हरियाणा पुलिस भर्ती में अब वैज्ञानिक तरीके से होगी कद और सीने की जांच, बंद होगा ‘खेल’

पुलिस भर्ती परीक्षा में शारीरिक दक्षता नापने के लिए वैज्ञानिक तरीका अपनाना होगा। अभ्यर्थियों को शारीरिक तौर पर योग्य होने के बावजूद विभिन्न कारणों से अयोग्य करार नहीं दिए जा सकेगा। हाई कोर्ट ने इस संबंध में दिशा निर्देश जारी किए हैं।

Kamlesh BhattSat, 30 Oct 2021 05:13 PM (IST)
वैज्ञानिक तरीके से होगी शारीरिक दक्षता की जांच। सांकेतिक फोटो

दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। अगर आप पुलिस भर्ती के लिए शारीरिक तौर पर योग्य हैं तो आपको अब शारीरिक मापदंड में असफल होने का डर नहीं रहेगा। शारीरिक तौर पर योग्य होने के बाबजूद अयोग्य करार दिए जाने की शिकायतों पर पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए वैज्ञानिक तरीके से जांच व कुछ निर्देश जारी किए हैं। अगर हाई कोर्ट के निर्देशानुसार जांच नहीं हुई तो यह हाई कोर्ट की अवमानना मानी जाएगी और संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होगी।

हाई कोर्ट ने कहा है कि पुलिस या किसी अन्य भर्ती में जहां कद या छाती की जांच परंपरागत तरीके से होती है। इस तरह की जांच के खिलाफ हाई कोर्ट में काफी मामले आते हैं। हाई कोर्ट चाहता है कि शारीरिक मापदंड के जांच तरीके पर किसी तरह से सवाल न खड़े हों, इसलिए हाई कोर्ट साेनू कुमार बनाम हरियाणा व एक अन्य मामले रघुबीर बनाम पंजाब मामले में शारीरिक मापदंड के लिए वैज्ञानिक तरीके को अपनाने के सरकार को आदेश दे चुका है, लेकिन अभी भी जांच पुराने तरीके से हाे रही है।

परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में केस आ रहे हैं। इनको रोकना जरूरी है, इसलिए हाई कोर्ट हरियाणा सरकार को आदेश देता है कि राज्य में सभी संभावित भर्तियों के लिए सोनू कुमार बनाम हरियाणा व एक अन्य मामले रघुबीर बनाम पंजाब मामले में शारीरिक मापदंड के लिए वैज्ञानिक तरीके को अपनाने के जो आदेश दिए गए थे, वे तुरंत लागू किए जाएं। अगर ऐसा नहीं होगा यह यह हाई कोर्ट की अवमानना की दायरे में माना जाएगा।

हाई कोर्ट के जस्टिस अरुण मोंगा ने यह आदेश रेवाड़ी निवासी अमन की याचिका का निपटारा करते हुए दिए। महिला याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट को बताया कि उसे 18 अक्टूबर, 2021 की शारीरिक माप परीक्षण रिपोर्ट के अनुसार उन्हें पुलिस कांस्टेबल (महिला) के पद पर चयन के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था। याचिकाकर्ता की ऊंचाई 155.2 सेमी दिखाई गई थी, जबकि शारीरिक स्क्रीनिंग टेस्ट के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊंचाई 156 सेमी है।

याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि विशेषज्ञ डाक्टरों द्वारा 23 अक्टूबर को जारी मेडिकल फिटनेस रिपोर्ट के अनुसार याचिकाकर्ता की वास्तविक ऊंचाई 158 सेंटीमीटर है। इस बाबत उसने कर्मचारी चयन आयोग व सरकार को शिकायत भी दी लेकिन उसकी मांग पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। याचिका पर हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि सरकार शारीरिक माप परीक्षण वैज्ञानिक व हाई कोर्ट द्वारा जारी आदेश के अनुसार क्यों नहीं कर रही। कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि वो दो सप्ताह के भीतर याची महिला की दोबारा शारीरिक माप परीक्षण करे।

ये था हाई कोर्ट का आदेश

साेनू कुमार बनाम हरियाणा व रघुबीर बनाम पंजाब मामले में शारीरिक मापदंड बारे में हाई कोर्ट ने आदेश दिया था। हाई कोर्ट ने कद-काठी और सीना नापने के लिए चिकित्सा उपकरण स्टैडोमीटर अपनाने का आदेश दिया था, क्योंकि इससे वैज्ञानिक तरीके से सही ऊंचाई का पता चलता है। रघुबीर बनाम पंजाब मामले में हाई कोर्ट ने असंतुष्ट उम्मीदवारों को एक महीने के भीतर दोबारा शारीरिक माप परीक्षण के लिए बुलाने का निर्देश दिया था। दूसरी बार में सफल उम्मीदवारों को योग्य मानने के भी सरकार को आदेश दिए थे।

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