Haryana By Election Politics: देवीलाल की राजनीतिक पिच में पैवेलियन से खेलेंगे अजय और दुष्यंत चौटाला, जानें क्‍या है नई रणनी‍ति

Haryana By Election हरियाणा के उपमुख्‍यमंत्री दुष्‍यंत चौटाला और उनके पिता व जजपा अध्‍यक्ष अजय चौटाला इस बार ताऊ देवीलाल की सियासी पिच पर उपचुनाव क मैच के लिए खास रणनीति तैयार की है। दोनों पिता-पुत्र पैवेलियन में बैठकर इस सियासी मैच को खेलेंगे।

Sunil Kumar JhaSun, 03 Oct 2021 09:07 AM (IST)
जजपा अध्‍यक्ष अजय चाैटाला और हरियाणा के डिप्‍टी सीएम दुष्‍यंत चौटाला। (फाइल फोटो)

चंडीगढ, [अनुराग अग्रवाल]। Haryana By Election Politics: पूर्व उपप्रधानमंत्री देवीलाल की सियासी पिच ऐलनाबाद में इस बार चुनावी मैच कुछ अलग अंदाज में खेला जाएगा। देवीलाल के पौत्र व प्रपौत्र इस मैच को नई रणनीति से खेलेंगे। जननायक जनता पार्टी (Jannayak Janta Party) के प्रधान अजय चौटाला और उनके पुत्र हरियाणा के डिप्‍टी सीएम दुष्‍यंत चौटाला इस मैच को पैवेलियन में बैठकर खेलेंगे। उन्‍होंने इसके लिए खास रणनीति तैयार की है। इस रणनीति पर विरोधी सवाल भी उठा रहे हैं और इसे चुनाव की रण से भागने की संज्ञा दे रहे हैं। बहरहाल, पिता-पुत्र की इस 'स्‍ट्रेटेजी' से हरियाणा की राजनीति गर्मा गई है।

बता दें कि हरियाण और देश की राजनीति में ताऊ के नाम से मशहूर चौधरी देवीलाल कहा करते थे कि किसी भी राजनीतिक पार्टी को चुनाव हमेशा लड़ना चाहिए। चुनाव वह जंग है, जिसमें जीत होगी या हार होगी। जीत होगी तो आप राजा कहलाएंगे...और हार हुई तो आप अगली बार हर हाल में जीतने के लिए लड़ेंगे। किसी भी राजनीतिक पार्टी के लिए अपने कार्यकर्ताओं को जोड़े रखने और उन्हें अपने जिंदा होने का अहसास कराते रहने के लिए चुनाव लड़ना जरूरी है। ऐलनाबाद की सीट पर भाजपा की सहयोगी पार्टी जननायक जनता पार्टी द्वारा अपनी दावेदारी छोड़ दिए जाने के बाद इनेलो और जजपा वर्कर ताऊ देवीलाल की बातों को कुछ इसी तरह से याद कर रहे हैं।

 पिता-पुत्र की नई रणनी‍ति से हरियाणा की राजनीति गरमाई

ऐलनाबाद सिरसा जिले की सबसे हाट सीट है। दो बार छोड़कर इस सीट पर हमेशा ताऊ देवीलाल के परिवार का कब्जा रहा है। भले ही वह किसी भी पार्टी से चुनाव लड़े हों। इनेलो के प्रधान महासचिव अभय सिंह चौटाला ने तीन कृषि कानूनों के विरोध में ऐलनाबाद विधानसभा सीट से त्यागपत्र दे दिया था। कांग्रेस भले ही यह दलील दे कि अभय चौटाला के इस्तीफा देने से तीन कृषि कानूनों की वापसी पर कोई फर्क नहीं पड़ा, लेकिन अभय चौटाला की इस पहल को बड़े राजनीतिक साहस के रूप में देखा गया है। जिस पार्टी का प्रदेश में एक ही विधायक हो और वह भी विधानसभा की सदस्यता छोड़कर फील्ड में उतर पड़े, यह साहस सिर्फ वही कर सकता है, जिसे अपने कार्यकर्ताओं और राजनीतिक क्षमताओं पर भरोसा हो।

