स्थानों पर लगाया हुआ है।

इस पर आपत्ति जताते हुए डीजीपी ने साफ हिदायत दी है कि थाने का इंचार्ज इंस्पेक्टरों को ही बनाया जाए। जिन स्थानों पर सब इंस्पेक्टरों को प्रभारी बनाया गया है, वहां तुरंत प्रभाव से इंस्पेक्टरों को थाने की कमान सौंपी जाए। बताया जाता है कि इस बारे में शिकायतें आने के बाद गृह मंत्री अनिल विज ने डीजीपी को उचित कार्यवाही करने के आदेश दिए थे, जिसके बाद डीजीपी ने यह परिपत्र जारी किया है।

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