हरियाणा सरकार उठाने जा रही बड़ा कदम, बनाएगी खुद की बीमा कंपनी, सीएम कभी भी कर सकते हैं ऐलान

Haryana Insurance Scheme हरियाणा सरकार ने निजी बीमा कंपनियों से तौबा कर दी है। राज्य सरकार जल्द ही खुद की कंपनी लांच करेगी। हरियाणा परिवार सुरक्षा न्यास के गठन के लिए फाइल को पंख लग गए हैं। सभी बीमा योजनाएं होंगी केंद्रीयकृत होंगी।

Kamlesh BhattFri, 19 Nov 2021 04:24 PM (IST)
हरियाणा सरकार खुद की बीमा कंपनी बनाने की तैयारी में। सांकेतिक फोटो

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा में सरकार अब प्राइवेट बीमा कंपनियों से किनारा करेगी। सरकारी महकमों व बोर्ड-निगमों के अधिकारियों-कर्मचारियों के अलावा समाज के विभिन्न वर्गों के लिए चलाई जा रही सभी तरह की बीमा योजनाओं को केंद्रीयकृत किया जाएगा। सरकार खुद की बीमा कंपनी बनाएगी, जिसका नाम 'हरियाणा परिवार सुरक्षा न्यास' होगा।

मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी बीमा कंपनियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। खुद मुख्यमंत्री मनोहर लाल बीमा कंपनी को लेकर अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकें कर चुके हैं। वित्त मंत्रालय भी सीएम के पास होने से बीमा कंपनी बनाने से जुड़ी फाइल को पंख लगे हुए हैं। इसके अलावा सभी महकमों व बोर्ड-निगमों द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की रिपोर्ट सीएमओ में मांगी गई है। अभी तक बीमा योजनाओं के लिए सालाना हजारों करोड़ रुपये का प्रीमियम बीमा कंपनियों को दिया जाता रहा है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोगों को बीमा योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। इसी के मद्देनजर सरकार ने खुद की बीमा कंपनी बनाने का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव वी उमाशंकर इस योजना की पूरी प्लानिंग कर रहे हैं। वित्त विभाग द्वारा विभिन्न विभागों व बोर्ड-निगमों द्वारा चलाई जा रही बीमा योजनाओं में साल-दर-साल जा रहे प्रीमियम का डाटा तैयार कर रहा है। यह रिपोर्ट भी मांगी गई है कि पिछले 10 वर्षों में इन योजनाओं को लेकर दिए गए कुल प्रीमियम की एवज में कितने लोगों को कुल कितनी राशि मुआवजे के तौर पर दी गई।

सभी बीमा योजनाओं को परिवार पहचान-पत्र (पीपीपी) के साथ कनेक्ट किया जाएगा। पीपीपी से कनेक्ट होने के बाद सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि दुर्घटना व जीवन बीमा योजनाओं के अलावा व्यापारियों के लिए शुरू की गई नुकसान की क्षति-पूर्ति बीमा योजनाओं का लाभ उन सभी लोगों को अपने आप ही मिलेगा, जो इनके दायरे में आते हैं। व्यक्ति, परिवार व छोटे-बड़े व्यापारियों व समाज के विभिन्न वर्गों की सालाना आय के हिसाब से वे खुद-ब-खुद बीमा योजनाओं में कवर होंगे। ऐसे में सभी योजनाएं केंद्रीयकृत होंगी और लाभपात्रों और उनके परिजनों को बिना किसी अड़चन के मुआवजा मिलेगा।

सरकार द्वारा चलाई जा रही बीमा योजनाओं में से कई को सूचीबद्ध किया जा चुका है। इनमें 'मुख्यमंत्री किसान एवं खेतीहर मजदूर जीवन सुरक्षा योजना', 'मुख्यमंत्री हरियाणा कर्मचारी दुर्घटना बीमा योजना', 'मुख्यमंत्री हरियाणा सामूहिक निजी दुर्घटना बीमा योजना' तथा 'मुख्यमंत्री व्यापारी क्षतिपूर्ति बीमा योजना' शामिल हैं। छोटे एवं असंगठित व्यापार से जुड़े लोगों के लिए शुरू की गई योजना का लाभ भी इसी के माध्यम से मिलेगा। बिजली विभाग द्वारा भी इसी तरह की कई योजनाएं चलाई जा रही हैं।

केंद्र सरकार द्वारा गरीब परिवारों के लिए शुरू की गई 'आयुष्मान भारत' योजना को भी हरियाणा ने सबसे पहले लागू किया। प्रदेश सरकार इसे 'ट्रस्ट मोड' पर चला रही है। इतना ही नहीं, आंगनबाड़ी वर्कर एवं हेल्पर, ग्रामीण चौकीदार, सफाई कर्मचारियों सहित कई अन्य कैटेगरी को प्रदेश सरकार अपने खर्चे पर आयुष्मान में शामिल कर चुकी है। स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों ने यहां भी ट्रस्ट मोड के बजाय बीमा कंपनियों के जरिये इसे चलाने का प्लान बना लिया था, लेकिन सरकार ने उनके मंसूबे सिरे नहीं चढ़ने दिए।

कई अफसर और बाबू नहीं खुश

विभागों व बोर्ड-निगमों के बहुत से ऐसे अधिकारी व 'बाबू' हैं जो सरकार की बीमा कंपनी बनाए जाने के पक्ष में नहीं थे। दरअसल, बीमा कंपनियों के जरिये चलाई जा रही योजनाओं का लाभ लेने के लिए लोगों को बाबू लोगों के यहां चक्कर काटने पड़ते थे। इसमें बड़ा 'खेल' भी होता था। बताते हैं कि सीएम की फटकार के बाद विभागों व बोर्ड-निगमों से 'फाइल' ने रफ्तार पकड़ी। अब सीएमओ में बीमा कंपनी का प्रारूप अंतिम चरण में हैं और सीएम कभी भी इसका ऐलान कर सकते हैं। मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव वी उमाशंकर ने बताया कि 'हरियाणा परिवार सुरक्षा न्यास' के गठन का काम अंतिम चरण में है। जल्द ही इसे लागू कर दिया जाएगा।

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