हरियाणा सरकार की नई पहल, विवादास्पद संपत्ति की अलग से बनेगी श्रेणी, 5554 गांवों की ड्रोन मैपिंग पूरी

हरियाणा में संपत्ति की ड्रोन मैपिंग। सांकेतिक फोटो

हरियाणा में 5554 गांवों की ड्रोन मैपिंग का काम पूरा हो गया है। रेवाड़ी जिले में सभी गांवों में ड्रोन इमेजिंग हो चुकी। राज्य में सरकारी विभागों की परिसंपत्तियों का स्वामित्व भी पंचायतों व जिला परिषदों से अलग किया जाएगा।

Kamlesh BhattFri, 02 Apr 2021 09:48 AM (IST)

जेएनएन, चंडीगढ़। हरियाणा के कुल 7187 गांवों में से 5554 गांवों की ड्रोन मैपिंग का काम पूरा हो गया है। रेवाड़ी जिले में सभी गांवों में ड्रोन इमेजिंग हो चुकी। भिवानी व महेंद्रगढ़ भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। प्रदेश के 11 जिले जल्द ही लाल डोरा मुक्त हो जाएंगे। शेष जिलों को छह महीने में लाल डोरा मुक्त करने का लक्ष्य है।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल की अगुवाई में हरियाणा लार्ज स्केल मैपिंग प्रोजेक्ट व स्वामित्व योजना की समीक्षा बैठक में यह जानकारी सामने आई। वीडियो कान्फ्रेसिंग के जरिये सभी जिलों के उपायुक्त भी इस बैठक से जुड़े। प्रदेश के 345 गांवों को लाल डोरा मुक्त घोषित किया जा चुका है। लाल डोरा क्षेत्रों के लिए 30 मार्च तक कुल 43 हजार 166 टाइटल डीड पंजीकृत हुए हैं। इन संपत्तियों के लेन-देन के लिए अब वेब हेलरिस के माध्यम से पंजीकरण उपलब्ध है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि हर तरह की संपत्ति को आइडी दी जाएगी, चाहे निजी हो या सरकारी। सरकारी विभागों की परिसंपत्तियों का स्वामित्व भी पंचायतों व जिला परिषदों से अलग किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस संपत्ति पर कोई विवाद न हो। सभी विवादास्पद संपत्ति की अलग से श्रेणी बनाई जाएगी। चकबंदी कार्य के लिए अलग से काडर बनाया जाएगा।

जमीन का मूल्यांकन गांव के बजाय एकड़ के हिसाब से करने का निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी परियोजनाओं के लिए स्वेच्छा से भूमि देने वाले लोगों के लिए ई-भूमि पोर्टल शुरू किया गया है। पंचकूला के उपायुक्त को मोरनी ब्लाक में ड्रोन मैपिंग का कार्य एक महीने में पूरा करने के लिए कहा गया है। महकमे को दस और ड्रोन मुहैया कराए जाएंगे ताकि हर जिले में कम से कम एक ड्रोन उपलब्ध हो जाए।

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संपत्ति विवाद के आधे मामले सुलझे

जमीन पर स्वामित्व को लेकर विवादों के निपटान के लिए एनआइसी द्वारा शिकायत निवारण पोर्टल बनाया गया है। अब तक 5318 विवाद पंजीकृत हुए हैं जिनमें से 2760 का निपटान किया जा चुका है। नए डीड अप्वाइंटमेंट एवं रजिस्ट्रेशन सिस्टम में अप्वाइंटमेंट की बुङ्क्षकग और डीड रजिस्ट्रेशन के लिए आधार नंबर अनिवार्य किया गया है। अनिवासी भारतीयों (एनआरआइ) के पास आधार नंबर नहीं होने के कारण उनके लिए पासपोर्ट नंबर अनिवार्य किया गया है। अगर विक्रेता एनआरआइ है तो अप्वाइंटमेंट बुकिंग के दौरान सिस्टम द्वारा उसका पासपोर्ट नंबर पूछा जाएगा।

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