फूट की शिकार हुई सरकार संग हरियाणा रोडवेज कर्मचारी यूनियनों की बैठक, अधिकतर मांगें खारिज

हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों यूनियनों की सरकार से वार्ता सिरे नहीं चढ़ पाई। अधिकारियों से तीखी बहस के बाद एससी इंप्लाइज संघर्ष समिति ने बैठक का बायकाट किया जबकि पांच यूनियनों ने बीच में ही बैठक छोड़ दी ।

Kamlesh BhattMon, 22 Nov 2021 07:35 PM (IST)
हरियाणा रोडवेज कर्मचारी यूनियनों की फूट से बैठक विफल। सांकेतिक फोटो

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। विभिन्न मुद्दों को लेकर हरियाणा सरकार के साथ बैठक में रोडवेज कर्मचारी यूनियनों की फूट खुलकर सामने आई। अनुसूचित जाति के कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण को लेकर अधिकारियों से तीखी बहस के बाद एससी इंप्लाइज संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने बैठक का बायकाट कर दिया।

महासंघ से जुड़ी हरियाणा रोडवेज कर्मचारी यूनियन, आल हरियाणा वर्कर यूनियन और आल हरियाणा मिनिस्ट्रियल स्टाफ यूनियन सहित पांच यूनियन पदाधिकारी तालमेल कमेटी का हवाला देते हुए अलग से मीटिंग बुलाने की मांग करते हुए बैठक छोड़ गईं। नतीजतन अधिकतर मांगों पर कर्मचारी यूनियनों को सरकार से न सुनने को ही मिली।

परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा के साथ वार्ता के लिए सोमवार को हरियाणा निवास में 13 यूनियनों के दो-दो पदाधिकारियों को बुलाया गया था, लेकिन हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन का कोई पदाधिकारी बैठक में नहीं पहुंचा। आधा दर्जन यूनियनें बैठक बीच में ही छाेड़ गईं। एससी इंप्लाइज संघर्ष समिति के प्रधान मनोज चहल ने कहा कि बैठक में अधिकारियों ने उन्हें अपनी बात नहीं कहने दी।

उन्होंने आरोप लगाया कि जाति विशेष को लेकर अधिकारी ने गलत टिप्पणी की है। इसको लेकर वह पुलिस में शिकायत दर्ज कराएंगे। इसी तरह आल हरियाणा वर्कर यूनियन के अध्यक्ष विनोद शर्मा ने कहा कि हमने पांच यूनियनों का संयुक्त मांगपत्र बनाने का निर्णय लिया है जिसे अलग से सरकार के समक्ष रखा जाएगा। परिवहन विभाग की प्रधान सचिव कला रामचंद्रन व महानिदेशक वीरेंद्र दहिया के साथ कर्मचारी नेताओं की बहस से खिन्न परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा ने कहा कि वे अलग-अलग यूनियन न बनाकर एक ही यूनियन बनाएं। चुनाव कराकर पदाधिकारी चुने जाएं। यह यूनियन जाति, समुदाय व धर्म के आधार पर नहीं होनी चाहिए। इस पर कई कर्मचारी यूनियनों के पदाधिकारियों ने यूनियन के चुनाव करवाने के सुझाव पर सहमति जताई।

परिवहन मंत्री ने कहा कि हाल ही में 809 रोडवेज बसों की खरीद की गई है तथा जल्द ही 500 और नई बसें खरीदी जाएंगी। सभी कर्मचारियों को पिछले वर्षों का बोनस दिया जाएगा। वर्दी की मांग को भी पूरा करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। पिछले दिनों ढाई हजार से अधिक कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ दिया जा चुका है। महकमे में भ्रष्टाचार को खत्म करने की पूरी कोशिश की जा रही है।

पक्के नहीं होंगे अनुबंध पर लगे 300 चालक, न परिचालकों को ग्रेड-पे

हरियाणा रोडवेज संयुक्त कर्मचारी संघ के राज्य प्रधान दलबीर किरमारा ने बैठक में वर्ष 2016 में अनुबंध पर लगे 300 चालकों को पक्का करने की मांग की, लेकिन परिवहन निदेशक ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। परिचालकों को ग्रेड-पे देने की मांग पर भी जवाब न में मिला। बोनस की मांग को मुख्यमंत्री का अधिकार क्षेत्र होने की बात कह इसे टाल दिया गया। हालांकि परिवहन निदेशक ने कहा कि वह कर्मचारी यूनियनों की मुख्यमंत्री के साथ बैठक कराने का प्रयास करेंगे। एसीपी (एश्योर्ड करियर प्रमोशन) में देरी के जिम्मेदार लोगों की पहचान करने के लिए कमेटी बनाई जाएगी, ताकि दोषियों पर कार्रवाई हो सके।

जाति आधार पर नहीं होनी चाहिए यूनियन : मूलचंद शर्मा

परिवहन मंत्री मूलचंद शर्मा का कहना है कि रोडवेज के अंदर जाति के आधार पर यूनियन नहीं होनी चाहिए। रोडवेज में इतनी अधिक यूनियनें हैं कि उनकी जायज मांगें भी सही ढंग से सामने नहीं आ पाती। हमने सुझाव दिया है कि आगामी मार्च-अप्रैल में चुनाव कराकर अपने प्रतिनिधि चुनें और एक यूनियन तले ही मांगें उठाई जाएं। रोडवेज कर्मचारियों का अब कोई मुद्दा नहीं है। हमारी सरकार ने अब तक की सबसे ज्यादा 2560 प्रमोशन की हैं। मेरे आने के बाद 1550 प्रमोशन दो साल में हुई हैं। इतनी बड़ी प्रमोशन 40 साल में कभी नहीं हुई। साथ ही हमने बसों में ई-टिकटिंग शुरू की। इससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा। परिवहन विभाग के बेड़े में नई बसें आ गई हैं। इन नई बसों के आने से महकमे के निजीकरण की बात भी हमने खत्म कर दी है। कुछ छोटे-छोटे मुद्दे हैं, जिन पर चर्चा की जानी बाकी है। कुछ मामले सीएम के स्तर के हैं, जिनका समाधान मुख्यमंत्री करेंगे।

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