हरियाणा में पराली से बनेगी कंप्रेस्ड बायो गैस और खाद, लगेंगे 200 सीबीजी प्लांट, खत्म होगा धुआं

हरियाणा में पराली से कंप्रेस्ड बायो गैस और खाद बनेगी। (सांकेतिक फोटो)
Publish Date:Sun, 27 Sep 2020 11:29 AM (IST) Author: Kamlesh Bhatt

जेएनएन, चंडीगढ़। पराली (धान के फसल अवशेष) के प्रबंधन की दिशा में हरियाणा सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। रिन्यूवल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (हरेडा) और इंडियन ऑयल कारपोरेशन लिमिटेड (आइओसीएल) मिलकर पराली से कंप्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) बनाएंगे। हरियाणा में करीब 200 सीबीजी प्लांट लगाए जाएंगे। पहले चरण में 66 कंपनियों को प्लांट लगाने की मंजूरी दी गई है।

इस पहल से हरियाणा वासियों को पराली से हर साल फैलने वाले प्रदूषण से काफी हद तक निजात मिलेगी। प्रदेश में हर साल धान के सीजन में करीब 60 लाख मीट्रिक टन पराली निकलती है। इसमें से 30 लाख फसली अवशेषों का निस्तारण खेतों में ही हो जाता है। बाकी 30 लाख मीट्रिक टन फसली अवशेष किसानों द्वारा जलाए जाते हैं।

योजना के मुताबिक पहले चरण में 26 लाख टन पराली प्रबंधन वाले 66 प्लांट लगाए जाएंगे। इनमें कंप्रेस्ड बायो गैस के अलावा फर्टिलाइजर भी बनेगा। आयल कंपनियों ने अपने पेट्रोल-सीएनजी पंपों पर कंप्रेस्ड बायो गैस बेचने का भी फैसला लिया है। सीबीजी प्लांट लगाने वाली कंपनियों को यह गारंटी दी गई है कि उनकी कंप्रेस्ड बायो-गैस को 46 रुपये प्रति किलो के हिसाब से खरीदा जाएगा।

सीबीजी के प्लांट अलग-अलग कंपनियां आइओसीएल के अलावा हिंदुस्तान पेट्रोलियम, भारत गैस आदि ऑयल कंपनियों के साथ टाई-अप करके स्थापित करेंगी। आइओसीएल ने जिन 66 कंपनियों को मंजूरी दी है, उनमें भिवानी, नारायणगढ़, अंबाला, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद, फतेहाबाद, इंद्री, करनाल, कलायत, सोनीपत, पलवल, यमुनानगर, बरवाला, खरखौदा, हथवाला, खरड़, कलानौर, चरखी दादरी, पटौदी, नूंह, गुरुग्राम, हिसार, पानीपत, गोहाना, असंध, झज्जर, रेवाड़ी, रोहतक, आसन, दिनोद, दनौदा, दत्ता (हिसार), दामला, पिहोवा आदि शहरों की कंपनियां शामिल हैं।

कंप्रेस्ड बायो-गैस प्लांट से निकलने वाली पैडी स्ट्रा का इस्तेमाल फíटलाइजर के रूप में हो सकेगा। केंद्र सरकार ने पैडी स्ट्रा को खेतों में खाद के रूप में इस्तेमाल करने को मंजूरी दे दी है। केंद्र ने एफसीओ (फíटलाइजर कंट्रोल आर्डर) के तहत बायो प्रोड्क्ट्स को फíटलाइजर में शामिल किया है। कृषि विभाग के जरिये इस पैडी स्ट्रा को खाद के रूप में किसान खेतों में इस्तेमाल कर सकेंगे। प्लांट लगाने वाली कंपनियों को इससे भी मोटा मुनाफा होगा।

वाहनों में सीएनजी की जगह इस्तेमाल होगी कंप्रेस्ड बायो गैस

पर्यावरण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव धीरा खंडेलवाल का कहना है कि पराली निस्तारण के लिए विशेष पॉलिसी बनाई गई है। हरेडा ने आइओसीएल के साथ प्रदेशभर में 200 सीबीजी प्लांट लगाने के लिए एमओयू साइन किया है। आइओसीएल ने 66 प्लांट को एलओआई जारी कर दी है। ये प्लांट लगने के बाद लगभग 24 लाख टन पराली का प्रबंधन किया जा सकेगा। कंप्रेस्ड बायो-गैस का इस्तेमाल सीएनजी की जगह गाडि़यों में हो सकेगा।

पराली प्रबंधन को आगे आएं किसान : दलाल

हरियाणा के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जेपी दलाल का कहना है कि किसान खेतों में पराली को न जलाएं। वे सरकार द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन के तहत कृषि उपकरणों पर दी जा रही सब्सिडी का लाभ उठाकर पर्यावरण को बचाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। पराली को विभिन्न प्रक्रिया से गुजारकर इससे कोयला व टार भी तैयार की जा सकती है जिससे सड़कों का निर्माण होता है। कंप्रेस्ड बायो गैस प्लांट लगाने से पराली प्रबंधन में काफी हद तक मदद मिलेगी। पैडी-स्ट्रा खाद के रूप में बेहतर विकल्प है।

 

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