सत्ता के गलियारे से: अभी कम नहीं हुआ अनिल विज का तनाव, पढ़ें हरियाणा राजनीति की और भी खबरें

हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज को ढीली कार्यप्रणाली वाले अफसर कतई पसंद नहीं आते। वह ऐसे अफसरों के खिलाफ मोर्चा खोल देते हैं। आइए हरियाणा के साप्ताहिक कालम सत्ता के गलियारे से में कुछ ऐसी ही राजनीतिक खबरों पर नजर डालते हैं।

Kamlesh BhattMon, 21 Jun 2021 03:23 PM (IST)
हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज की फाइल फोटो।

नई दिल्ली [बिजेंद्र बंसल]। हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज एक बार फिर चर्चाओं में हैं। विज की मनोदशा पढ़ने वाले बताते हैं कि वे ईमानदार सत्ता के नजदीक एकत्र भ्रष्ट तंत्र को प्रभावी होता नहीं देख सकते। वे तनाव में आ जाते हैं। तनाव भी इस कदर है कि उनकी शुगर (मधुमेह) का स्तर भी बढ़ गया है। स्थिति सामान्य बनाने के लिए वे पिछले सप्ताह में दो दिन दिल्ली में रहे। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से भी मिले। भ्रष्ट तंत्र में शामिल लोगों का काला चिट्ठा भी शीर्ष नेतृत्व को पकड़ा दिया है। अभी विज की परेशानी का हल नहीं हुआ है। आने वाले दिनों में वे एक बार फिर दिल्ली आ सकते हैं, लेकिन सत्ता के गलियारों में यह चर्चा जरूर है कि जो मुद्दा विज उठा रहे हैं, उसकी अनदेखी नहीं करनी चाहिए, क्योंकि जब ईमानदार सत्ता संकट में आती है तो विज उस समय संकटमोचक की स्थिति में होते हैं।

बड़े पंडितजी का अशीर्वाद मुखियाजी के साथ

पिछले 22 दिन से राष्ट्रीय राजधानी में हरियाणा की सियासी चर्चाओं को लेकर पूरा शोर रहा। सूबे में सत्तारूढ़ दल और सरकार को लेकर जब भी दिल्ली दरबार में कोई हलचल होती है तो सबकी नजर बड़े पंडितजी पर टिक जाती हैं। अब बड़े पंडितजी कह दिया तो समझ लो कि बात पूर्व शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा की हो रही है। इतिहास गवाह है कि जब भी सरकार को लेकर कोई उठापठक होती है तो पंडित जी की भूमिका विशेष होती है। सही बात तो यह है कि पंडितजी पार्टी के साथ जनहित में सोचते हैं। इसके लिए चाहे उन्हें किसी हद तक गुजरना पड़े, वे पीछे नहीं हटते। गरम हुई सियासी चर्चाओं के बीच जब पंडितजी ने दिल्ली आकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल का शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया। अब सब समझ गए कि इन चर्चाओं का कोई मतलब नहीं है। क्योंकि बड़े पंडितजी का पूरा आशीर्वाद मुखियाजी के साथ है।

सीएमओ पर कौन लिखेगा किताब

दिल्ली में हरियाणा की सियासी सरगर्मियां रहीं तो मुख्यमंत्री कार्यालय (सीएमओ) में कार्यरत अधिकारियों और राजनीतिज्ञों की साहित्यक छवि का संदर्भ भी चर्चा का विषय बना। राजनीतिक लोग इस संदर्भ पर चर्चा करें तो ऐसा हो नहीं सकता कि पूर्व प्रधानमंत्री डाक्टर मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू की किताब "द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर' का जिक्र न हो। इसका आधार यह था कि अब सूबे की सरकार का कार्यकाल ऐसा स्थिति में आ चुका है कि इस पर किताब लिखी जा सकती है। मगर किताब लिखेगा कौन, यह विचारणीय प्रश्न था। विचार हुआ तो एक नहीं अनेक नाम सामने आ गए। कुछ नाम ऐसे भी थे जिन्होंने पहले भी राजनीति को लेकर किताब लिखी हुई है। इनमें सबसे पहला नाम राज्य के मुख्य सचिव विजय वर्धन का आया। वे सेवानिवृत्ति के करीब भी हैं। लेखन पर भी उनकी अच्छी पकड़ है। सबको उपयुक्त वर्धन साहब ही लगे हैं।

कसौली की वादियों से लौटे राव साहब

सियासी तनाव झेलना हर किसी राजनेता के बस में नहीं होता। खासतौर पर उस नेता के लिए तो तनाव कई बीमारियों का कारण भी बन जाता है, जो ईमानदार हो। अब दक्षिण हरियाणा में अहीरवाल के राजा राव इंद्रजीत सिंह को ही ले लें। वे भी तनाव के दौरान हिमाचल प्रदेश के कसौली में अपने फार्म हाउस चले जाते हैं। ऐसे कई उदाहरण भी हैं। 2019 में विधानसभा चुनाव से पहले टिकट बंटवारे के दाैरान भी वे कसौली चले गए थे। इस बार भी दिल्ली में मनोहर मंत्रिमंडल बदलाव की चर्चाएं ज्वार-भाटा की तरह चल रही थीं मगर राव साहब कसौली में थे। बदलाव की चर्चाओं पर विराम लगा तो राव साहब वापस लौट आए। राव साहब को जानने वाले उनके तनाव का असल कारण भी पूरे तथ्य के साथ बताते हैं। राव साहब को अपना समर्थक चाहे जैसा भी हो मगर वह पूरी तरह ईमानदार ही नजर आता है।

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