हरियाणा में भीषण जलसंकट का खतरा, यही हाल रहा तो पानी के लिए तरसेंगे लोग

हरियाणा में लोग बहुत जल्‍द पानी के लिए तरसेंगे। राज्‍य में भूजल स्‍तर तेजी से नीचे जा रहा है। राज्य के 60 फीसद हिस्‍से में भूजल का स्‍तर काफी नीचे चला गया है और यह बड़ी चिंता पैदा कर रहा है।

Sunil Kumar JhaSun, 13 Jun 2021 08:36 PM (IST)
हरियाणा में पानी का बड़ा संकट पैदा हो सकता है। (सांकेतिक फोटो)

चंडीगढ़,जेएनएन। Water Crisis in Haryana: हरियाणा में भीषण जलसंकट का खतरा है। राज्‍य जल समस्‍या के मुहाने पर पहुंच गया है और यही हालत रही तो लोगों को पानी के लिए तरसना होगा। हरियाणा के 60 फीसद हिस्‍से में भूजल स्‍तर काफी नीचे चला गया है और राज्‍य का बड़ा हिस्‍सा रेड कैटगरी में पहुंच गया है।

हरियाणा के 60 फीसदी हिस्से में काफी नीचे चला गया भूजल

हरियाणा के 22 जिलों में से 14 में भूजल काफी नीचे चला गया है। सात जिले ऐसे हैं, जहां जल भराव तथा जलीय लवणता की समस्या है। लोगों द्वारा अंधाधुंध भूजल का इस्तेमाल करने के चलते वर्ष 2004 में राज्य के 114 ब्लाक में से 55 ब्लाक रेड कैटेगरी (अत्याधिक खतरनाक स्थिति) में आ चुके थे, जो करीब 48 फीसदी है। 2020 में 141 ब्लाक में से 85 ब्लाक रेड कैटेगरी में पहुंच गए, जो कि राज्‍य का 60 प्रतिशत हिस्‍सा है। हरियाणा सरकार ने गिरते भूजल के खतरे को भांपते हुए किसानों से सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं को अपनाने का आह्वान किया है।

सीएम मनोहर लाल ने अधिकारियों को दिए दो वर्षीय केंद्रीयकृत पानी निगरानी प्रणाली तैयार करने के निर्देश

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अधिकारियों को किसानों के लिए भूजल, नदियों का पानी तथा शोधित जल की सुचारू उपलब्धता के लिए दो वर्षीय केंद्रीयकृत पानी निगरानी प्रणाली तैयार करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें जिलों, ब्लाक तथा गांवों को शामिल किया जाए। हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण की पहली बैठक लेते हुए मुख्यमंत्री ने गिरते भूजल स्तर पर चिंता जताई।

उन्होंने कहा कि राज्य में गिरते भूजल स्तर को ऊपर उठाने के लिए वाटर रिचार्ज व उपयोग संबंधी एक समायोजित योजना की आवश्यकता है, ताकि लोगों को खेती तथा घरेलू उपयोग के लिए उचित मात्रा में पानी उपलब्ध हो सके। इसे लोगों तथा जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से गांव स्तर तक बढ़ाया जाए ताकि भावी पीढ़ी को लंबे समय तक पानी की उपलब्धता में दिक्कत न उठानी पड़े।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राज्य के विभिन्न क्षेत्रों के आधार पर योजना बनाई जाए और प्रत्येक गांव का जल उपलब्धता सूचकांक तैयार करें, जिससे लोगों को उनके जलीय भविष्य की जानकारी मिल सके। उन्होंने पिछले पांच दशक में राज्य के कुरुक्षेत्र, करनाल, कैथल तथा पानीपत सहित कुछ जिलों में भूजल का स्तर 80 फीट तक नीचे चले जाने पर चिंता जताई और कहा कि यह धान उत्पादक जिले हैं, जहां फसल विविधिकरण अपनाना बेहद जरूरी है। ऐसे किसानों को सरकार प्रोत्साहन राशि प्रदान करेगी।

 मुख्यमंत्री ने किसानों से कहा कि जिन क्षेत्रों में भूजल नीचे चला गया है, उनमें सूक्ष्म सिंचाई व्यवस्था को अपनाएं। जल संसाधन प्राधिकरण की चेयरपर्सन केशनी आनंद अरोड़ा ने मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप योजना तैयार करने का भरोसा दिलाया। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव देवेंद्र सिंह ने किसानों से कहा कि वे भूजल पर निर्भरता कम कर फसल विविधिकरण को अपनाएं।

मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव डीएस ढेसी ने कहा कि नहरी पानी के उपयोग एवं वितरण की जानकारी के अभाव में लोगों की निर्भरता ट्यूबवेल पर बढ़ जाती है। बड़े शहरों में द्वि-जलीय पाइप लाइन का विस्तार करने की जरूरत है। सीएम के प्रधान सचिव वी उमांशकर ने कहा कि जिन क्षेत्रों में पानी में लवणता अधिक है, वहां माइक्रो शोधन प्लांट लगाए जाएंगे और लवणता में कमी लाकर पानी का उपयोग किया जाएगा।

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