PM Modi Repeal Farm Laws: हरियाणा की सियासत में होगा बड़ा असर, जजपा को बड़ी राहत, कांग्रेस को झटका संभव

PM Modi Repeal Farm Laws प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा तीन केंद्रीय कृषि कानूनोंं को वापस लेने की घोषणा का हरियाणा की सियासत पर बड़ा असर पड़ेगा। सबसे बड़ी राहत जननायक जनता पार्टी को मिलेगी। दूसरी ओर किसान आंदोलन को लेकर सक्रिय रही कांग्रेस को झटका लग सकता है।

Sunil Kumar JhaFri, 19 Nov 2021 04:12 PM (IST)
भूूपेंद्र सिंह हुड्डा, इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला और हरियाणा के उपमुख्‍यमंत्री दुष्‍यंंत चौटाला। (फाइल फोटो)

चंडीगढ़, जेएनएन। PM Modi Repeal Farm Laws: प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा तीन कृषि कानूनोंं को वापस लेने की घोषणा का हरियाणा की सियासत पर काफी असर होगा। सबसे बड़ी राहत मनोहरलाल सरकार में साझीदार जननायक जनता पार्टी (Jannayak Janata Party) को मिलेगी। हरियाणा के उपमुख्‍यमंत्री दुष्‍यंत चौटाला की पार्टी जजपा के नेताओं काे राज्‍यभर में किसानों के विरोध का सामना करना पड़ रहा था। अब उन्‍हें इससे राहत मिलने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी गतिविधियां चलाने में परेशानी नहीं होगी। जजपा की गांवों में पकड़ मानी जाती है। दूसरी ओर, किसान आंदोलन को लेकर सक्रिय रही कांग्रेस को झटका लग सकता है।  कांग्रेस के नेताओं ने किसान आंदोलन को लेकर जमकर राजनीति की। 

जजपा ने विरोधों के बावजूद भाजपा संग निभाया गठबंधन धर्म            

हरियाणा के उपमुख्‍यमंत्री दुष्‍यंत चौटाला ने प्रधानमंत्री मोदी की घोषणा का राज्‍य में सबसे पहले स्‍वागत किया। उन्‍होंने ट्वीट किया, 'गुरुपर्व के पवित्र अवसर पर कृषि कानूनों को वापस लेने के केंद्र सरकार के फैसले का हम स्वागत करते हैं।  सामाजिक शांति और भाईचारे की बहाली के लिए यह कदम सराहनीय है। मैं सभी किसान जत्थेबंदियों से धरना समाप्त करने का आग्रह करता हूं। हम किसान हित के लिए हमेशा प्रयास करते रहेंगे।'

दरअसल किसान आंदोलन का हरियाणा केंंद्र बन गया था और भाजपा के साथ जजपा का भी किसान संंगठनों ने काफी विरोध किया। हालात यह हो गई थी कि भाजपा व जजपा नेताओं का कोई कार्यक्रम करना मुश्किल हो गया था। मुख्‍यमंत्री मनोहरलाल और डिप्‍टी सीएम दुष्‍यंत चौटाला को भी विरोध का सामना करना पड़ा। यहां तक कि दुष्‍यंत चौटाला का अपने गृह शहर सिरसा पहुंचने पर भी किसान प्रदर्शनकारियों ने विरोध किया। 

ग्रामीण क्षेत्रों में है जजपा का जनाधार, किसान संगठनों का विरोध समाप्‍त होने से मिलेगी राहत  

इस हालात से जजपा के विधायक और नेता काफी परेशान थेे। वे इसको लेकर डिप्‍टी सीएम दुष्‍यंत चौटाला पर दबाव बना रहे थे। इस दौरान कांग्रेस ने भी जजपा पर हमले किए और भाजपा के साथ गठबंधन जारी रखने पर सवाल उठाए। तमाम सियासी दबावों के बावजूद जजपा पूरी शिद्दत के साथ भाजपा के साथ खड़ी रही और गठबंधन धर्म निभाया। 

दरअसल, जजपा का ग्रामीण क्षेत्रों में काफी जनाधार माना जाता है, लेकिन किसान आंदोलन के कारण इसे नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही थी। सियासी विश्‍लेषक उसका जाट वोटबैंक भी प्रभावित हाेने की संभावना जता रहे थे। जजपा पूर्व उपप्रधानमंत्री ताऊ देवीलाल के सिद्धांताें पर चलने की बात करती है, ऐसे में विरोधी दल किसान आंदोलन के दौरान भाजपा के साथ सत्‍ता में भागीदारी करने के लिए जजपा पर सवाल उठा रहे थे। लेकिन, पीएम नरेंद्र मोदी  की घोषणा से अब सारा परिदृश्‍य बदलता दिख रहा है और जजपा के लिए सियासी दुविधा समाप्‍त हो गई है।         

कांग्रेस और इनेलो से छिना बड़ा मुद्दा   

दूसरी ओर, किसान आंदाेलन को लेकर हरियाणा में कांग्रेस व इंंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) खूब राजनीति की। कांग्रेस किसान आंदोलन को लेकर खासी सक्रिय रही तो इनेलो के नेता अभय चौटाला ने किसान आंदोलन को लेकर हरियाणा विधानसभा की सदस्‍यता से इस्‍तीफा दे दिया था। अभय के इस्‍तीफे के कारण ऐलनाबाद सीट पर उपचुनाव कराना पड़ा। ऐसे में कृृृषि कानूनों की वापसी से कांग्रेस सहित विपक्षी दलों का बड़ा मुद्दा छिन गया है।   

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