कृषि कानूनों के मुद्दे पर अभय चौटाला ने दिया हरियाणा विधानसभा से इस्तीफा, स्पीकर ने स्वीकार किया

विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफा सौंपते अभय चौटाला।

इनेलो के एकमात्र विधायक अभय सिंह चौटाला कृषि कानूनों के मुद्दे पर आज विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने घोषणा की थी अगर कृषि कानून वापस नहीं लिए जाते तो वे विधानसभा की सदस्यस्यता से इस्तीफा दे देंगे।

Publish Date:Wed, 27 Jan 2021 10:27 AM (IST) Author: Kamlesh Bhatt

जेएनएन, चंडीगढ़। हरियाणा की राजनीति में बुधवार का दिन काफी अहम रहा। रोहतक जिले के महम कांड से बरी हो चुके इनेलो के एकमात्र विधायक अभय सिंह चौटाला ने तीन कृषि कानूनों के विरोध में विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। पूर्व उप प्रधानमंत्री स्व. देवीलाल के पौत्र अभय चौटाला को इंटरनेट मीडिया पर जुबान का धनी नेता बताते हुए ट्रोल किया जा रहा है। 90 सदस्यीय हरियाणा विधानसभा में इस बार ताऊ देवीलाल के परिवार से पांच विधायक चुनकर गए हैं। अभय चौटाला एकमात्र ऐसे विधायक हैं, जिन्होंने अपने कार्यकाल के चार साल बचे होने के बावजूद विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया है।

पंचकूला में राज्य कार्यकारिणी की बैठक लेने के बाद हरियाणा विधानसभा में विपक्ष के नेता रह चुके अभय चौटाला अपने कुछ साथियों के साथ ट्रैक्टर चलाकर चंडीगढ़ स्थित हरियाणा विधानसभा सचिवालय पहुंचे। वहां उन्होंने स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता को अपना वही इस्तीफा सौंपा जो उन्होंने पहले ई-मेल से और बाद में अपने समर्थकों के जरिये भिजवाया था। अभय चौटाला ने ऐलान किया था कि 26 जनवरी तक यदि तीनों कृषि कानूनों को वापस नहीं लिया जाता तो 27 जनवरी को उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाए। अपना इस्तीफा स्पीकर को सौंपने अभय खुद विधानसभा पहुंचे। स्पीकर ज्ञानचंद गुप्ता ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।

अभय चौटाला सिरसा जिले की ऐलनाबाद विधानसभा सीट से इनेलो के एकमात्र विधायक थे। अब यह सीट खाली हो गई है। यहां छह माह के भीतर दोबारा चुनाव होना है। हाल ही में बरोदा विधानसभा सीट पर उपचुनाव हुआ है। बरोदा के बाद अब ऐलनाबाद का उपचुनाव काफी रोमांचकारी रहने वाला है। अभय चौटाला के इस्तीफा देने के साथ ही अब ताऊ देवीलाल के परिवार के बाकी सदस्य विधायकों, कांग्रेस, जजपा और निर्दलीय विधायकों पर इस्तीफों का दबाव बढ़ेगा।

डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला, बिजली मंत्री रणजीत चौटाला, दुष्यंत चौटाला की माता नैना चौटाला और कांग्रेस विधायक अमित सिहाग भी ताऊ देवीलाल के परिवार से विधायक चुनकर विधानसभा गए हैं। अभय चौटाला ने कहा कि उनकी रगों में ताऊ देवीलाल और ओमप्रकाश चौटाला का खून है। वह किसानों के हित साधने का झूठा दम भरने की बजाय उनके हित में कुर्सी को लात मारने का दम रखते हैं। उन पर कांग्रेस, निर्दलीय और जजपा विधायकों का दबाव था कि वह इस्तीफा न दें, क्योंकि इससे उन पर भी किसान दबाव बना सकते हैं, लेकिन मेरे लिए किसान हित सर्वोपरि थे और मैंने उनसे जो वादा किया था, उसे पूरा करके दिखाया है। अब कांग्रेस, भाजपा, जजपा और निर्दलीय विधायकों को किसानों के मुद्दे पर अपनी स्थिति साफ करनी चाहिए।

महम कांड में भी बेदाग होकर निकले अभय चौटाला

रोहतक जिले के महम कांड में सवालों से घिरे अभय चौटाला तीन दिन पहले ही बेदाग होकर निकले हैं। हरियाणा की राजनीति में उथल-पुथल मचाने वाले बहुचर्चित महम कांड में सोमवार को रोहतक की अदालत ने फैसला सुनाते हुए केस दोबारा शुरू करने की पुनर्विचार याचिका खारिज खारिज कर दी। साथ ही अभय सिंह चौटाला समेत कुछ लोगों को हत्या के केस से बरी कर दिया है। 1990 में महम उपचुनाव के दौरान बेंसी गांव में बवाल हुआ था। इस मामले को लेकर खरक जाटान निवासी मृतक हरि सिंह के भाई रामफल ने सेशन कोर्ट में इनेलो नेता अभय चौटाला और पूर्व डीआइजी शमशेर सिंह समेत कई के ऊपर आरोप लगाया था। 2018 में सेशन कोर्ट में पुनर्विचार याचिका फाइल की गई थी। एडीजे रीतू वाईके बहल की अदालत ने फैसला सुनाया था।

यह रहा अभय चौटाला के इस्तीफे का मसौदा

अध्यक्ष महोदय... आपको ज्ञात होगा कि मैंने पहले अपना त्यागपत्र दिनांक 11 जनवरी और दूसरी बार 14 जनवरी 2021 को आपके कार्यालय को भेजा था। इसमें मैंने लिखा था कि अगर 26 जनवरी 2021 तक किसानों की मांगें नहीं मानी गई तो मेरा विधानसभा क्षेत्र ऐलनाबाद से त्यागपत्र 27 जनवरी 2021 से स्वीकृत कर लिया जाए। इसलिए मैं आज फिर से आपके समक्ष अपना त्यागपत्र प्रस्तुत करता हूं। - अभय चौटाला, इनेलो विधायक, ऐलनाबाद

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