गुरुग्राम, फरीदाबाद सहित हरियाणा में छोटे उद्योगों पर मेहरबान सरकार, MSME पार्क बनाने की योजना

हरियाणा सरकार एमएसएमई को बढ़ावा देने की योजना पर काम कर रही है। राज्य में प्रमुख वस्तुओं के उत्पादन के हिसाब से ब्लाक स्तर पर एमएसएमई पार्क बनाए जाएंगे। यहां तैयार उत्पाद देश में बिक्री के साथ ही विदेश में निर्यात होंगे।

Kamlesh BhattTue, 09 Nov 2021 04:01 PM (IST)
हरियाणा में ब्लाक स्तर पर बनेंगे एमएसएमई पार्क। सांकेतिक फोटो

अनुराग अग्रवाल, चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने मध्यम, लघु और सूक्ष्म (MSME) श्रेणी के उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष योजना तैयार की है। छोटे उद्योगों में उत्पादन, रोजगार और लाभ बढ़ाने की मंशा ने प्रदेश सरकार ब्लाक स्तर पर MSME पार्क बनाने जा रही है। उन छोटे व मध्यम श्रेणी के उद्योगों को सरकार ने हरसंभव मदद करने का फैसला किया है, जो हरियाणा की पहचान हॉैं तथा उन्हें पैक कर निर्यात भी किया जा सकेगा।

उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री के नाते हरियाणा के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने यह योजना तैयार की है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इसे मंजूरी प्रदान कर दी। प्रदेश के हर जिले में कोई न कोई उत्पाद ऐसा होता है, जिसकी मांग और पहचान दोनों हैं। उदाहरण के लिए अंबाला के प्याज, भिवानी, फतेहाबाद व महेंद्रगढ़ में मौसमी, नींबू व संतरा, दादरी, रोहतक व फरीदाबाद में खीरा, ककड़ी, खरबूजा, कद्दू और तरबूत, गुरुग्राम में आंवला, झज्जर में अमरूद, जींद में पोल्टरी फार्म, करनाल में हरी पत्तेदार सब्जियां, कुरुक्षेत्र में आलू, नूंह व पलवल में टमाटर, हिसार व कैथल में दूध उत्पाद, पानीपत में गाजर, रेवाड़ी में सरसों, सिरसा में कीन्नू, सोनीपत में मटर, यमुनानगर में आम और पंचकूला में अदरक मशहूर हैं।

इसके अलावा करनाल की मछली, हांसी के पेड़े और अंबाला के छोले चावल की भी पहचान है। बहुत से उत्पाद ऐसे हैं, जो स्वयं सहायता समूह तैयार करते हैं। इनमें शहद, अचार, दरियां, कपड़े और साबुन-तेल व सेनेटाइजर तक शामिल हैं। प्रदेश सरकार ने फैसला लिया है कि इन सभी उत्पादों को लेकर छोटी औद्योगिक इकाइयां लगती हैं तो उन्हें पूरा सहयोग किया जाएगा। इसका यह फायदा होगा कि हरियाणा में तैयार होने वाले उत्पादों को नेशनल व इंटरनेशनल बाजार मिलेगा। छोटी इकाइयों का लाभ बढ़ेगा और प्रदेश के युवाओं के रोजगार में बढ़ोतरी हो सकेगी।

MSME पार्क स्थापित करने के पीछे सरकार की मंशा यह है कि एक स्थान पर सभी छोटी इकाइयों को इकट्ठा कर उन्हें अधिक सहूलियत देते हुए कम खर्च में ज्यादा उत्पादन के लिए प्रेरित किया जा सके। हरियाणा में इस समय 9.70 लाख एमएसएमइ हैं और इसके जरिए करीब 20 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है। दुष्यंत चौटाला के अनुसार MSME को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने विश्व स्तरीय ऐसी व्यवस्था स्थापित की है कि 15 दिन में एमएसएमइ को उद्योग शुरू करने की मंजूरी दी जा सके।

प्रदेश सरकार ने एमएसएमइ सेक्टर के लिए पहले से डबल बजट आवंटित किया है। इससे राज्य के सभी जिलों में कलस्टर स्थापित करने की योजना को गति मिलेगी। दो करोड़ रुपये तक के मिनी कलस्टर उद्योगों को स्थापित करने में सरकार 90 प्रतिशत सहायता राशि देगी। हरियाणा ग्रामीण औद्योगिक विकास योजना के तहत सरकार गांवों में ज्यादा से ज्यादा उद्योग लाने का प्रयास कर रही है। छोटे उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए पिछले दिनों चंडीगढ़ पहुंचे अफ्रीका के 14 देशों के साथ सरकार ने वार्ता भी की है।

आंकड़ों में हरियाणा के उद्योग

सात साल में 33 हजार 799 करोड़ रुपये के निवेश से 62 हजार 60 उद्योग लगे, जिनसे 5.86 लाख लोगों को रोजगार मिले आज तक कुल 495 ओमओयू हुए, 6.66 लाख करोड़ का निवेश आया और 9 लाख लोगों को रोजगार मिले 31 खंड में सीएलयू और एनओसी की जरूरत नहीं 20 विभागों की 70 प्रकार की अनुमति पोर्टल के माध्यम से एक ही छत के नीचे

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