आइएएस रानी नागर मतलब विवादों की रानी, पढ़ें हरियाणा की सत्ता के गलियारे की और भी रोचक खबरें

आइएएस रानी नागर की फाइल फोटो ।

हरियाणा की महिला आइएएस अफसर एक बार फिर चर्चाओं में हैं। इस बार भी सरकारी आवास न मिलने के कारण वह चर्चाओं में हैं। आइए हरियाणा के साप्ताहिक कालम सत्ता के गलियारे से में कुछ ऐसी खबरों पर नजर डालते हैं।

Kamlesh BhattMon, 08 Feb 2021 10:25 AM (IST)

चंडीगढ़। हरियाणा की युवा आइएएस रानी नगर विवादों की रानी बनती जा रही हैं। गाहे-बगाहे कोई न कोई विवाद उनसे जुड़ ही जाता है। चंडीगढ़ स्थित यूटी गेस्ट हाउस में लंबे समय तक रहने को मजबूर हुई रानी नागर पिछले साल लाकडाउन के दौरान वापस गाजियाबाद लौट गईं थी। तकरार बढ़ी तो उन्होंने आइएएस पद से इस्तीफा भी भेज दिया, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे मुद्दा बनाया तो सरकार ने उनका इस्तीफा ठंडे बस्ते में डाल दिया। तीन महीने पहले उन्हेंं नियुक्ति भी दे दी गई, लेकिन सरकारी मकान फिर भी नहीं मिला। रानी ने फिर से सरकारी आवास न मिलने को मुद्दा बनाया है, जिसे कांग्रेस ने लपक लिया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला और पूर्व मंत्री गीता भुक्कल जवाब मांग रहे कि महिला आइएएस को क्यों प्रताड़ित किया जा रहा है। सरकार का यह रवैया पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के प्रति संवेदनहीनता दर्शाता है।

भव्य होगा भव्य का सगाई समारोह

सियासी गलियारों में इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला के पौत्र की शादी के बाद अब पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय भजनलाल के पौत्र की शादी की चर्चाएं जोरों पर हैं। आदमपुर से कांग्रेस विधायक कुलदीप बिश्नोई के बेटे भव्य दांपत्य सूत्र बंधन में बंधने वाले हैं। जाहिर है शादी भी भव्य होगी। इसी कड़ी में इंटरनेट मीडिया पर भावी दंपती की कुछ तस्वीरें जमकर वायरल हो रही हैं। भव्य अगले महीने माडल मेहरीन कौर के साथ जयपुर के पास स्थित अलीला फोर्ट में सगाई करेंगे। दोनों की सगाई का कार्ड भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मेहरीन कौर पंजाब के बठिंडा से ताल्लुक रखती हैं, जो विधिवत बिश्नोई समाज का हिस्सा बन चुकी हैं। जिस अलीला फोर्ट में सगाई समारोह होना है, वह जयपुर से करीब एक घंटे की दूरी पर है। बिशनगढ़ किले का करीब 230 साल पुराना इतिहास है। आठ मंजिला यह किला देखने में भी काफी खूबसूरत है।

भाई के कारनामे में बदनाम हुए विधायक

एक विधायक के भाई पर अवैध कालोनी विकसित किए जाने के आरोप में मुकदमा दर्ज हुआ तो चंडीगढ़ तक इसकी चर्चा हुई। कांग्रेस के नेताओं ने बरोदा के पूर्व विधायक स्वर्गीय श्रीकृष्ण हुड्डा के भतीजे वाले मामले को याद किया। इसमें विधायक के भतीजे चंडीगढ़ एमएलए हास्टल से मादक पदार्थों के साथ गिरफ्तार हुए थे। चंडीगढ़ में जब विधानसभा की कमेटी की बैठकें चल रही थीं तो कांग्रेस विधायक यही तर्क दे रहे थे कि इसमें विधायक का क्या दोष? गलत काम यदि परिवार का कोई व्यक्ति करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई हो। इसमें विधायक का मीडिया ट्रायल गलत है। तभी समिति की बैठक में हिस्सा लेने सेवानिवृति के करीब अतिरिक्त मुख्य सचिव ने कहा कि मीडिया ट्रायल इसलिए है कि विधायक के भाई तब गलत नहीं करते जब उनके भाई विधायक नहीं होते। सत्ता की बात ही कुछ और है। चलो छोड़ो, चुनाव खर्चीले होंगे तो ऐसा होगा।

बिना संगठन ब्लाक स्तर पर कैसे देंगे समर्थन

कांग्रेस ने निर्णय लिया है कि हरियाणा भर में कांग्रेस कार्यकर्ता ब्लाक स्तर पर किसान आंदोलन का समर्थन करें। दिल्ली में बैठकर कांग्रेस के दिग्गजों ने विधायकों व पूर्व विधायकों सहित पार्टी टिकट पर चुनाव लड़े नेताओं के बीच यह निर्णय ले लिया मगर यह नहीं सोचा कि जिस ब्लाक में पार्टी संगठन पिछले सात साल से नहीं है, वहां ब्लाक स्तर पर कौन कार्यकर्ता किसान आंदोलन का साथ देंगे। किसान आंदोलन के नाम पर वहां स्थानीय निकाय चुनाव में कांग्रेस की टिकट मांगने वाले नेताओं की फौज होगी। कांग्रेस के इस निर्णय पर भाजपा के नेता अब यह भी कह रहे हैं कि सात साल में ब्लाक स्तर पर संगठन बनाने में असफल रही पार्टी को संभवतया किसान आंदोलन में संगठन ही मिल जाए। कांग्रेस के दिग्गज अपनी हार के बाद आपस में इसलिए भी उलझ जाते थे कि पार्टी का जिला व ब्लाक स्तर पर संगठन नहीं है। प्रस्तुति - सुधीर तंवर 

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