कांग्रेस के लिए मुसीबत बनी संयुक्‍त किसान मोर्चा की नई रणनीति, आपातकाल के खिलाफ आंदोलन से बढ़ी रार

संयुक्‍त किसान मोर्चा की नई रणनी‍ति कांग्रेस के लिए घातक साबित हो रही है और हरियाणा में पार्टी के लिए मुश्किल पैदा हो गई है। दरअसलकिसान संगठनाें और कांग्रेस आपातकाल के खिलाफ आंदोलन की घोषणा पर उलझ गए हैं।

Sunil Kumar JhaMon, 14 Jun 2021 05:23 PM (IST)
आपातकाल के विरोध में आंदोलन की घोषणा से कांग्रेस और संयुक्‍त किसान माेर्चा उलझ गए हैं। (फाइल फोटो)

चंडीगढ़, जेएनएन। हरियाणा व दिल्ली की सीमा पर पिछले छह माह से धरना दे रहे संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं की नई रणनीति कांग्रेस के लिए घातक और मुसीबत साबित हो रही है। अब तक राजनीतिक गलियारों में स्पष्ट संदेश रहा है कि किसान जत्थेबंदियों के इस आंदोलन को सबसे अधिक कांग्रेस का समर्थन हासिल है। ऐसा होने के बावजूद संयुक्त किसान मोर्चा ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को तानाशाह शासक बताते हुए 26 जून को इमर्जेंसी (आपातकाल) की वर्षगांठ पर पूरे देश में प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। इसका हरियाणा के कांग्रेस नेताओं ने विरोध किया है।

छह महीने से संयुक्त किसान मोर्चा के आंदोलन का समर्थन कर रही थी कांग्रेस

कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में संयुक्त किसान मोर्चा की इस रणनीति को लेकर खासा आक्रोश है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव और पूर्व मंत्री अशोक अरोड़ा समेत कई नेता इसका खुलकर विरोध कर रहे हैं तो कुछ चुप्पी साधे हुए हैं। कांग्रेस के नेताओं को इंदिरा गांधी के विरोध की रणनीति काफी बेचैन कर रही है।

किसान जत्थेबंदियों के ऐलान से कांग्रेस के दिग्गज असहज, भाजपा ने कहा यह तो होना ही था

मुख्यमंत्री मनोहर लाल समेत भाजपा के कई बड़े नेता खुले तौर पर कह चुके हैं कि किसान संगठनों के आंदोलन को कांग्रेस का समर्थन हासिल है। ऐसे में 26 जून को होने वाले प्रदर्शन को लेकर भी किसान जत्थेबंदियों में दोफाड़ हो गई है। किसान संगठन पहले भी दोफाड़ हो चुके हैं। दिल्ली कूच का मामला हो या फिर सड़कें रोकने की रणनीति, भाजपा की विचारधारा के किसान संगठनों ने अक्सर इसका विरोध किया है। अब ऐसे संगठन इस आंदोलन में अपनी नाममात्र की उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।

 संयुक्त किसान मोर्चा ने इंदिरा गांधी को तानाशाह बता 26 जून को कर दिया प्रदर्शन का ऐलान

किसान संगठनों के इस पूरे आंदोलन को अब भाकियू नेता राकेश टिकैत, गुरनाम सिंह चढूनी और योगेंद्र यादव के राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई से जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे में किसान संगठनों ने जब 26 जून को आपातकाल की वर्षगांठ पर इंदिरा गांधी को तानाशाह बताते हुए अपने आंदोलन की सुई कुछ घुमाने की कोशिश की तो यह वार कांग्रेसियों के सीने पर हथौड़े की तरह लगा।

सेवा का अधिकार आयोग के चेयरमैन की नियुक्ति के लिए आयोजित बैठक में भागीदारी करने चंडीगढ़ पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने तो साफ कह भी दिया कि संयुक्त किसान मोर्चा गैर राजनीतिक मंच है और उसे आंदोलन के जरिये राजनीति करने से बाज आना चाहिए। हालांकि हुड्डा ने यह भी कहा कि हम किसानों की मांगों का समर्थन करते हैं, लेकिन उनके नजदीकी लोगों का कहना है कि हम किसान संगठनों का पूरे जी-जान से समर्थन कर रहे हैं और यह हमारी ही नेता इंदिरा गांधी को तानाशाह बताते हुए बेमतलब लोगों को 45 साल बाद उनकी कथित तानाशाही की याद दिला रहे हैं।

उनका कहना है कि जिस आंदोलन को हर जगह कांग्रेस पार्टी दिल खोल कर भरपूर समर्थन दे रही है, उसी आंदोलन के तहत कांग्रेस और इंदिरा गांधी को तानाशाह बताया जा रहा है। सबको उनकी तानाशाही की याद दिलाने के लिए जान बूझकर 26 जून की तारीख को राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन के लिए चुना गया है। हालांकि कांग्रेस विधायक दल की पूर्व नेता किरण चौधरी ने दावा किया कि 26 जून को कांग्रेस नहीं बल्कि केंद्र सरकार के विरुद्ध प्रदर्शन की रणनीति बनी है, लेकिन भाजपा नेता इससे कहीं भी सहमत नहीं हैं।

भाजपा के प्रदेश महामंत्री चौ. वेदपाल एडवोकेट, प्रांतीय उपाध्यक्ष कविता जैन और भाजपा मीडिया विभाग के संपर्क प्रमुख राजीव जैन ने कहा कि यदि कोई (कांग्रेस) किसी की रात में कांटे बोएगी तो उसकी राह में फूल कैसे खिल सकते हैं। वेदपाल और राजीव जैन ने कहा कि कांग्रेस यदि आंदोलनकारियों को हवा नहीं देती तो यह आंदोलन लंबा नहीं खिंचता। अब उन्हें और उनके नेताओं को ही कठघरे में खड़ा किया जा रहा है तो उन्हें जवाब देना चाहिए कि वह इंदिरा गांधी के साथ हैं या फिर राजनीतिक छतरी के नीचे खड़े किसान संगठनों की पैरवी करते रहेंगे।

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