सजा पर रोक के बाद सदस्यता बहाली के लिए हरियाणा स्पीकर से मिले प्रदीप चौधरी, कानूनी राय के बाद लेंगे फैसला

हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष से मिलने पहुंचे प्रदीप चौधरी।

हिमाचल हाई कोर्ट से राहत मिलने के बाद सदस्यता बहाली के लिए कालका विधानसभा क्षेत्र के विधायक रहे प्रदीप चौधरी विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता से मिले। स्पीकर ने कहा कि वह मामले में कानूनी विशेषज्ञों की राय लेंगे।

Kamlesh BhattMon, 26 Apr 2021 05:26 PM (IST)

जेएनएन, चंडीगढ़। हिमाचल हाई कोर्ट से कालका के निवर्तमान कांग्रेस विधायक प्रदीप चौधरी की सजा पर रोक लगा दी है। प्रदीप चौधरी की सदस्यता हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष रद कर चुके हैं। अब सजा पर रोक के बाद चौधरी की सदस्यता को पुनः बहाल करवाने के लिए सोमवार को विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता से मिले। प्रदीप चौधरी ने स्पीकर को हिमाचल हाई कोर्ट के स्टे आर्डर की कॉपी के साथ सदस्यता बहाल करने का पत्र सौंपा।

कालका विधानसभा से निवर्तमान विधायक प्रदीप चौधरी सोमवार सुबह हरियाणा विधानसभा में हिमाचल हाई कोर्ट के स्टे आर्डर की कॉपी लेकर पहुंचे। उन्होंने आदेश की कॉपी विस अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता को सौंपी। विस अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता ने कहा कि प्रदीप चौधरी ने उनसे मुलाकात कर हिमाचल हाई कोर्ट के स्टे आर्डर की कॉपी सौंपी है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी सदस्यता बहाली को लेकर भी आग्रह किया है। विधानसभा की ओर से कानूनी राय लेने के बाद इस बारे में फैसला लिया जाएगा। कानून के अनुसार जो नियम बनेंगे, उसके अनुसार ही आगामी कार्रवाई होगी।

बता दें कि पिछले सप्ताह हिमाचल हाईकोर्ट ने प्रदीप चौधरी को राहत देते हुए उनकी सजा पर रोक लगा दी थी। स्टे आर्डर की कापी मिलने के बाद प्रदीप चौधरी ने इस विधानसभा सचिवालय में जमा कराया है। गौरतलब है कि 30 जनवरी को हरियाणा विधानसभा स्पीकर ने कालका से कांग्रेस विधायक प्रदीप चौधरी की विधानसभा सदस्यता रद कर दी थी। प्रदीप चौधरी को हिमाचल प्रदेश के बद्दी की निचली अदालत ने एक मामले में सजा सुनाई थी। सजा के बाद विस अध्यक्ष ने कालका विधायक प्रदीप चौधरी को अयोग्य घोषित करते हुए उनकी सदस्यता रद कर दी थी। बाकायदा इसकी सूचना भारतीय चुनाव आयोग को भी भेज दी गई थी।

यह मामला

नालागढ़ की निचली अदालत ने साल 2011 के मामले में प्रदीप चौधरी को दोषी करार दिया है। मामला एक युवक की मौत के बाद बद्दी चौक पर जाम लगाने और सरकारी काम में बाधा उत्पन्न करने से जुड़ा है। नालागढ़ की अदालत ने दोषियों को तीन-तीन साल की सजा और 85-85 हजार रुपये जुर्माना लगाया था। इसी मामले में कालका से कांग्रेस विधायक प्रदीप चौधरी के अलावा पंचकूला जिले के 14 दोषियों को सजा सुनाई गई है। 13 जून 2011 को बद्दी थाने में केस दर्ज हुआ था। 

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