Ellenabad By Election: अभय चौटाला से भिड़ने को जजपा- भाजपा का नया दांव, चौंका देगी नई रणनीति

Ellenabad By Election ऐलनाबाद सीट के उपचुनाव के लिए इनेलो ने अभय चौटाला को अपना उम्‍मीदवार घोषित कर दिया है लेकिन अभी भाजपा-जजपा और कांग्रेस के प्रत्‍याशियों का इंतजार है। दोनों खेमा मजबूत उम्‍मीदवार की तलाश में हैं। अब जजपा-भाजपा ने नई रणनीति तैयार की है।

Sunil Kumar JhaTue, 05 Oct 2021 08:56 AM (IST)
उपमुख्‍यमंत्री दुष्‍यंत चौटाला, सीएम मनोहरलाल और इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला। (फाइल फाेटो)

चंडीगढ़, [अनुराग अग्रवाल]। Ellenabad By Election: हरियाणा के सिरसा जिले की ऐलनाबाद विधानसभा सीट पर उपचुनाव में इंडियन नेशनल लोकदल के उम्‍मीदवार अभय सिंह चौटाला की मजबूत घेराबंदी की तैयारी है। जननायक जनता पार्टी (JJP) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) गठबंधन ने इसके लिए खास नई रणनीति तैयार की है। नई रणनीति सबको चौंका देगी। गठबंधन की रणनी‍ति है कि उपचुनाव में उम्‍मीदवार ताे जजपा का हो, लेकिन वह भाजपा के टिकट पर मैदान में उतरे। दूसरी ओर कांग्रेस भी मजबूत प्रत्‍याशी की तलाश में जुटी हुई है। ऐसे में माना जा रहा है कि यह उपचुनाव बेहद रोचक होगा।

दरअसल उम्मीदवारों को लेकर राजनीतिक दलों में पेंच फंसा हुआ है। इनेलो के प्रधान महासचिव अभय सिंह चौटाला ऐसे उम्मीदवार हैं, जिनके नाम की घोषणा सबसे पहले हुई है। कांग्रेस और भाजपा-जजपा गठबंधन को अपनी पार्टियों के ऐसे उम्मीदवारों की तलाश है, जो अभय सिंह चौटाला को शिकस्त दे सके। इसके लिए पिछले कई दिनों से पार्टियों में मंथन चल रहा है। भाजपा व जजपा गठबंधन को जहां कांग्रेस का उम्मीदवार घोषित होने का इंतजार है, वहीं कांग्रेस समय से पहले अपने पत्ते नहीं खोलना चाह रही है।

 ऐलनाबाद के रण में उम्मीदवारों को लेकर राजनीतिक दलों में फंस रहा पेंच

ऐलनाबाद उपचुनाव के लिए आठ अक्टूबर को नामांकन भरने का आखिरी दिन है। यहां 30 अक्टूबर को मतदान है और दो नवंबर को यानी दीपावली से पहले चुनाव नतीजे आ जाएंगे। तीन कृषि कानूनों का विरोध करते हुए अभय सिंह चौटाला ने ऐलनाबाद सीट से इस्तीफा दे दिया था। अभी तक हालांकि तीन कृषि कानून वापस नहीं हुए, ऐसे में कांग्रेस व गठबंधन के नेता अभय सिंह चौटाला के चुनाव लड़ने पर सवाल उठा रहे हैं। अभय सिंह की दलील है कि उन्होंने लोगों की आवाज पर इस्तीफा दिया और उन्हीं के कहने पर दोबारा चुनाव लड़ रहे हैं।

 कार्यकर्ताओं में अपनी साख बनाए रखने के लिए जजपा ने उछाला नया फार्मूला

ऐलनाबाद से ताऊ देवीलाल और ओमप्रकाश चौटाला चुनाव लड़ते रहे हैं। भाजपा-जजपा गठबंधन मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। गठबंधन व कांग्रेस को ऐसे उम्मीदवार की तलाश है, जो सीधे तौर पर अभय सिंह चौटाला से हर तरह टक्कर ले सके। इनेलो प्रमुख ओमप्रकाश चौटाला भी सजा पूरी कर बाहर आ चुके हैं। लोगों की सहानुभूति और समर्थन उनके के साथ है।

जजपा संयोजक के नाते अजय सिंह चौटाला और दुष्यंत चौटाला द्वारा ऐलनाबाद सीट पर अपनी दावेदारी छोड़ देने के बाद भाजपा ने यहां गठबंधन का उम्मीदवार उतारने की रणनीति बनाई है। भाजपा की सूची में हलोपा विधायक गोपाल कांडा के भाई गोबिंद कांडा दावेदारों की सूची में सबसे ऊपर हैं। दूसरा नंबर निताशा सिहाग और फिर आदित्य देवीलाल चौटाला का आता है।

टिकट भाजपा का और उम्मीदवार जजपा का, उम्मीदवार के नाम पर नहीं सहमति

जजपा के रणनीतिकारों द्वारा बदली परिस्थितियों में भाजपा के सामने यह पेशकश किए जाने की सूचना है कि सिंबल कमल का फूल हो और प्रत्याशी चाबी वाली पार्टी का दे दिया जाए। इसके लिए एक बार फिर गांव तरकांवाली के मीनू बैनीवाल का नाम तेजी से चल पड़ा है। मीनू बैनीवाल संगठन और सरकार दोनों के आदमी हैं और उन्हें चुनाव लड़ना व लड़वाना दोनों आता है। भाजपा के एक बड़े वर्ग को मीनू बैनीवाल के नाम पर ऐतराज है। इसलिए जजपा की यह रणनीति कामयाब होती दिखाई नहीं दे रही है।

भाजपा हाईकमान को यदि गोबिंद कांडा और मीनू बैनीवाल के नाम पसंद नहीं आए तो जजपा ऐन वक्त पर इनसो अध्यक्ष दिग्विजय चौटाला के नाम को भी पोटली से बाहर निकालकर सभी को चौंका सकती है। प्रांतीय चुनाव समिति की बैठक में बीरेंद्र सिंह ने तो यहां तक सुझाव दिया है कि भाजपा को ऐसे कंडीडेट की जरूरत है, जो सीधे देवीलाल और चौटाला परिवार से टक्कर लेने का दम रखता हो। इसके लिए भाजपा व जजपा के साथ बाहर से भी कई नामों पर चर्चा चल रही है।

कांग्रेस की चिंता भी विचार करने के लायक

कांग्रेस की अगर बात करें तो पवन बैनीवाल और भरत बैनीवाल के बीच किसी एक नाम पर सहमति बनाने के पूरे प्रयास चल रहे हैं। दोनों चाचा भतीजा हैं और दोनों दो-दो चुनाव लड़ चुके हैं। पवन बैनीवाल भाजपा और भरत बैनीवाल कांग्रेस के उम्मीदवार रहे हैं। अभय सिंह चौटाला विधानसभा में पवन बैनीवाल के विरुद्ध कई बार अहम मसले उठा चुके हैं। तब सरकार ने उनकी मांग पर कोई गौर नहीं किया था, लेकिन यदि पवन बैनीवाल को कांग्रेस का उम्मीदवार बनाया जाता है तो उनकी कई पुरानी फाइलें खुलने के आसार पैदा हो सकते हैं। देवीलाल के भाई साहब राम के बेटे अमरजीत सिंह और डा. केवी सिंह भी टिकट की दौड़ में हैं। उम्मीद की जा रही है कि सात अक्टूबर तक ही गठबंधन और कांग्रेस अपने उम्मीदवार घोषित करेंगे।

 

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