सिरसा जिले को ताऊ देवीलाल और उनके बेटे पांच बार मुख्यमंत्री रहे ओमप्रकाश चौटाला का गढ़ माना जाता है। इनेलो के दोफाड़ होने के बाद अजय सिंह चौटाला और दुष्यंत चौटाला ने अलग जननायक जनता पार्टी बना ली। जजपा हाल फिलहाल भाजपा के साथ गठबंधन में है। अभय चौटाला और दुष्यंत चौटाला भले ही एक ही राजनीतिक परिवार से हैं, लेकिन दोनों ने अपनी राजनीतिक उड़ान को परवान चढ़ाने की मंशा से अलग-अलग दल बनाए और अलग-अलग राजनीति करने का निर्णय लिया।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ऐसे में लोगों को लग रहा था कि ताऊ देवीलाल और चौटाला परिवार की राजनीतिक विरासत पर अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए जननायक जनता पार्टी ऐलनाबाद का चुनाव जरूर लड़ेगी, लेकिन जजपा ने यह सीट भाजपा को सौंपकर उन कार्यकर्ताओं के सवालों से मुंह मोड़ लिया कि आखिर जिस राजनीतिक मंशा से अलग पार्टी बनाई गई और जिस ताऊ देवीलाल की राजनीतिक विरासत पर बार-बार अपना हक जताया जा रहा है, उसे सिरसा जिले में कैसे अनदेखा किया जा सकता है।

विरोधियाें का सवाल- ताऊ के वारिस जब सिरसा में नहीं लड़ेंगे तो कहां लड़ेंगे

भाजपा व जजपा के साथ इनेलो व कांग्रेस में यह आवाज भी उठ रही है कि ताऊ देवीलाल के राजनीतिक वारिस जब सिरसा में ही नहीं लड़ेंगे तो कहां लड़ेंगे। कुछ लोग इसे जजपा का सेफ गेम मानते हैं तो कुछ भाजपा, इनेलो व कांग्रेस के लिए अपनी कामयाबी का बड़ा अवसर कह रहे हैं। बरौदा के रण की अगर बात करें तो वहां जजपा का खास जनाधार नहीं था। भाजपा ने बरौदा का रण पूरी मजबूती के साथ लड़ा। भले ही उनका उम्मीदवार कांग्रेस के हाथों पराजित हो गया।

कालका में कांग्रेस विधायक प्रदीप चौधरी की सदस्यता खत्म होने के बाद संभावना जताई जा रही थी कि ऐलनाबाद व कालका का उपचुनाव एक साथ होगा। तब भाजपा ने कालका सीट अपने लिए और ऐलनाबाद सीट जजपा के लिए सोचकर रखी थी, लेकिन कई दिनों तक भी ऐलनाबाद पर जजपा द्वारा दावेदारी नहीं जताए जाने के बाद भाजपा समय से अपने पत्ते नहीं खोल पाई। कुछ दिनों बाद जब प्रदीप चौधरी की सदस्यता विधानसभा स्पीकर ने बहाल कर दी तो सिर्फ ऐलनाबाद का चुनाव रह गया, जिस पर अब जजपा की बजाय भाजपा ताल ठोंक रही है।

 जजपा मान रही अपनी रणनीति, मगर जवाब तो देना पड़ेगा

हरियाणा के राजनीतिक विश्‍लेषकों का कहना है कि चुनाव के नतीजे चाहे जो भी रहें, लेकिन देवीलाल और चौटाला के गढ़ में जजपा का बैकफुट पर खेलना निसंदेह उनके कार्यकर्ताओं के मन में कई तरह के सवाल छोड़ गया है। चुनावी रण की पैवेलियन में बैठकर भाजपा को बैटिंग करते हुए देखना जजपा की भविष्य की राजनीतिक सेहत के लिए उचित नहीं कहा जा सकता।

विश्‍लेषकों का कहना है कि यह अलग बात है कि जजपा अपने इस कदम को चुनावी रणनीति का बड़ा हिस्सा मानते हुए भाजपा को आगे कर कई तरह के विवादों का पटाक्षेप करने की सोच रख रही है, लेकिन कार्यकर्ता के मन में उमड़ रहे सवालों का जवाब देना भी अजय सिंह चौटाला और दुष्यंत चौटाला के लिए बड़ी मुश्किल का काम हो रहा है। जजपा की कमजोर दावेदारी के बाद भाजपा ने जिस मजबूती के साथ ऐलनाबाद में कदम रखा है, उससे बरौदा की तरह यहां भी वर्करों का जोश बढ़ा है।

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