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Exclusive interview: चौटाला बोले-स्वार्थी लोगों की वजह से हुआ विभाजन, अब वे चले गए, हम फिर खड़े होंगे

चंडीगढ़, जेएनएन। हरियाणा के पांच बार मुख्यमंत्री रह चुके 86 साल के इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला का दमखम पूरी तरह से बरकरार है। जेबीटी शिक्षक भर्ती मामले में पैरोल पर चल रहे चौटाला आजकल प्रदेश की राजनीति को नई धार देने में जुटे हैं। उनका सिर्फ और सिर्फ एक ही एजेंडा है, इनेलो को फिर से पूरी मजबूती के साथ खड़ा करना। उनका कहना है कि इनेलो में विभाजन स्‍वार्थी लोगोंं व नेताओं के कारण हुआ। अब वे पार्टी से चले गए हैं तो यह फिर खड़ी होगी।

हरियाणा के पांच बार मुख्यमंत्री रहे इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला से दैनिक जागरण की बातचीत

पूरी तरह से स्वस्थ चौटाला सुबह-शाम सैर करते हैं। दिन में प्रदेश भर से आए लोगों से मुलाकात होती है। उनसे सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई नेता राजनीतिक मेल मिलाप करने में लगे हैं। चौटाला हालांकि उम्रदराज हो चुके, मगर उनकी याद्दाश्त और राजनीतिक समझ अभी भी गजब की है। हाल-फिलहाल चौटाला की निगाह सोनीपत जिले की बरौदा विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव पर टिकी है। चंडीगढ़ के सेक्टर नौ स्थित कोठी नंबर 80 पर दैनिक जागरण के स्टेट ब्यूरो चीफ अनुराग अग्रवाल ने ओमप्रकाश चौटाला से तमाम मुद्दों पर बातचीत की। पेश है उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

- पिछली बार को छोड़ दिया जाए तो भाजपा अक्सर इनेलो के सहयोग से सत्ता में रही। इस बार आपके पोते दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी भाजपा के साथ है। गठबंधन की इस सरकार को कैसे देखते हैं?

- हरियाणा में सरकार नाम की कोई चीज नहीं है। किसी तरह उनका दांव लग गया। समाजसेवा और प्रदेश के हित इस सरकार का ध्येय कभी नहीं रहा। दांव में भी दांव यह कि कोरोना संकट की आड़ लेकर गठबंधन के लोग मनमानी करने में लगे हैं। समाजसेवी संगठनों ने प्रदेश के लोगों की चिंता की और गठबंधन की सरकार ने उसे अपने खाते में दर्ज कर लिया। विधानसभा में सरकार को इसका जवाब देना पड़ेगा।

- कोरोना काल में विकास की तमाम परियोजनाएं थम गई। सरकारी खजाने और विकास प्रोजेक्ट पर इसका असर पड़ा?

- जब हम सरकार से गए थे, तब सरकारी खजाने में साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये थे। आज स्थिति यह है कि प्रदेश पर दो लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज हो चुका है। सरकार को स्कूली बच्चों से पांच-पांच रुपये इकट्ठा करने पड़ रहे हैं, जबकि चौधरी देवीलाल बच्चों को स्कूल में जाने तथा उनका लगाव बरकरार रखने के लिए एक-एक रुपया बच्चों को दिया करते थे। मौजूदा सरकार ने उल्टे शिक्षा का स्तर गिरा दिया।

- हरियाणा में आपकी पार्टी कई बार सत्ता में रही, आज उसे अपने राजनीतिक अस्तित्व के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है?

- इनेलो चौधरी देवीलाल का लगाया हुआ पौधा है। देवीलाल का सपना था कि इस देश और प्रदेश का हर नागरिक खुशहाल बने। उनके सपनों की आड़ लेकर निजी स्वार्थ साधने वाले लोग यहां से चले गए। अब देवीलाल के सच्चे अनुयायी इनेलो के साथ खड़े हैं। वह फिर से एकजुट होंगे। अभय सिंह चौटाला उन्हेंं जोडऩे में लगे हैं।

 

- चाैधरी देवीलाल के पोते अभय चौटाला और पड़पोते दुष्यंत चौटाला, दोनों ही देवीलाल की नीतियों के ध्वजवाहक होने का दावा करते हैं?

