Deputy CM दुष्‍यंत चौटाला को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, नियुक्ति के खिलाफ दायर याचिका खारिज

चंडीगढ़, जेएनएन। हरियाणा के उपमुख्‍यमंत्री दुष्यंत चौटाला को बड़ी राहत मिली है। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने उनको डिप्‍टी सीएम बनाने के खिलाफ दायर याचिका को रद कर दिया है। दुष्‍यंत को उपमुख्‍यमंत्री बनाने को असंवैधानिक बताते हुए इसके खिलाफ हाई कोर्ट में या‍चिका दायर की गई थी।

बता दें कि जननायक जनता पार्टी के संयोजक दुष्यंत चौटाला ने 27 अक्‍टूबर को मुख्‍यमंत्री मनोहरलाल के साथ उनमुख्‍यमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके बाद 29 अक्‍टूबर को उनकी नियुक्ति के खिलाफ हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी। हाई कोर्ट के वकील जगमोहन भट्टी ने यह जनहित याचिका दायर की थी।

याचिका में कहा गया था कि हरियाणा में दुष्यंत चौटाला को उप मुख्यमंत्री नियुक्त करना संविधान और कानून के खिलाफ है। राज्यपाल सत्‍यदेव नारारण द्वारा दुष्यंत चौटाला को उप मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाना संविधान के अनुच्‍छेद 164 का उल्लंघन है। भारतीय संविधान में कहीं भी उपमुख्यमंत्री पद का प्रावधान नहीं है। ऐसे में  उप मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाना गलत है।

इसके साथ ही याचिका में दुष्यंत चौटाला को उप मुख्यमंत्री के नाते मिलने वाले सभी सुविधाओं पर रोक लगाई जाए जाने की मांग की गई थी। याचिका पर अपने जवाब में हरियाणा सरकार की ओर से कहा गया कि राज्य में उप मुख्यमंत्री को अतिरिक्त सुविधाएं देने का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में इसे चुनौती देने का कोई औचित्‍य नहीं है।

हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस पर आधारित बेंच ने शनिवार को कहा कि कर्नाटक हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पद पर नियुक्ति को असंवैधानिक नहीं माना है तो कैसे इस विषय को लेकर जनहित याचिका दायर की जा रही है। हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा दी गई सभी दलीलें इस मामले में आधारहीन हैं। लिहाजा हाईकोर्ट ने इस जनहित याचिका को खारिज कर रहा है।

मामले की सुनवाई के दौरान  हरियाणा के एडवोकेट जनरल बलदेव राज महाजन ने उपमुख्यमंत्री पद पर गत वर्ष कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले सहित ऐसे ही चार अन्य फैसलों की जानकारी दी। उन्‍होंने कहा कि कर्नाटक हाईकोर्ट कह चूका है कि उपमुख्यमंत्री नियुक्त करना असंवैधानिक नहीं है। इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था। जब सुप्रीम कोर्ट ही इस मामले में साफ कर चूका है कि इस पद पर नियुक्ति असंवैधानिक नहीं है तो आगे किसी भी अन्य दलील की जरुरत ही नहीं है। 

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इसके बाद शनिवार को हाई कोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया। बता दें कि दिल्‍ली, आंध्रप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, पंजाब एवं उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में समय-समय पर डिप्टी सीएम बनाए गए। न्यायपालिका ने किसी भी राज्य में किसी भी डिप्टी सीएम को नहीं हटाया।

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