हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की नई कार्यकारी समिति काे हाई कोर्ट में चुनौती, कोर्ट ने मांगा जवाब

HSGPC Excutive Committee हरियाणा सिख गुरुद्वारा कमेटी की नई कार्यकारी समिति के गठन पर विवाद हो गया है। यह मामला अब पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में सभी पक्षों से जवाब मांगा है।

Sunil Kumar JhaWed, 22 Sep 2021 05:42 PM (IST)
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट की फाइल फोटो।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। HSGPC Excutive Committee: हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति की नई कार्यकारी समिति के गठन को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। हाई कोर्ट ने हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति को इस मामले में पक्ष रखने का आदेश दिया है। समिति के पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष दीदार सिंह नलवी व अन्य ने सिख गुरुद्वारा प्रबंधक समिति की नई कार्यकारी समिति के गठन चुनौती दी है। कुरुक्षेत्र जिले के निवासी नलवी हरियाणा सिख गुरुद्वारा (प्रबंधन) अधिनियम 2014 के तहत गठित कुल 41 सदस्यों वाली तदर्थ समिति के सदस्य थे।

याचिका में आरोप, मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन और यथास्थिति के आदेश, फिर भी बन गई कमेटी

याचिका के अनुसार उन्हें सरकार द्वारा 2014 में ही नामित किया गया था और उन्हें अधिनियम के प्रविधानों के अनुसार पद पर बने रहने का पूरा अधिकार है। लेकिन सरकार ने 20 मई के आदेश के तहत तदर्थ समिति के कुछ सदस्यों को हटा दिया, जो पूर्ण तौर पर गलत है और एचएसजीएमसी अधिनियम की धारा 16 (8) का उल्लंघन है। इसके अनुसार 41 सदस्यों वाली तदर्थ समिति एचएसजीएमसी के चुनाव होने तक राज्य के सभी गुरुद्वारों की सभी संपत्तियों का प्रबंधन करेगी।

 41 सदस्यों की एक तदर्थ समिति कर रही संचालन, नई समिति का गठन को बताया नियमों के खिलाफ

हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन अधिनियम 2014 को अमान्य करने की मांग करते हुए कुरुक्षेत्र से एसजीपीसी के सदस्यों में से एक द्वारा दायर याचिका के मद्देनजर मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने पहुंचा था, इस पर शीर्ष अदालत ने मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। तब से मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित है और यथास्थिति का आदेश अभी भी कायम है।

याचिका के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मामला लंबित होने या सरकार के अन्य निहित स्वार्थों के कारण तय अवधि के बाद समिति के चुनाव नहीं हुए थे। तब से 41 सदस्यों की तदर्थ समिति हरियाणा राज्य में गुरुद्वारों का संचालन और प्रबंधन कर रही है। 41 सदस्यों ने छह सदस्यों के कार्यकारी बोर्ड का भी चुनाव किया था। लेकिन पिछले दिनों सरकार ने याची समेत कुछ सदस्यों को हटा कर अपने लोगों के साथ मिलकर प्रबंधक समिति का गठन कर दिया।

 

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