हरियाणा सरकार का बड़ा कदम, डीएपी व उर्वरकों की कालाबाजारी व जमाखोरी रोकने के लिए गठित होंगे उड़नदस्ते

हरियाणा के सीएम मनोहर लाल ने राज्य में डीएपी खाद व अन्य ऊर्वरकों की कालाबाजारी व जमाखोरी रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। सीएम मनोहर लाल ने अफसरों को विशेष दस्ते गठित करने को कहा है।

Kamlesh BhattSun, 24 Oct 2021 05:37 PM (IST)
हरियाणा के सीएम मनोहर लाल की फाइल फोटो।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सभी जिला उपायुक्तों, एसपी व सीपी को निर्देश दिए हैं कि डीएपी खाद की कालाबाजारी को रोकने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाएं। डीएपी खाद पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने चंडीगढ़ में उच्चस्तरीय बैठक में इसकी समीक्षा की। बैठक में कृषि विभाग, पुलिस विभाग व अन्य आला अधिकारी शामिल हुए। सीएम ने कहा कि डीएपी और अन्य उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और तस्करी को रोकने के लिए तुरंत उड़नदस्ते गठित करें। 

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि खाद की तस्करी को रोकने के लिए अंतरराज्यीय सीमाओं पर तुरंत नाके लगाए जाएं। कहा कि पिछले साल से 11 हजार मिट्रिक टन अधिक डीएपी बाजार में उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि केमिकल और फर्टिलाइजर मंत्री मनसुख मांडविया से फोन पर बातचीत कर 6 अतिरिक्त रैक बढ़ाने पर ले ली गई है। प्रदेश के लिए 24 रैक उपलब्ध हैं। 5 रैक और आएंगे। 6 अतिरिक्त रैक पर सहमति के बाद अनुसार 31 अक्टूबर तक 11 रैक और उपलब्ध होंगे। उन्होंने किसानों को भी धैर्य रखने की सलाह दी।

वहीं, हरियाणा में पिछले दिनों बेमौसमी बारिश से फसलों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए गिरदावरी का काम रफ्तार पकड़ गया है। प्रदेश में कुल 7059 गांव हैं जिनमें से 6496 में गिरदावरी का काम शुरू हो चुका है। बाकी गांवों में भी अगले एक सप्ताह में गिरदावरी का काम पूरा करने का लक्ष्य है। इसके बाद नुकसान के आकलन के आधार पर किसानों को मुआवजा दिया जाएगा।

हरियाणा में 13.64 लाख हेक्टेयर में धान, 6.95 लाख हेक्टेयर में कपास, 3.95 लाख हेक्टेयर में बाजरा, दस हजार हेक्टेयर में मक्का और 18 हजार हेक्टेयर में ज्वार बोई गई है। इसी तरह 1.12 लाख हेक्टेयर में गन्ना, 1.07 लाख हेक्टेयर में ग्वार और 1.01 लाख हेक्टेयर में दालें बोई गई हैं। पहले सितंबर और फिर अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में हुई बेमौसमी बारिश से खेतों में खड़ी फसलाें को भारी नुकसान हुआ है।

राेहतक, भिवानी, फतेहाबाद, सिरसा, रेवाड़ी सहित विभिन्न क्षेत्रों के कई गांव ऐसे हैं जहां सुंडी से कपास की पूरी फसल बर्बाद हो गई। इसी तरह प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर हुए जलभराव से धान और बाजरा सहित दूसरी फसलें 50 फीसद तक चौपट हो गईं। करीब 60 हजार किसानों ने फसल में नुकसान का हवाला देते हुए सरकार से मुआवजा मांगा है। विभिन्न स्थानों पर हाल ही में बारिश से जलभराव के चलते गेहूं और सरसों की बिजाई का काम भी प्रभावित हुआ है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने किसानों को नुकसान की भरपाई के लिए राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग को विशेष गिरदावरी के निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के दायरे में आने वाले किसानों को नुकसान की क्षतिपूर्ति कराई जाएगी, जबकि जिन किसानों ने फसल का बीमा नहीं कराया है, उनको सरकार मुआवजा देगी।

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