- ज्यादा दूर जाने की जरूरत नहीं है। नारनौंद के विधायक रामकुमार गौतम का उदाहरण सामने है। अपने असली दादा यानी मुझे नजर अंदाज कर रामकुमार गौतम को दादा कहकर बुलाने वाले आज उन्हेंं अपनी पार्टी से निकालने की तैयारी कर रहे हैं। इन लोगों में बिल्कुल भी राजनीतिक समझ नहीं है।

- आम चर्चा थी कि 2019 के चुनाव में इनेलो का राजनीतिक प्रदर्शन अच्छा रहने वाला था, लेकिन ऐसे क्या कारण रहे कि पार्टी को विघटन का शिकार होना पड़ा?

- पार्टी का बुरा चाहने वाले लोग इनेलो से चले गए। वह देवीलाल और उनकी सोच के हित चिंतक नहीं थे। ऐसे लोगों को राजनीतिक उड़ान भरने की बहुत जल्दी थी। अब बहुत से ऐसे लोग हैं, जो उनके (दुष्यंत चौटाला) के साथ गए हैं। अब वह हमसे आकर मिल रहे हैं। देवीलाल की नीतियों के प्रति आस्था जताने वालों को दोबारा पार्टी में लेने से हमें परहेज नहीं है।

- बरौदा विधानसभा सीट पर उपचुनाव होना है। पहले यह कभी इनेलो का गढ़ हुआ करता था। आज हुड्डा दावा करते हैं। भाजपा और जजपा को भी यहां आस है?

- बरौदा उपचुनाव के लिए हमारी पार्टी पूरी तरह से तैयार है। इस चुनाव के नतीजे भविष्य की राजनीतिक दिशा तय करेंगे। इस चुनाव के नतीजों के बाद गठबंधन की सरकार में फूट पड़ेगी और राज्य में मध्यावधि चुनाव होंगे।

 - इन खबरों में कितनी सच्चाई है कि आप पारिवारिक विघटन से पहले दुष्यंत चौटाला को सीएम या डिप्टी सीएम बनाने के लिए राजी हो गए थे?

- हमारी पार्टी में विघटन स्वार्थी लोगों की वजह से ही हुआ है। अभय ने तो चुनाव तक लडऩे से मना कर दिया था। हमारा परिवार इनेलो है। इसके आगे व्यक्तियों का परिवार कोई अहमियत नहीं रखता। इनेलो के अलावा हमारा कोई दूसरा परिवार नहीं है।

 - आपकी उम्र 86 साल हो गई। आप आरोप लगाते रहे हैं कि आपकी रिहाई राजनीतिक कारणों से नहीं हो पा रही?

- इन लोगों को न जाने मुझसे क्या डर है। मैंने अपनी सजा पूरी कर ली है। मैंने कोई अपराध नहीं किया था। मैंने लोगों को रोजगार दिए थे। उसकी सजा मुझे मिली है, लेकिन हम अपनी रिहाई के लिए प्रयासरत हैं।

- ताऊ देवीलाल यानी आपके पिताजी देश की राजनीति का बड़ा नाम हैं। आपकी नजर में उनकी राजनीतिक विरासत का असली वारिस कौन है?

- किसी व्यक्ति को इसका श्रेय देना अन्याय होगा। इनेलो एकमात्र ऐसी पार्टी है, जो चौधरी देवीलाल की विचारधारा को आगे लेकर चल रही है। बाकी लोग या दल उनके नाम पर राजनीतिक स्वार्थ पूरा कर आंखों में धूल झोंकने का काम कर रहे हैं।

- पिछले दिनों आपने यह भी कहा था कि अजय सिंह और दुष्यंत चौटाला ने अपने दायित्व का सही ढंग से निर्वाह नहीं किया?

- मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि हरियाणा व केंद्र सरकारों का पतन तय है। हमारी सोच थी कि इनेलो की सरकार बने। क्यों नहीं बन पाई? कौन लोग बाधक रहे? इसके क्या कारण रहे? इनकी तह में जाएंगे तो पूरी किताब लिखनी पड़ेगी। अब हमारा ध्येय पार्टी को मजबूत करते हुए हरियाणा में इनेलो की सरकार बनाने का है।

 खास बातें

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- देवीलाल बच्चों को पढऩे के लिए एक रुपया देते थे, गठबंधन सरकार ने पांच रुपये मांग लिए।

- रामकुमार गौतम को दादा कहने वाले लोगों में जरा भी राजनीतिक समझ नहीं।

- बरौदा उपचुनाव के बाद हरियाणा में बदलेगी राजनीतिक दिशा, मध्यावधि चुनाव तय।

- कुछ लोगों को जल्दी उडऩे की चाहत थी, मगर देवीलाल की असली अनुयायी इनेलो।

- अभय को तो हमने चुनाव तक नहीं लडऩे के लिए मना लिया था।

 

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