हरियाणा की मंडियों में आज व कल खरीद बंद, मंडियों में पहुंचा रिकार्ड गेहूं, सरकार का पहले उठान पर जोर

हरियाणा में शनिवार व रविवार को नहीं होगी गेहूं खरीद। सांकेतिक फोटो

Wheat procurement stop in Haryana हरियाणा में आज व कल यानि शनिवार व रविवार को गेहूं खरीद बंद रहेगी। दरअसल मंडियों में रिकार्ड गेहूं पहुंचा है। दो दिन इसका उठान किया जाएगा। सोमवार से फिर गेहूं की खरीद प्रक्रिया सुचारू रूप से शुरू हो जाएगी।

Kamlesh BhattFri, 16 Apr 2021 06:06 PM (IST)

जेएनएन, चंडीगढ़। Wheat procurement in Haryana: हरियाणा की मंडियों में गेहूं की आवक ज्यादा होने की वजह से सरकार ने दो दिन शनिवार और रविवार को खरीद नहीं करने का फैसला किया है। इन दोनों दिनों में खरीदी गई गेहूं का उठान कर नई खरीद के लिए मंडियों को खाली किया जाएगा। सोमवार से पूर्व की भांति राज्य में गेहूं की खरीद का काम सुचारू किया जाएगा।

हरियाणा की बात कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि राज्य में 80 लाख मीट्रिक टन गेहूं मंडियों में आना है। 60 फीसद गेहूं आ चुका है। उसके उठान के लिए जिला उपायुक्तों को आदेश दिए गए हैं। अब बारिश का मौसम है। इसलिए अनाज का नुकसान हो सकता है। जिन मंडियों में ज्यादा अनाज आ गया है, वहां किसान दो दिन अनाज लाने की स्पीड कम कर लें। राज्य में बारदाने की कहीं कोई कमी नहीं है। उपायुक्तों को गेहूं उठान के लिए इंतजाम करने को विशेष अधिकार दिए गए हैं।

बता दें, हरियाणा में एक अप्रैल से अभी तक मंडियों में करीब 50 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक हो चुकी है। मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अपनी फसल बेचने वाले किसानों को सीधे उनके खातों में 873 करोड़ 27 लाख रुपये का भुगतान हो चुका है। हरियाणा में ऐसा पहली बार हो रहा कि किसानों के खाते में सीधे फसल का भुगतान डाला जा रहा है।

पहले आढ़तियों के माध्यम से यह भुगतान होता था। यानी किसान के फसल बेचने के बाद जो भी भुगतान बनता था, उसे पहले आढ़ती के खाते में भेजा जाता था। फिर आढ़ती संबंधित किसान से अपने पुराने लेनदेन (यदि कोई है तो) का हिसाब करता था। किसान की सहमति से अपने हिसाब का पैसा काटकर आढ़ती बाकी पैसा किसानों के खाते में भेजता था।

केंद्र सरकार की योजना को हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इस बार सख्ती के साथ लागू किया है। पहले दो बार भी ऐसा प्रयास हुआ, लेकिन आढ़तियों के विरोध के चलते सीधे किसानों को पेमेंट नहीं मिल सकी। इस बार सरकार ने सीधे किसानों को ही पेमेंट देने का पक्का इरादा कर रखा था, जिसका नतीजा यह हुआ कि बीच से आढ़तियों का रोल पेमेंट के मामले में कम हो गया है।

हरियाणा में शुक्रवार को करीब दो लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक हुई है। राज्य में अभी तक 49 लाख 86 लाख मीट्रिक टन गेहूं आई, जिसमें से 41 लाख 35 हजार मीट्रिक टन गेहूं सरकारी एजेंसियों ने एमएसपी पर खरीदी है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के निर्देश के बाद राज्य की सभी 396 मंडियों में अधिकारियों को पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है, ताकि कहीं भी किसानों को अपनी फसल बेचने में दिक्कतें न आएं।

किसानों को इस बार सरसों के रेट एमएसपी से ज्यादा मिल रहे हैं। लिहाजा, वह अपनी सरसों की फसल मंडियों की बजाय प्राइवेट सेक्टर में बेच रहे हैं। मुख्यमंत्री का कहना है कि यह अच्छी बात है। यदि किसानों को प्राइवेट सेक्टर में अपनी फसल के कम रेट मिलते हैं तो सरकार एमएसपी पर उसकी खरीद के लिए तैयार है। ज्यादा रेट मिलने पर सरकार कहीं भी अपनी फसल बेचने के लिए स्वतंत्र है। 

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