तमाम कयासों के बावजूद एक साल में गहरी हुई हरियाणा में भाजपा और जजपा की दोस्ती

हरियाणा के मुख्‍यमंत्री मनोहरलाल और उपमुख्‍यमंत्री दुष्‍यंत चौटाला।
Publish Date:Sun, 25 Oct 2020 07:58 AM (IST) Author: Sunil Kumar Jha

नई दिल्ली, [बिजेंद्र बंसल]। हरियाणा में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और जननायक जनता पार्टी की दोस्ती को पूरा एक साल हो गया है। तमाम कयासों के बावजूद यह दोस्‍ती पिछले एक साल में और मजबूत हुई है।  गत वर्ष विधानसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद भाजपा और जजपा के बीच गठबंधन का फैसला 25 अक्टूबर 2019 की देर रात केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के निवास पर हुआ।

गठबंधन ने न्यूनतम साझा कार्यक्रम बिना भी लागू किए कई चुनावी वायदे

इसी बैठक में शाह ने भाजपा के मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और मुख्यमंत्री मनोहर लाल के समक्ष यह तय कर दिया था कि राज्य में गठबंधन सरकार में जजपा नेता दुष्यंत चौटाला उपमुख्यमंत्री होंगे और उनके दल के दो विधायक मंत्री बनेंगे। दोनों दलों की यह दोस्ती पूरे एक साल तक निर्विवाद रही।

एक साल पहले गठबंधन की घोषणा के अवसर पर भाजपा और जजपा के नेता।

बरोदा उपचुनाव के रूप में मिल रही है गठबंधन को पहली बड़ी चुनौती

हालांकि राजनीतिक दृष्टि से इस दौरान ये कयास भी लगाए जाते रहे कि भाजपा-जजपा का यह गठबंधन ज्यादा समय नहीं चलेगा। तमाम कयासों को दरकिनार करते हुए भाजपा-जजपा को सरकार बनाए हुए भी 27 अक्टूबर को एक साल हो जाएगा। हालांकि इस एक साल में गठबंधन को पहली बड़ी राजनीतिक चुनौती बरोदा उपचुनाव के रूप में मिल रही है।

आसान नहीं थी गठबंधन की डगर

गत वर्ष विधानसभा चुनाव में 90 सदस्यीय विधानमंडल में भाजपा को 40 और जजपा को 10 सीट मिली थीं। यूं तो निर्दलीय भी सात विधायक जीतकर आए थे मगर भाजपा के रणनीतिकारों ने अकेले निर्दलीयों के बूते सरकार बनाने की बजाए जजपा के साथ गठबंधन की सरकार बनाने को वरीयता दी। इस गठबंधन की डगर आसान नहीं थी।

शराब घोटाले से लेकर फिर कोरोना संक्रमणकाल में रजिस्ट्री घोटाला आने के बाद भी भाजपा अपने गठबंधन साथी दल के साथ खड़ी नजर आई। ऐसे ही तीन कृषि कानूनों पर हो रहे विरोध के बावजूद भी जजपा गठबंधन के साथ मजबूती के साथ खड़ी रही। जजपा ने बरोदा उपचुनाव में भी गठबंधन प्रत्याशी खड़ा करने की पहल की और अब खुद उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार में जुटे हैं। भाजपा ने भी गठबंधन धर्म निभाते हुए जजपा सुप्रीमो से नाराज विधायकों को गले नहीं लगाया।

न्यूनतम साझा कार्यक्रम बनाने की चुनौती बरकरार

वैसे तो भाजपा-जजपा सरकार ने न्यूनतम साझा कार्यक्रम बनाए बिना भी कई चुनावी वायदों को पूरा किया है और कई चुनावी वायदों को पूरा करने की दिशा में प्रक्रिया चल रही है। मगर दोनों ही दल एक साल में अपना न्यूनतम साझा कार्यक्रम तैयार नहीं कर पाए। इसके लिए दोनों दलों ने गृहमंत्री अनिल विज और प्रदेशाध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ की अध्यक्षता में एक कमेटी भी बनाई हुई है।

निर्दलीयों में कुंडू को नहीं मना पाए थे भाजपा के रणनीतिकार

गत वर्ष 24 अक्टूबर को विधानसभा का चुनाव परिणाम आने के साथ ही राज्य के तमाम नेता दिल्ली आ पहुंचे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा मुख्यालय में अपने संबोधन के दौरान साफ संकेत दे दिए थे कि हरियाणा में दोबारा मुख्यमंत्री मनोहर लाल ही बनेंगे। इस दौरान पार्टी मुख्यालय और दिल्ली हरियाणा भवन में भाजपा के रणनीतिकार निर्दलीय विधायकों को मनाने में जुटे थे।

निर्दलीय जीते विधायक रणजीत सिंह ने सबसे पहले बिना शर्त भाजपा को समर्थन देने की घोषणा की तो पृथला क्षेत्र से जीते भाजपा के बागी नयनपाल रावत सहित अन्य तीन निर्दलीय विधायकों ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल में अपनी आस्था जता दी थी। हालांकि तब महम से निर्दलीय जीते बलराज कुंडू की शर्तों को भाजपा के रणनीतिकार मान नहीं पाए और अचानक सिरसा के निर्दलीय जीते विधायक गोपाल कांडा का पुराना मामला सुर्खियों में आ गया। तब भाजपा हाईकमान ने जजपा के साथ गठबंधन की सरकार बनाने का अंतिम निर्णय लेते हुए केंद्रीय राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर के माध्यम से दुष्यंत चौटाला से संपर्क साधा था।

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